तीन साथियों के साथ भागड़ यादव ने कर दिया समर्पण

Bettiah Bagha News - वैसे तो ऑपरेशन ब्लैक पैंथर के बाद ही खुद को असुरक्षित महसूस करने पर योगापट्‌टी थाना क्षेत्र के कोरिगावां निवासी...

Bhaskar News Network

Oct 22, 2019, 06:30 AM IST
Bairiya News - bhagad yadav surrendered with three companions
वैसे तो ऑपरेशन ब्लैक पैंथर के बाद ही खुद को असुरक्षित महसूस करने पर योगापट्‌टी थाना क्षेत्र के कोरिगावां निवासी कुख्यात सतन यादव ने हथियार डाल कर पुलिस के आगे दस्युओं के घुटने टेकने की शुरुआत कर दी थी। बाद में इक्के-दुक्के दस्युओं ने भी समर्पण कर दिया। जब जंगल पार्टी के सरदार भागड़ यादव को असुरक्षा का अहसास हुआ तो एसपी केएस अनुपम से संपर्क साधा। सहमति मिलने पर उसने 8 मई, 2008 को उदयपुर वन क्षेत्र के बैरिया में समारोहपूर्वक शागिर्द सोखा यादव और लखी बीन के साथ पुलिस के आगे हथियार डाल दिया। मंच पर एसपी के अलावा दर्जन भर पदाधिकारियों के साथ बड़ी संख्या में पुलिस मौजूद थी। भागड़ को देखने के लिए हजारों लोगों की भीड़ उमड़ पड़ी थी।

सफेद धोती-कुर्ता में मंच पर आते ही भागड़ ने हाथ जोड़ कर लोगों का अभिवादन किया और गलतियों के लिए माफी मांगी। भीड़ से ‘भागड़ जिंदाबाद’ के नारे के साथ तालियां गूंज उठीं। भागड़ ने कहा, ‘मैंने भाई लक्षण की हत्या का बदला लेने के लिए 1984 में हथियार उठाया था। भाई के हत्यारे की हत्या के अलावा किसी और की हत्या नहीं की।’ मगर, भागड़ पर प. चंपारण और सीमावर्ती यूपी के थानों में करीब 150 मामले दर्ज थे। दरअसल, 19 मार्च, 1984 में जंगल पार्टी के सरदार लक्षण यादव की हत्या योगापट्‌टी के दुबवलिया गांव में कर दी गई थी। पुलिस रिकॉर्ड के मुताबिक लक्षण वकील अहमद से लेवी वसूलने गया था। इसी दौरान भीड़ ने उसकी हत्या कर दी। मगर, यह चर्चा भी सामने आई कि लक्षण उधार के पैसे वसूलने वकील के घर गया था। वहां खाने-पीने की व्यवस्था थी। लक्षण के पैसा मांगने पर वकील से विवाद हो गया। लक्षण पहलवान भी था, जमकर मारपीट होने लगी। इसी बीच वकील का पड़ोसी पहलवान कलाम मियां आया और लक्षण की हत्या कर दी।

उधर, सरदार की मौत बाद जंगल पार्टी नेतृत्वविहीन हो गई। तब उसके सदस्यों ने लक्षण के भाई भागड़ को उदयपुर बीहड़ में बुलाकर सरदार की ताजपोशी कर दी। भागड़ ने भाई की हत्या का बदला लेने का संकल्प लिया। इसी संकल्प के साथ उसने बंदूक चलाना सीखा। जब इसमें माहिर हो गया, तब मौका पाकर करीब तीन साल बाद एक सितंबर 1987 को साथियों को लेकर योगापट्‌टी के फतेहपुर चौक पहुंचा। सुबह करीब साढ़े दस बज रहे थे। बैंक के काम से लोगों की भीड़ जुटी थी। भागड़ को पक्की सूचना थी कि वकील अहमद फतेहपुर चौक गया है। -सुजीत कुमार ‘पप्पू’

कल पढ़िए : हम लक्षण के भाई बानी, आइल बानी करजा उतारे।

किस्त : 57

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