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निराकार परमात्मा के बारे में जानना ही मानव जीवन का है मूल उद्देश्य

एक वर्ष पहले
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मानव जीवन का मुख्य उद्देश्य सर्वव्यापी, सर्वज्ञ, सर्वशक्तिमान निराकार प्रभु को जानना है अर्थात ब्रह्मज्ञान प्राप्त करना है। यह दिव्य ज्ञान मानव जीवन में समरसता लाता है। ये बातें गढ़पुरा हाई स्कूल में शनिवार को आयोजित एक दिवसीय निरंकारी संत समागम कार्यक्रम में जोनल इंचार्ज व मुख्य वक्ता एसपी सिंह ने कही। उन्होंने कहा कि दृष्टिगोचर संसार परिवर्तनशील है। इस परिवर्तनशील संसार में जो अपरिवर्तनीय है वही निराकार परमात्मा हैं। इसका कोई रंग-रूप, आकार नहीं है। यह निराकार है। उन्होंने कहा परमतत्व का ज्ञाता ही निराकार प्रभु की अनुभूति कराने में समर्थ होता है। सतगुरु वस्तुतः निराकार ब्रह्म की शगुन सत्ता है जो शरीर के माध्यम से कार्य करती है। आत्मा परमात्मा की अंश है। उन्होंने कहा संत निरंकारी मिशन की पांच प्रण है। जैसे पहला-तन, मन, धन, प्रभु (निरंकार) की देन है। इन्हें प्रभु की देन समझकर जीवन में प्रयोग करना है और इनका अभिमान नहीं करना है। दूसरा, जात-पात, वर्ण, आश्रम आदि का अभिमान नहीं करना है। तीसरा, किसी के खान-पान और रहन-सहन पर आपत्ति या नफरत नहीं करनी है। चौथा, गृहस्थ में रहना है। वेषधारी साधु, संत, फकीर बनकर समाज पर बोझ नहीं बनना है। और पांचवा, सतगुरु द्वारा दिया गया ब्रह्मज्ञान सतगुरु की आज्ञा के बिना नहीं खोलना है।

निरंकारी संत समागम कार्यक्रम में जोनल इंचार्ज ने लोगों को किया संबोधित

पाणिग्रहण संस्कार भी किया गया

निरंकारी संत समागम कार्यक्रम में शादी समारोह पाणिग्रहण संस्कार का भी आयोजन किया गया। जिसमें कुशेश्वरस्थान के घुड़दौड़ निवासी नवीन कुमार और खोदावंदपुर के तारा बरियारपुर निवासी पूजा कुमारी परिणय सूत्र में बंधे। इस अवसर पर हंस कुमार हंस, दीपक कुमार, कृष्ण कुमार, विजय कुमार द्वारा भक्ति गीत भी प्रस्तुत किया गया। शनिवार को मौसम की प्रतिकूलता के बावजूद बेगूसराय, खगड़िया, समस्तीपुर, सहरसा, दरभंगा जिला के श्रद्धालु इस कार्यक्रम में भाग लेने पहुंचे थे। श्रद्धालुओं के लिए लंगर की भी व्यवस्था की गई थी।

निरंकारी संत समागम में अपनी बात रखते वक्ता।
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