कमीशन के लालच में मरीजों की जान ताक पर रखते कर्मी

Banka News - सरकार स्वास्थ्य सुविधाओं में बेहतरी के लिए लाखों रुपए खर्च कर रही है, लेकिन स्वास्थ्य कर्मियों के कारण...

Bhaskar News Network

Jun 15, 2019, 06:30 AM IST
Banka News - employees keeping the lives of patients in the greed of commission
सरकार स्वास्थ्य सुविधाओं में बेहतरी के लिए लाखों रुपए खर्च कर रही है, लेकिन स्वास्थ्य कर्मियों के कारण कल्याणकारी योजनाएं धरातल पर नहीं उतर पा रही है। कर्मियों की लापरवाही का खामियाजा मरीजों को भुगतना पड़ रहा है। थोड़े पैसों की लालच में स्वास्थ्य कर्मी प्रसूताओं और अन्य मरीजों के जान के साथ खेलने से गुरेज नहीं कर रहे हैं। वे मरीजों को बरगला कर निजी नर्सिंग होम में भेजते है। जहां मरीजों से जमकर पैसा वसूला जाता है। इस काम में स्वास्थ्य विभाग के कई ईएमटी कर्मी जुटे हैं।

जिले के विभिन्न क्षेत्रों में कार्यरत आशा की लापरवाही का नतीजा है कि एक माह के अंदर आधा दर्जन से अधिक प्रसूताओं की मौत हो चुकी है। वहीं कुछ जगहों पर जच्चा-बच्चा की भी मौत हुई है। इसके बावजूद स्वास्थ्य विभाग के साथ-साथ जिला प्रशासन ने अभी तक संबंधित प्राइवेट नर्सिंग होम के विरूद्ध कोई कार्रवाई नहीं की है। मामले पर डीएम कुंदन कुमार भी गोलमटोल जवाब देते दिखे। उन्होंने कहा कि दो दिन पूर्व ही स्वास्थ्य विभाग की बैठक की गयी है, जिसमें कई अहम फैसले लिए गए थे। नर्सिंग होम पर भी निगरानी रखे जाने की बात की गयी है।

प्राइवेट नर्सिंग होम वाले देते हैं मोटा कमीशन

सदर अस्पताल से प्रसूताओं व अन्य मरीजों को मोटे कमीशन के चक्कर में आशा या उनके पति के द्वारा प्राइवेट नर्सिंग होम भेजा जाता है। यह खेल लंबे समय से चल रहा है। बीते मंगलवार को संजीवनी नर्सिंग होम में एक प्रसूता की मौत के बाद एक बार फिर यह मामला उजागर हुआ। परिजनों ने साफ-साफ बताया कि कटोरिया की आशा सुषमा देवी व उनके पति वेदानंद ने कविता देवी को सदर अस्पताल से बिना किसी सूचना के संजीवनी नर्सिंग होम में भर्ती करवा दिया, जहां उनकी मौत हो गई। वहीं बौंसी रेफरल अस्पताल में कार्यरत आशा नीलम सिंह पर प्रसव कराने के एवज में 700 वसूलने का आरोप है, जिसकी जांच की जा रही है।

नौकरी से बर्खास्त किया गया ईएमटी

सदर अस्पताल में कार्यरत ईएमटी दीपक कुमार ने कमीशन के चक्कर में एक मृत प्रसूता को संजीवनी नर्सिंग होम में भेजने की कोशिश की। लेकिन डॉक्टर ने मामला को भांपते हुए मृतक को चेक किया और मृत घोषित किया। बुधवार को जब डीएस डॉ. सुनील कुमार चौधरी व अस्पताल प्रबंधक अमरेश कुमार ने जांच की तो ईएमटी के कारनामे का पर्दाफाश हो गया। जिसके बाद अस्पताल प्रबंधन ने दीपक कुमार को नौकरी से बर्खास्त कर दिया।

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