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श्रीमद्भागवत कथा के श्रवण से राजा परीक्षित को मिली थी श्राप से मुक्ति, 88 हजार शौनकादि ऋषि पहुंचे थे नैमिषारण्य

एक वर्ष पहले
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श्रीमद्भागवत कथा भगवान के प्रति प्रीति बढ़ाती है। यह मोक्षदायिनी अलौकिक कथा हमें विकारों से मुक्ति का मार्ग दिखाती है। बगहा - 1 प्रखंड के मंझरिया गांव में आयोजित श्रीमद्भागवत कथा के पहले दिन कथा श्रवण के महत्व का प्रतिपादन करते हुए बनारस से पहुंचे विद्वान आचार्य पंडित पुरुषोत्तम कृष्ण शास्त्री ने यह बात कही। उन्होंने कहा कि इस कथा का श्रवण करने के लिए देवता भी अमृत कलश लेकर देवता पधारे थे। इस सनातन ग्रंथ में सत्य स्वरूप योगेश्वर श्रीकृष्ण का वर्णन है। इस कथा के श्रवण के लिए 88000 शौनकादि ऋषि गण ब्रह्मा जी के पास पहुंचे थे।

बताया- कथा श्रवण से मिली थी श्राप से मुक्ति

अमृत कलश लेकर सभी देवता वहां उपस्थित हुए। स्वर्ग से देवता अमृत कलश लेकर जिस कथा को श्रवण करने के लिए पहुंचे, वह कथा साधारण नहीं हो सकती। कथा श्रवण के बाद 7 दिन में परीक्षित को श्राप से मुक्ति हो गई।

मंचासीन आचार्य और कथा श्रवण करते भक्त।

नैमिषारण्य में गिरा था भगवान का चक्र

ऋषियों ने अपनी इच्छा प्रकट करते हुए पूछा कि कथा के लिए वह उत्तम स्थान बताएं, जहां किसी प्रकार की अशांति न हो। ब्रह्माजी इस प्रश्न के समाधान के लिए देवगण के साथ भगवान के पास पहुंचे। भगवान ने कहा कि हमारा चक्र जहां गिरे, वह स्थान इसके लिए उत्तम होगा। चक्र यूपी के नैमिषारण्य में गिरा। वहां भागवत कथा का श्रवण तक्षक द्वारा शापित परीक्षित को सुखदेव जी करा रहे थे।


गूंजते रहे श्री राधे कृष्ण के स्वर, मुग्ध हुए श्रद्धालु

कथा प्रसंगों के बीच श्री राधे - राधे, श्री राधाकृष्ण के स्वर गूंजते रहे। भजनों की प्रस्तुति के दौरान बनारस से ही पधारे आचार्य शास्त्री के सहयोगी नीरज पांडेय की संगति श्रद्धालुओं को मुग्ध करती रही। कथा की विधिवत शुरुआत से पहले मुन्नू तिवारी ने भक्ति संगीत की मनमोहक प्रस्तुति कर माहौल को गरिमामय बना डाला।

अतिथि ने किया गांव
के विद्वान का सम्मान


मंझरिया गांव निवासी रामेश्वर पांडेय के संयोजकत्व में हुए इस आयोजन के दौरान मंझरिया गांव के ही रहने वाले श्रीमद्भागवत कथा के जाने माने विद्वान डॉ. सुबोध मणि त्रिपाठी पहुंचे तो अतिथि कथा वाचक आचार्य ने वैदिक मंत्रोच्चार के साथ तिलक लगाकर उनका सम्मान किया। वे श्रद्धालुओं के बीच कथा का आनंद लेते रहे।
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