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कथावाचक ने कहा- शिव से ही हुई है सृष्टि की उत्पत्ति, लगे शिव के जयकारे
प्रखंड क्षेत्र के पंचवीर पंचायत स्थित मध्य विद्यालय पंचवीर के प्रांगण में 26 फरवरी से 7 मार्च तक आयोजित 11 दिवसीय शिव महापुराण कथा ज्ञान यज्ञ का शनिवार को समापन हो गया। समापन को लेकर कथावाचक को सुनने के लिए यज्ञ स्थल पर श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ पड़ी। चारों ओर हर-हर महादेव, जय शिव जय शिव के जयकारे लग रहे थे। लाउडस्पीकर से निकल रहे भगवान शिव के जयकारे के ध्वनि की गूंज से आसपास का पूरा इलाका भक्तिभाव के रस में सराबोर हो गया। यज्ञ के अंतिम दिन भगवान शिव के महिमा का वर्णन करते हुए वृंदावन के सुप्रसिद्ध कथावाचक रामाशंकर उपाध्याय महाराज ने कहा कि अनादि काल से ही भगवान शिव देवों के देव महादेव कहे जाते हैं। शिव से सृष्टि है, अर्थात भगवान शिव ने ही सृष्टि की उत्पत्ति की है। शिव नहीं तो सृष्टि नहीं। उन्होंने कहा कि शिव की कृपा बगैर इस सृष्टि में कोई भी जीव-जंतु जीवित नहीं रह सकता है। शिव अर्थात शरीर के अंदर बैठा आत्मा। उन्होंने कहा कि शिव में ही शव अर्थात पार्थिव शरीर निहित है। भगवान शिव के कथा का श्रवण करने और भक्तिभाव से उनका पूजा-अर्चना करने वाले भक्तों के सभी कष्ट दूर हो जाते हैं। कथावाचक ने कहा कि शिव ही सत्यम शिवम सुन्दरम है। अर्थात शिव ही सत्य है, शिव ही शिवम है और शिव ही सुंदर है। भगवान शिव देवों के देव महादेव इसलिए भी कहे जाते हैं कि वे गंगाजल से किए जाने वाले जलाभिषेकों से ही अपने भक्तों पर प्रसन्न हो जाते हैं। उनके इसी दयालु स्वभाव का लाभ पूर्व काल में दानवों ने भी उठाया और भगवान शिव से अनेकानेक वरदान हासिल किया। इस अवसर पर भजन मंडली कलाकारों ने अपने संगीतमय भजन से श्रद्धालुओं को भक्तिभाव में ओतप्रोत कर झूमने पर मजबूर कर दिया। वृंदावन के कलाकारों द्वारा प्रस्तुत की गई भगवान की झांकी भी मुख्य आकर्षण का केंद्र बना रहा।
मौके पर ये लोग थे उपस्थित
मौके पर राधा-कृष्ण भक्त मंडली के भक्तगण के साथ मुख्य यजमान नंदकिशोर प्रसाद सुमन, पूर्व जिला पार्षद शिवजी सिंह, सरपंच रेणु देवी, रामप्रवेश चौरसिया, सामाजसेवी विजेन्द्र सिंह, विनोद अग्रवाल, जुगल किशोर सिंह, सदन सिंह, उमेश सिंह, मणिकांत जालान, पप्पू अग्रवाल, अर्जुन अग्रवाल ,साजन कुमार, मोहन मालाकार, रंजीत सिंह, अभिलेख महतो, हरदेव महतो, इंद्रदेव कुमार मौजूद थे।
श्रीमद्भागवत कथा के छठे दिन श्रीकृष्ण-रुक्मिणी विवाह के प्रसंग पर झूमे श्रोता
बलिया| प्रखंड क्षेत्र के भगतपुर गांव स्थित शिव मंदिर प्रांगण में चल रहे सात दिवसीय श्रीमद्भागवत कथा के आयोजन के छठे दिन शनिवार को श्रीकृष्ण-रुक्मिणी विवाह का प्रसंग सुनाया। कथावाचक राम सुंदर दास जी ने कहा रुक्मिणी विदर्भ देश के राजा भीष्म की पुत्री और साक्षात लक्ष्मी की अवतार थी।
रुक्मिणी ने जब देवर्षि नारद के मुख से श्रीकृृष्ण के रूप, सौंदर्य व गुणों की प्रशंसा सुनी तो उन्होंने मन ही मन श्रीकृष्ण को वर मान लिया था। रुक्मिणी का बड़ा भाई रुक्मीण श्रीकृष्ण से शत्रुता रखता था। अपनी बहन का विवाह राजा शिशुपाल से कराना चाहता था। कथावाचक ने कहा जो भक्त प्रेमी कृष्ण-रुक्मिणी के विवाह उत्सव में शामिल होते हैं। उनकी वैवाहिक समस्या हमेशा के लिए समाप्त हो जाती है। जीव परमात्मा का अंश है। इसके लिए जीव के अंदर अपार शक्ति रहती है। यदि कोई कमी रहती है वह मात्र संकल्प की होती है। इस दौरान सैकड़ों की संख्या में उपस्थित महिला पुरुष श्रोताओं ने श्री कृष्ण विवाह उत्सव के दौरान विवाह गीत पर जमकर झूमे।
पंचवीर में आयोजित 11 दिवसीय शिव महापुराण कथा ज्ञान यज्ञ के समापन के अवसर निकाली गई झांकी।