पारंपरिक लोक गीताें के साथ की गई करमा की पूजा, सारी रात झूमते रहे उरांव समुदाय के लोग

Bettiah Bagha News - जनजाति समुदाय के महापर्व करमा-धरमा का भव्य आयोजन रविवार को बगहा प्रखंड की जिमरी नौतनवा पंचायत के डढ़िया गांव में...

Bhaskar News Network

Oct 14, 2019, 06:30 AM IST
Bagha News - karma worship performed with traditional folk songs people of oraon community kept on chanting all night
जनजाति समुदाय के महापर्व करमा-धरमा का भव्य आयोजन रविवार को बगहा प्रखंड की जिमरी नौतनवा पंचायत के डढ़िया गांव में संपन्न हुई। बगहा पुलिस जिला के विभिन्न हिस्सों से पहुंचे जनजाति समुदाय के लोगों के साथ दूसरे जिलों व कैमूर से पहुंचे उरांव समुदाय के लोगों ने भी बड़े पैमाने पर भागीदारी निभाई। शाम से ही आदिवासी ढोल व मांदर की थाप पर इसमें शामिल लोग झूमने-गाने लगे।

अध्यक्ष राजेश उरांव ने बताया कि यूं तो करमा की पूजा भादो की एकादशी व पूर्णिमा तिथि को की जाती है, लेकिन बिहार में 13 अक्टूबर, 1985 को उरांव लोगो को आदिवासी का दर्जा मिला। इसके पहले हम यहां के मूल निवासी जरूर थे, लेकिन आदिवासी श्रेणी में नहीं थे। इस दर्जा मिलने के उपलक्ष्य में हर साल 13 अक्टूबर को यहां कर्मा पूजा का आयोजन किया जाता है। उन्होंने बताया कि यह मूलत: प्रकृति की पूजा का अवसर है। ऐसे में ये सभी लोग उल्लास से भरे होते हैं। करमा की पूजा कर अच्छे फसल की कामना के साथ बहनें अपने भाइयों की सलामती के लिए प्रार्थना करती हैं।

शनिवार की रात को की गई करमा वृक्ष की पूजा

शनिवार के रात में करमा पेड़ को रक्षा बांध कर अगले दिन पूजा के लिए पधारने का नेवता दिया गया। नेवता देने के लिए हुए आयोजन में बच्चे, महिला, पुरुष सभी की सहभागिता रही। सभी गाते बजाते नृत्य करते करमा वृक्ष का नेवता देकर घर आ गये।

धूमधाम से मनाया आदिवासियों का महापर्व करमा-धरमा, गूंजे मंदार, ढोल और नगाड़े

कार्यक्रम का उद्घाटन करते मंत्री व अन्य।

प्रकृति पूजन की परंपरा से जुड़े रहे हैं जनजाति समुदाय के लोग

इस आयोजन में सहभागिता निभा रहे लोगों ने बताया कि बच्चो व युवाओं को पूरे साल करमा का इंतजार रहता है। इसे काफी हर्षोल्लास से मनाया जाता है। मुखिया रतन उरांव ने बताया कि करमा पेड़ जंगल में बड़े पैमाने पर पाया जाता है, जिसके छांव में व शाखाओं पर उनके पूर्वज आश्रय लिया करते थे। इसलिए यह पेड़ उनकी संस्कृति का अहम भाग है। इसे वे भगवान का रूप मानते हैं। उन्होंने बताया कि वे लोग जंगल के किनारे या जंगल में वास करते हैं। उनका प्रकृति के साथ अटूट संबंध है। इसी परंपरा को त्योहार के रुप में मनाने का नाम है करमा धर्मा, जो प्रकृति व मानवता का संगम है। इसलिए वे कर्मा की पूजा करते हैं। इसे वे प्रकृति के आराध्य देव मानकर पूजा करते हैं। पूजा समाप्त होने के बाद वे इसकी डाल को पूरे धार्मिक रीति से तालाब, पोखर, नदी आदि में विसर्जित कर देते हैं।

ऐसे की गई पूजा

करमा देव की पूजा के लिए पूजा स्थलों को जंगल से लाए गए झाड़ व फूलों से सजाया गया। पूजा में बैठने वाले व्रती स्नान कर शाम में नये वस्त्र धारण कर शामिल हुए। फिर पारंपरिक रीति रिवाज व पूजा - पाठ के साथ कर्मा देव के डाल को काट कर लाया गया। डाल का स्वागत कर पुजारी ने उसे विधिपूर्वक पूजा स्थल पर स्थापित किया। पूजा के साथ ही करमा धरमा की कथा सुनायी गई। मांदर, ढोल, नगाड़े की धुन पर करमा के गीतों पर सामूहिक नृत्य पर सारी रात आदिवासी लोग झुमते रहे।

नृत्य करती महिलाएं।

पूजा समारोह में राज्य सरकार के मंत्री और विधायक आमंत्रित

मुखिया गोरख उरांव ने बताया कि संध्या समय आयोजित होने वाले विशेष पूजा समारोह में राज्य सरकार के मंत्री व विधायक आमंत्रित है। जिसमें ग्रामीण विकास मंत्री श्रवण कुमार, स्थानीय विधायक धीरेंद्र प्रताप सिंह, सांसद बैद्यनाथ महतो, पूर्व सांसद कैलास बैठा, पूर्व विधायक प्रभात रंजन सिंह समेत बगहा-2 प्रखंड बीडीओ प्रणव कुमार गिरी, स्थानीय थानाध्यक्ष व उराव महासंघ के अन्य क्षेत्रों से आए सदस्यों की गारिमामय उपस्थिति रहेगी। उरांव महासभा के अध्यक्ष राजेश उरांव, महामंत्री गोरख उरांव, सदस्य नथु उरांव, र| उरांव, मुखिया नरेश उरांव, बैरिस्टर उरांव, रामनाथ उरांव, राजेन्द्र उरांव, महाबीर उरांव, सीताराम उरांव, अरबिन्द उरांव आदि ने आयोजन में सक्रिय भूमिका निभाई।

Bagha News - karma worship performed with traditional folk songs people of oraon community kept on chanting all night
X
Bagha News - karma worship performed with traditional folk songs people of oraon community kept on chanting all night
Bagha News - karma worship performed with traditional folk songs people of oraon community kept on chanting all night
COMMENT

आज का राशिफल

पाएं अपना तीनों तरह का राशिफल, रोजाना