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मिनी पॉल्ट्री खोलने को 500 एससी लाभुकों को 10 रुपए में मिलेगा चूजा
मेहनत मजदूरी कर बड़ी कठिनाई से अपना और अपने परिवार की आजीविका चलाने वाले एससी वर्ग के लोगों का जीवन स्तर उंचा करने की दिशा में सरकार ने एक महत्वपूर्ण पहल की है। ऐसे लोगों को बहुत ही कम लागत में मिनी फार्म बनाकर मुर्गीपालन के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है। पॉल्ट्री डेवलपमेंट योजना के तहत मिनी मुर्गा फार्म के लिए जिले में 500 एससी लाभुकों को चूजे दिए जाने हैं। पूरे जिले में प्रति परिवार 45 चूजा देने का प्रावधान है। ताकि एससी वर्ग के लोग रोजगार कर अपनी आजीविका को दुरुस्त कर सकें।
10 रुपए प्रति चूजा लाभुकों को कराया जाएगा उपलब्ध
पशुपालन विभाग जिले के अनुसूचित जाति के बीपीएल धारी लोगों को आर्थिक रूप से सबल बनाने के लिए मुर्गीपालन के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है। पॉल्ट्री डेवलपमेंट योजना के तहत मिनी मुर्गा फार्म के लिए 500 परिवार को चूजे दिए जाएंगे। इसके लिए सभी प्रखंड पशुपालन पदाधिकारी को अपने-अपने प्रखंड से सूची तैयार कर जिला को उपलब्ध कराने का निर्देश दिया गया है। इस योजना के तहत प्रत्येक लाभुकों को 10 रुपए प्रति चूजा दिया जाएगा। योजना के तहत एक लाभुकों को अधिकतम 45 चूजा दिया जाएगा। ताकि वह मुर्गी पालन कर धीरे-धीरे अपने व्यवसाय को बढ़ा सकें। कुकुट पदाधिकारी डॉ. ब्रजभूषण बच्चू ने बताया कि आम तौर पर एससी वर्ग के लोगों को सबसे ज्यादा जमीन और पैसे की समस्या होती है। इस योजना के तहत 500 परिवारों को 45 चूजा दिया जाएगा। ऐसे लोगों को लाभान्वित करने के लिए विभाग द्वारा इस योजना का लाभ दिया जाएगा। बताया कि यदि किसान इसको व्यवसाय का रूप भी देना चाहें तो 10 हजार रुपए की लागत से छोटे से बांस का फार्म बनाकर अंडा का उत्पादन कर सकते हैं।
गरीबों के उत्थान के लिए कृत संकल्पित है विभाग
जिला पशुपालन पदाधिकारी विपिन बिहारी सिंह ने कहा कि पशुपालन विभाग गरीबों के उत्थान के लिए कृत संकल्पित है। इसके कारण विभाग द्वारा विभिन्न योजनाएं लाकर गरीबों को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में कार्य किया जा रहा है। इसी का एक उदाहरण एससी लाभुकों को 10 रुपए प्रति चूजा देना है। ताकि ज्यादा से ज्यादा लोग इस योजना का लाभ लें और आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बन सकें। उन्होंने कहा कि योजना का प्रचार-प्रसार किया जा रहा है। युवाओं व बेरोजगारों को कई तरह के कार्यक्रम के माध्यम से जागरूक किया जा रहा है।
अंडा का भी कर सकते हैं व्यवसाय, कम लागत में होगा ज्यादा मुनाफा
जिला पशुपालन पदाधिकारी डॉ. विपिन बिहारी सिंह ने बताया कि इस योजना के तहत दी जाने वाले मुर्गी से मांस के साथ अंडा का भी व्यवसाय कर सकते हैं। देसी नस्लों की अपेक्षा उन्नत नस्लों में अंडा देने की क्षमता ज्यादा होती है। इसके लिए जगह की भी ज्यादा जरूरत नहीं होती है। एक मुर्गी के लिए एक वर्ग फीट जगह की आवश्यकता होती है। उल्लेखनीय है कि मुर्गी पालन एक ऐसा व्यवसाय है, जिसे बहुत कम लागत से शुरू कर मोटी कमाई की जा सकती है। मुर्गी पालन के लिए विभाग द्वारा सिर्फ चूजा दिया जा रहा है। लेकिन उसके रख-रखाव के लिए जरूरी सामग्री की खरीदारी लाभुक को स्वयं करनी होगी।
जिला पशुपालन कार्यालय बांका।
पशुपालन विभाग सिर्फ चूजा देगा, जरूरी सामग्री की खरीदारी स्वयं ही करनी होगी