पुण्य करने के बाद मिलता मनुष्य जीवन
प्रखंड क्षेत्र के अटपहरा गांव में बुधवार को तीन दिवसीय सुखद सत्संग समारोह शुरू हुआ। सत्संग के पहले दिन लखीमपुर से आए संत असंग देव महाराज ने प्रवचन सुनाते हुए कहा कि जीवन क्या है और जीव किस काम के लिए पैदा हुआ है। एक स्त्री अपने जीवन में बेटी, प|ी, मां, सास सब बनती है लेकिन नारायणी नहीं बन पाती, जिसके लिए वह पैदा हुई है। उसी प्रकार एक पुरूष अपने जीवन में बेटा, पति, ससुर सब बन जाता है लेकिन नारायण नहीं बन पाता।
जिस प्रकार पेड़ से फल टूटकर गिर जाता है और दोबारा नहीं जुड़ता। इसी प्रकार मनुष्य का जीवन भी बार-बार नहीं मिलता है। यह जीवन कई पुण्य कर्म करने के बाद मिलता है। इससे मनुष्य को अपना जीवन व्यर्थ में नहीं गवाना चाहिए। संत असंग देव महाराज ने कहा कि सदगुरू ही वैद्य है। ज्ञान का मार्ग छुरे की धार पर चलने के समान है। आज मनुष्य के अंदर वासना भरी हुई है, वहीं फैशन के रूप में झलकती है। संतसंग मनुष्य के चेतना को जागृत करती है, और ये चेतना जिसमें भी जग गई वह हमेशा सत्कर्म के मार्ग पर चलेगा। मनुष्य के शरीर से जीव निकल जाने के बाद इन्द्रियां काम करना बंद कर देती है। मौके पर वकील रास बिहारी शर्मा, इन्दर साह, जयप्रकाश साह, पप्पू यादव, मुखिया प्रतिनिधी मो. आलमगीर, महेन्द्र मंडल, श्याम सुन्दर साह, गोपाल, रामलखन, सचिदानन्द, सोनू कुमार सहित अन्य मौजूद थे।
सुखद सत्संग समारोह में प्रवचन देते संत असंग देव महराज।