जिसकी आंख सिर्फ संपत्ति निहारे, वहीं है हिरण्याक्ष : आचार्य वरुण त्रिपाठी

Bettiah Bagha News - हिरण्य का अर्थ है स्वर्ण या संपत्ति। अक्ष मतलब आंख। जिसकी आंखें सिर्फ संपत्ति निहारें, वहीं हिरण्याक्ष है। ...

Feb 22, 2020, 06:25 AM IST
Bagha News - whose eyes are just assets hiranyaksha is there acharya varun tripathi

हिरण्य का अर्थ है स्वर्ण या संपत्ति। अक्ष मतलब आंख। जिसकी आंखें सिर्फ संपत्ति निहारें, वहीं हिरण्याक्ष है। बगहा-1 प्रखंड के जूड़ा गांव में आयोजित श्रीमद्भागवत कथा के तीसरे दिन हिरण्याक्ष व हिरण्यकशिपु के वध प्रसंग का विवेचन करते हुए कथा वाचक आचार्य वरुण त्रिपाठी ने यह बात कही। उन्होंने कहा कि आदि पुरुष यानी विराट पुरुष की नाभि से कमल प्रगट हुआ। उसी कमल पर ब्रह्मा प्रकट हुए। आज भी जीव जब पैदा होता है तो नाभि कमल लेकर पैदा होता है। ब्रह्मा ही स्वयं को दो भागों में विभक्त कर स्वयंभू मनु हुए। ये मनु व शतरूपा के नाम से जाने जाते हैं। ब्रह्मा के मानस पुत्र कश्यप हुए। कश्यप से देवता व दैत्य की उत्पत्ति हुई। कश्यप की प|ी दीती थीं, जिनसे हिरण्याक्ष व हिरण्यकशिपु हुए। भागवत जी में वर्णन है कि ये दोनों दैत्य रोज चार हाथ बढ़ते थे। आचार्य ने बताया कि ये दोनों लाभ व लोभ के प्रतीक हैं। हिरण्यकश्यप का अर्थ स्पष्ट करते हुए आचार्य ने कहा कि जो बाप दादा की संपत्ति को भोग विलास में खर्च करे, वह हिरण्यकश्यप है। जो नोट की गड्डियों पर सोता हो, अय्याशी करना ही अपने जीवन का लक्ष्य मानता हो, वह हिरण्यकशिपु है।

जूड़ा गांव में श्रीमद्भागवत कथा के दौरान कथा सुनते श्रद्धालु।

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