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25 साल पहले गहना पहनना छोड़ा, बच्चों के लिए चला रही स्कूल

2 वर्ष पहले
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गांधीवादी लेखिका और समाजसेवी सुजाता चौधरी गांधी साहित्य के अध्ययन के आधार पर जल्द ही महात्मा गांधी पर शहीद भगत सिंह को फांसी से बचाने के प्रयास नहीं करने और सरदार वल्लभ भाई पटेल की जगह पंडित नेहरू को प्रधानमंत्री बनाने के लगते रहे आरोपों का जवाब देती नजर आएंगी। राष्ट्रपिता गांधी के विचारों से प्रभावित कई किताब और उपन्यास लिख चुकी सुजाता चौधरी करीब सभी गांधी साहित्य का अध्ययन कर चुकी हैं। उनके विचारों को आधार में रखकर दलित समाज के बच्चों के लिए अलग-अलग जगहों पर स्कूल चला रहीं सुजाता चौधरी ने बताया कि बापू पर लगते रहे आरोपों सहित नेताजी सुभाषचंद्र बोस से गांधी के स्वतंत्रता आंदोलन की तुलना को लेकर पहले अौर अब भी सवाल उठाए जाते रहे हैं। इन मुद्दों पर उन्होंने किताब “सत्य पे भ्रमजाल’ लिखी है। इसमें उन्होंने अपनी ओर से इन सवालों के जवाब देने का प्रयास किया है। अब जल्द ही इस किताब पर फिल्म बनने वाली है। इसकी शूटिंग शुरू होने वाली है। हालांकि इस बारे में ज्यादा चर्चा नहीं करते हुए उन्होंने गांधी दर्शन के दूसरे पहलू को उभारते हुए कहा कि धार्मिक ग्रंथों में नारी-पुरुष की समानता की बातें तो की गई हैं, लेकिन व्यावहारिकता में यह समानता गांधीवाद में ही दिखता है। यही वजह है कि वह गांधीवाद से जुड़ी।

गांधी पर भगत सिंह को नहीं बचाने के जवाब में सुजाता ने लिखी सत्य पे भ्रमजाल किताब, इस पर फिल्म भी बनेगी
सुजाता चौधरी।

ससुराल से शुरू हुआ गांधीवाद का सफर
सुजाता चौधरी का ससुराल गांधी के विचारों से शुरू से प्रेरित रहा है। उनके ससुर के पिता और जिला बोर्ड के पहले चेयरमैन रामनारायण चौधरी असहयोग आंदोलन से जुड़े और जेल भी गए। उनके ससुर भी बापू के विचारों से प्रभावित थे। जब वह ब्याह कर ससुराल आई तो यहां उन्होंने पहली बार व्यवहार में नारी-पुरुष समानता की झलक पाई। जब भी उन्होंने इसके प्रति जिज्ञासा की तो यही बताया गया कि उनके ससुराल में गांधी जी के विचारों को केवल माना ही नहीं जाता है बल्कि जीया भी जाता है। यह पहला मौका था जब वह गांधी के विचारों से प्रभावित हुई। इसके बाद उन्होंने गांधी साहित्य पढ़ना शुरू किया।

गांधी साहित्य पढ़ने से दूर हुए कई भ्रम
सुजाता चौधरी ने बताया, पहले मन में धर्म ग्रंथों में समाज तथा महिलाओं के प्रति कही गई कई बातों को लेकर द्वंद्व था, जो गांधी साहित्य पढ़ने से दूर हुअा। बापू मानते थे कि महिलाएं आभूषण के प्रति ज्यादा मोह रखती हैं और अपने व्यक्तित्व से ज्यादा ध्यान गहनों पर देती हैं। इससे प्रभावित होकर 25 साल पहले अपने गहनों का त्याग कर दिया। वे गांधी के छुआछूत को गलत मानने और सबसे कमजोर की मदद करने के विचारों से भी प्रभावित हैं। यही कारण है कि उन्होंने रन्नूचक मकंदपुर में दलित बच्चों को पढ़ाने के लिए लक्ष्मी रामनारायण विद्या संस्थान की शुरुआत की और दो साल से समस्तीपुर के एक महादलित टोले में वहां के बच्चों के लिए स्कूल चला रही हैं।

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