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हसपुरा में जल जीवन हरियाली योजना का बुरा हाल, विभाग के पास पैसे नहीं, पौधों में नहीं डाल रहे पानी

5 महीने पहले
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धरती को हरा - भरा बनाने व जल संकट से मुक्ति दिलाने के लिए जल जीवन हरियाली योजना चलाया जा रहा है। गर्मी आने से पहले हसपुरा प्रखंड के सभी जलस्रोतों को दुरूस्त करने की योजना जोर शोर से ली गई थी। लेकिन राशि के अभाव में योजनाएं सिर्फ फाइलों में ही सिमटकर रह गई है। धरातल पर इस योजना का कोई काम नहीं दिख रहा है। इतना ही नहीं इस योजना के तहत प्रखंड में 86 यूनिट लगाए गये पौधे भी सुख रहे है क्योंकि मजदूरी नहीं मिलने के कारण वन-पोषक काम नहीं कर रहें है। प्रखंड में जल जीवन हरियाली के तहत मनरेगा में 256 योजनाएं ली गई थी। जिसमें अनुमानित 2 करोड़ व 73 लाख रुपये खर्च होना है। लेकिन विभाग के पास राशि ही उपलब्ध नहीं है। सबसे बुरा हाल मजदूरों का है। पिछले महीने से मजदूरों के खाते में पैसे नहीं आ रहें है। जिससे उनके सामने कई परेशानी उत्पन्न हो गई है।

तालाब व 1142 कुओं का होना है जीर्णोद्धार

जल जीवन हरियाली योजना के तहत हसपुरा प्रखंड को हरा भरा बनाने के लिए व्यापक योजना बनाई गई थी। इस योजना के तहत अब तक 232 तालाब व 1142 कुआं का सर्वे कर चिह्नित तो कर लिया पर राशि नहीं रहने के कारण इसके जीर्णोद्धार का काम शुरू नहीं हो सका। सभी पंचायतों में निजी जमीन पर चार-चार नए तालाब भी खुदवाया जाना था। । इन योजनाओं के क्रियान्वयन के बाद के बाद किसानों को सिंचाई की सुविधा के साथ इलाके का जलस्तर ऊपर लाने की योजना थी। 2019 में जिले में पानी की समस्या व मौसम में हो रहे बदलाव में सुधार के लिए जल-जीवन-हरियाली कार्यक्रम के तहत योजना तैयार किया गया था। वहीं हर पंचायत में सोख्ता के साथ- साथ सरकारी भवनों पर वाटर हार्वेस्टिंग का कार्य भी कराया जाना था। मनरेगा पीओ पंकज कुमार की माने तो जल जीवन हरियाली अभियान के तहत प्रखंड में व्यापक रूप से ये योजनाएं चलाई जानी है। जिसको लेकर कार्ययोजना बनाया गया है। इसके तहत सोख्ता, रेनवाटर हार्वेस्टिंग, तालाब निर्माण व पौधारोपण किया जाएगा। प्रखंड में कुल 14 हजार नए पौधे लगाने का लक्ष्य है। लेकिन राशि के अभाव में इनकी बातें हवा हवाई साबित हो रहा है।

योजनाएं एक नजर में

जीर्णोद्धार के लिए तालाब - 232

कुआं - 1142

सोख्ता हर पंचायत में 12

प्रखंड में रेनवाटर हार्वेस्टिंग
सरकारी भवन में- 168


प्रखंड में निजी जमीन पर नये तालाब- 56

हसपुरा में मनरेगा के तहत लगाए गए गैवियन व पौधे।

दो साल से मेटेरियल व 8 फरवरी से मजदूरी का भुगतान है बंद

मनरेगा कार्यालय के अनुसार पिछले दो वर्षों से विभाग द्वारा मेटेरियल का पैसा नहीं आ रहा है। सिर्फ कच्चा काम हो रहा है, वही 8 फरवरी से मजदूरों के मजदूरी का भी पैसा नहीं आ रहा है। जिसके कारण मजदूर भुखमरी के कगार पर पहुंच गए है। प्रखंड में वृक्षारोपण की 70 यूनिट पुरानी योजनाएं , जबकि 86 यूनिट नई योजनाएं चल रही है। पुरानी योजना तीन वर्षों व नई योजना पांच वर्षों के लिए है। वन पोषकों को मजदूरी नहीं मिलने के कारण वे काम नहीं कर रहें है। पौधे सुख रहें है। पलायन रोकने के लिए मनरेगा कार्यक्रम चलाया गया था। फिर भी ग्रामीण काम के लिए दूसरे विकसित राज्यों का रुख करते थे ,लेकिन विश्वभर में कोरोना के कहर के कारण बाहर भी काम बंद है। वापस लौटे नये मजदूरों को गांव में काम की बात तो दूर पुराने मजदूरों को भी काम नहीं मिल रहा है। उनके मजदूरी के पैसे भी लटके हुए है।बोले कार्यपालक अभियंता मनरेगा के कार्यपालक अभियंता अनिल कुमार ने कहा कि पैसे नहीं रहने के कारण योजनाएं लंबित है। इसकी सूचना वरीय स्तर पर दिया जा चुका है। मजदूरों को आश्वश्त करता हूं कि उनकी मजदूरी का भुगतान होगा। आवंटन आते ही उनके खाते में पैसा चला जायेगा।

खंड में 232 तालाब व 1142 कुंअाें के जीर्णोद्धार का पैसों की कमी के कारण नहीं हुआ शुरू

प्रखंड स्थित मनरेगा कार्यालय।
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