पाएं अपने शहर की ताज़ा ख़बरें और फ्री ई-पेपर

डाउनलोड करें
  • Hindi News
  • National
  • Banka News 300 Years Old Jagatpur Durga Temple Is Undergoing Reconstruction

300 वर्ष पुरानी जगतपुर दुर्गा मंदिर का हो रहा पुर्ननिर्माण

एक वर्ष पहले
  • कॉपी लिंक

बांका शहर के जगतपुर दुर्गा मंदिर के पुर्ननिर्माण को लेकर यहां के लोगों में हर्ष व्याप्त है। पुराने दुर्गा मंदिर की जगह नए एवं भव्य मंदिर के निर्माण को लेकर बुधवार से कार्य प्रारंभ हो गया है। 300 से अधिक वर्षों से आस्था के इस मंदिर के नए रूप को लेकर अभी से श्रद्धालुओं में उत्साह चरम पर है।

मंदिर के पुराने एवं जर्जर हो जाने के कारण इसके नवनिर्माण की आवश्यकता कई वर्षों से महसूस की जा रही थी। इसकी शुरुआत 4 मार्च को हो गई, जब पूरी विधि-विधान से बाहर के पुरोहितों द्वारा धार्मिक अनुष्ठान के साथ मां भगवती को बगल स्थित शिवालय में स्थापित किया गया। जिसे एक बार पुन: धार्मिक अनुष्ठान एवं विधि विधान के साथ दशहरे के पूर्व नए भव्य मंदिर में स्थापित किया जाएगा। दशहरा के पूर्व जगतपुर दुर्गा मंदिर अब नए लूक में दिखेगा।

स्थानीय बुजुर्गों का कहना है कि पूर्व में यह मंदिर फूस के बने थे, जिससे यहां के ब्राह्मण समाज के बनवारी लाल चौधरी को स्वप्न में मां का आदेश आया कि फमस की मंदिर की जगह पक्के मंदिर का निर्माण कराएं। स्वप्न की बातें उन्होंने स्थानीय दरबारी लाल सिंह को बतायी एवं कहा कि वह मंदिर का निर्माण करेंगे परंतु सेवायत के रूप में वही रहें।

सभी की सहमति से कराया जा रहा है मंदिर का निर्माण कार्य

मंदिर के मेढ़पति केशव चंद्र ने बताया की वर्षों पुराने एवं जर्जर इस मंदिर के पुर्ननिर्माण की अनावश्यकता श्रद्धालुओं की सुरक्षा एवं आस्था को ध्यान में रखकर किया जाना आवश्यक हो गया था। जिसे सभी के सहमति से किया जा रहा है। स्थानीय युवक श्रमदान भी यहां आकर करने को तैयार है।

जगतपुर स्थित पौराणिक दुर्गा मंदिर जिसे दिया जा रहा है भव्य रूप।


200 से अधिक चिराग जलते हैं मंदिर परिसर में

दशहरे में मंदिर में 3 दिनों तक लगातार दो सौ से अधिक चिराग अनवरत रूप से जलते रहते हैं। जिससे मंदिर का तापमान 50 डिग्री से अधिक हो जाता है, परंतु इस तापमान में भी पूजा-अर्चना लगातार जारी रहती है।

कंधे पर लेकर प्रतिमा का किया जाता है विसर्जन

गांव के ग्रामीणों अपने कांधे पर मां दुर्गा की प्रतिमा को 1 किलोमीटर से अधिक दूरी तक तालाब में ले जाकर विसर्जित करते हैं, जिसकी भव्यता देखते ही बनती है।

खबरें और भी हैं...