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- Bettiah News Not President Of Consumer Forum In 9 Districts Patna Is Also In Additional Charge 17 Districts Have Not Yet Decided This Year
9 जिलों में उपभोक्ता फोरम के अध्यक्ष नहीं, पटना भी अतिरिक्त प्रभार में, 17 जिलों में इस साल अबतक नहीं आया कोई फैसला
पटना। प्रचार होता है- जागो ग्राहक जागो! मगर, बिहार के जिला उपभोक्ता फोरमों की हालत ग्राहकों को भगाने वाली है। पटना जिला उपभोक्ता फोरम में 4500 केस पेंडिंग हैं। प्रदेश में ऐसे 20000 कंज्यूमर फोरम की दौड़ लगा रहे हैं। कहीं अध्यक्ष हैं तो सदस्य नहीं। कहीं दोनों सदस्य हैं, लेकिन अध्यक्ष नहीं रहने के कारण फैसला नहीं हो सकता। तभी तो 17 जिलों में इस साल एक भी फैसला नहीं आया है। वर्ल्ड कंज्यूमर राइट्स डे के 10 दिन पहले से दैनिक भास्कर ने बिहार के जिला उपभोक्ता फोरमों की पड़ताल शुरू की, लेकिन एक दिन पहले तक जहानाबाद और मधेपुरा जिले में जब जाइए, कोई बताने वाला नहीं।
भागो ग्राहक भागो } 10 दिनों तक पड़ताल के दौरान कई जिलों में जानकारी देने वाला कोई नहीं मिला, केस कौन ले
8 जगह अध्यक्ष और 1 सदस्य हैं
उपभोक्ता वाद से जुड़े दस्तावेजों को सहेजने, फाइलों के हस्तांतरण, नोटिस आदि की प्रक्रिया के लिए स्टाफ भी नहीं हैं। पटना में 38 में से 25 पद खाली हैं। नवादा में 10 में 9 तो, मधुबनी में 12 में 8 पद खाली हैं। बाकी जगह भी यही हाल है।
पटना समेत जहां अध्यक्ष नहीं हैं, वहां के लिए नियमावली में संशोधन के कारण अब दोबारा प्रक्रिया शुरू कराई गई है। अप्रैल के पहले हफ्ते तक सारे पद भर दिए जाएंगे। सदस्यों की नियुक्ति तो की गई थी। जहां नहीं हैं, उनका रिव्यू करेंगे। पटना के लिए देखता हूं कि डबल बेंच के लिए क्या किया जा सकता है। -मदन सहनी, खाद्य एवं उपभोक्ता संरक्षण मंत्री, बिहार
17 जिले, जहां इस साल फैसला नहीं
वैशाली, मधुबनी, बांका, रोहतास, खगड़िया, शिवहर, बेगूसराय, भागलपुर, गोपालगंज, अररिया, सीवान, बेतिया, मुंगेर, सहरसा, अरवल, छपरा, लखीसराय
1 जगह अध्यक्ष नहीं, सदस्य भी एक
8 जगह अध्यक्ष हैं, सदस्य कोई नहीं
7 जिले किस्मत वाले, यहां तीनों हैं
6 जिले में अध्यक्ष नहीं, सदस्य दोनों हैं
5 जिला फोरम में कोई भी नहीं
अतिरिक्त प्रभार में वैशाली
(फोरम बेकार, अकेले सुनवाई और अध्यक्ष के बगैर फैसला असंभव)
पूर्णिया, रोहतास, भागलपुर, सीवान, मुंगेर, सहरसा, छपरा, गया।
(अध्यक्ष के साथ एक सदस्य भी हो, तभी फैसला दिया जाना संभव है)
खगड़िया, बक्सर, जमुई, सीतामढ़ी, कटिहार, दरभंगा, सुपौल।
(दो सदस्यों में कोई एक नहीं भी है तो भी अध्यक्ष फैसला देते हैं)
किशनगंज, औरंगाबाद और पटना में अति. प्रभार, मधुबनी, बेगूसराय, आरा।
(फोरम बेकार, सदस्यों के पास फैसला देने का अधिकार नहीं)
शिवहर, गोपालगंज, अररिया, बेतिया, अरवल,
(फोरम बेकार, केस करना व तारीख लेना मुश्किल)
नवादा, बांका, समस्तीपुर, शेखपुरा, मुजफ्फरपुर, मोतिहारी,नालंदा, कैमूर।
(दोनों में से कोई भी अवकाश पर है तो सुनवाई बेकार रह जाती है)