गुरु नानक देवजी के 550वंे प्रकाश पर्व पर नगर कीर्तन के साथ निकाली गई भव्य शोभा यात्रा

Bettiah Bagha News - सिखों के पहले गुरुनानक देव के 550वंे प्रकाश पर्व पर रविवार को भव्य नगर कीर्तन के साथ शोभा यात्रा निकाई गई। शहर के तीन...

Nov 11, 2019, 06:41 AM IST
सिखों के पहले गुरुनानक देव के 550वंे प्रकाश पर्व पर रविवार को भव्य नगर कीर्तन के साथ शोभा यात्रा निकाई गई। शहर के तीन लालटेन चौक के समीप गुरुद्वारा से विशाल नगर कीर्तन निकाला गया। श्री गुरुग्रंथ साहिब को फूलों की पालकी से सजे वाहन पर सुशोभित कर नगर कीर्तन करते हुए श्रद्धालु शहर के तीन लालटेन चौक, लाल बाजार चौक, सोआबाबू चौक, अजंता चौक, जनता चौक, कविवर नेपाली चौक, पावर हाउस होते हुए गुरुद्वारा पहुंचे। प्रकाश उत्सव के उपलक्ष्य में निकाली गई शोभा यात्रा के दौरान रागी जत्था कीर्तन कर संगत को निहाल कर रहे थे। जत्थे का जगह-जगह पर फूलों से स्वागत किया गया। सभापति गरिमा देवी सिकारिया ने लाल बाजार स्थित अपने आवास पर भी जत्थे का स्वागत किया, शीतल पेय पिलाया एवं सेवा की। इतना ही नहीं जगह-जगह पर श्रद्धालुओं ने जत्थे में शामिल लोगों को पानी व शर्बत भी पिलाया।

गुरु नानक देवजी का अनमोल वचन : धन को अपनी जेब में रखें, हृदय में कभी नहीं दें स्थान

नगर कीर्तन के दौरान सिख समुदाय के श्रद्धालु।

कार्तिक शुक्ल पक्ष पूर्णिमा को हुआ जन्म

मुख्य जत्थेदार भाई करमजीत सिंह ने बताया कि कार्तिक शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा के दिन गुरु नानक देव जी का जन्म हुआ था जिस कारण इनके जन्मदिन को प्रकाश पर्व के रूप में मनाया जाता है। इस बार गुरु नानक देव जयंती 12 नवंबर दिन मंगलवार को पड़ रही है। इस दिन गुरु नानक देव के जीवन व उनके द्वारा दी गई शिक्षाओं को याद किया जाता है।

जयंती पर अखंड पाठ का होता है आयोजन

जत्थेदार भाई करमजीत सिंह ने बताया कि जयंती के दिन गुरु नानक देव को याद किया जाता है। समाज के लोग सभाएं करते हैं। गुरु नानक देव द्वारा दी गई शिक्षाओं के बारे में बताया जाता है। साथ ही उनके जीवन के बारे में बातें होती हैं। गुरु देव के जयंती के दिन गुरुद्वारा में अखंड पाठ भी किया जाता है। प्रमुख ग्रंथ गुरु ग्रंथ साहिब का पाठ में महिला-पुरुष व बच्चे शामिल होते हैं।

नगर कीर्तन के दौरान सडक पर झाड़ू लगाते श्रद्धालु।

जत्थेदार करमजीत सिंह ने बताया कि गुरु नानक देव के अनमोल वचन थे। उन्होंने कहा था कि धन को केवल जेब तक ही रखें, उसे अपने हृदय में कभी स्थान ना दें। जो धन को हृदय में स्थान देता है, हमेशा उसका ही नुकसान होता है। भोजन शरीर को जीवित रखने के लिए आवश्यक है लेकिन लोभ-लालच के चलते सिर्फ अपना सोचते हुए संग्रह करने की आदत बुरी है। भगवान केवल एक ही है। उसका नाम सत्य है रचनात्मकता उसकी शख्सियत है। अनश्वर ही उसका स्वरुप है। जिसमे जरा भी डर नहीं, जो द्वेष भाव से पराया है। गुरु की दया से ही इसे प्राप्त किया जा सकता है।

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