हजारों एकड़ कृषि भूमि कटाव के कारण सोन नदी में हो रही विलीन

Aurangabad News - देश के आजादी के बाद से ही गांव और उपजाऊ भूमि को बचाने के लिए सोन तटीय इलाके के लोग कटाव निरोधक कार्य कराने के लिए...

Bhaskar News Network

May 18, 2019, 07:26 AM IST
Dev News - thousands of acres of agricultural land merge due to erosion in son river
देश के आजादी के बाद से ही गांव और उपजाऊ भूमि को बचाने के लिए सोन तटीय इलाके के लोग कटाव निरोधक कार्य कराने के लिए संघर्ष कर रहे हैं। उसके बावजूद उनका संघर्ष परवान नहीं चढ़ रहा है। जिले के रोहतास एवं नौहट्टा प्रखंड में सोन नदी के किनारे बसे गांव के ग्रामीण बताते हैं कि पीढ़ी दर पीढ़ी उनकी लड़ाई चल रही है वह मर जाएंगे। कटाव निरोधक कार्य की लड़ाई उनके बेटा नाती लड़ेंगे पर तटबंध की लड़ाई नहीं छोड़ेंगे। यह उनके अस्तित्व से जुड़ा है। भले वह आजादी से अब तक चुनावी मुद्दा नहीं बन सका। रोहतास प्रखंड अंतर्गत रसूलपुर गांव के निवासी पूर्व प्रखण्ड प्रमुख कामेश्वर सिंह, अकबरपुर के पूर्व मुखिया शौकत अली नियाजी, भाजपा नेता अजय देव बताते हैं कि इलाका के हजारों एकड़ उपजाऊ भूमि सोन नदी के कटाव के कारण नदी के गर्भ में समा चुका है। उसके बाद भी वर्षाें से क्षेत्र के किसान सरकार को मालगुजारी दे रहे हैं। जबकि उस भूमि पर सोन नदी की मुख्यधारा बहती है। कटाव का यही हालत रहा तो इन दोनों प्रखंडों के गांव के किसानों के पास एक धुर भी जमीन नहीं बचेगा। कटाव निरोधक कार्य नहीं हुआ तो दोनों प्रखंड के किसान भूमिहीन हो जाएंगे। उनके पास पहले से ही उतनी जमीन नहीं बची है की उससे साल भर के लिए दो वक्त का भोजन का जुगाड़ हो सके। रोहतास प्रखण्ड की प्रमुख दिव्या भारती ने कहा कि सोन नदी के कटाव प्रभावित गांव के नवयुवकों का राेजी- रोटी के लिए पलायन मजबूरी है। दोनों प्रखंड के युवक रोजगार की खोज में इस इलाके को छोड़कर देश के विभिन्न राज्यों में पलायन कर रहे हैं। यह सिलसिला साल दर साल से चलते आ रहा है। वर्ष 1975 से रोहतास प्रखंड के तुंबा, कर्मा, नावाडीह, खजूरी, रसूलपुर, कसीगांवा, बंजारी, समहुता, बकनौरा, अकबरपुर, उचैला, पटखोलिया, जमुआ, नावाडीह, मझिगावां, नौहट्टा प्रखंड के शाहपुर, बलियारी, सिंहपुर, बेलौजा, भदारा, बान्दू, अमरखा, भवनाथपुर, सियालदह, नौहट्टा, तिऊरा, पड़रिया, तिलोखर, पांडुका, परछा, तियरा, नावाडीह, महुआ, मटियाव, यदुनाथपुर, जारादाग, बेलदूरियां, मरखोहा आदि गांव सोन नदी के कटाव के कारण पूरी तरह प्रभावित है। इन गांवों में कृषि योग उपजाऊ भूमि सोन नदी के कटाव के कारण मुख्य धारा में विलीन हो गया है। जिस भूमि पर कल तक किसान खेती करते थे। उस जमीन पर आज सोन नदी की मुख्य धारा बह रही है, लेकिन इसके समाधान की दिशा में अब तक राज्य एवं केंद्र सरकार द्वारा कारगर पहल नहीं की गई है। जिसके कारण प्रत्येक वर्ष जुलाई माह से लेकर सितंबर माह तक वर्षा ऋतु में सोन नदी के बाढ़ से कटाव का कहर जारी है। दूसरी तरफ सोन नदी के बाढ़ के पानी के साथ उपजाऊ भूमि पर बालू डालकर बंजर बना दिया है। बाढ़ के पानी के चलते एक तरफ कटाव तेज गति से हो रहा है तो दूसरी तरफ उपजाऊ भूमि बालू आ जाने के कारण बंजर हो रही है। बाढ़ कटाव के प्रकोप से अब तक 25000 हजार से ज्यादा की आबादी प्रभावित हुआ है। सोन नदी के कटाव से बचाने के लिए जलसंसाधन विभाग द्वारा कई बार रसूलपुर कसिगांवा तथा अवसानी नदी के कटाव से बचाव के लिए अकबरपुर मदरसा का प्रस्ताव राज्य सरकार को दिया गया। परन्तु प्रस्ताव को अंतिम समय में अस्वीकृत कर दिया गया। गत वर्ष बिहार राज्य बाढ़ कटाव निरोधक समिति के अध्यक्ष मोहम्मद हयात ने खुद कटाव प्रभावित गांवों का दौरा कर कटाव का जायजा लिया था और कटाव निरोध कार्य करने का अनुशंसा जलसंसाधन विभाग से किया था, लेकिन अंतिम वक्त में कोई करवाई नहीं हो सका।

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