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13 घंटे बेड पर तड़प कर महिला की मौत, पर बंद दरवाजे से नहीं निकले डॉक्टर

तीन दिन से घर के लाेग पति अाैर पिता के अाने का इंतजार कर रहे हैं। पति मुंबई में जाॅब करते हैं।

​कुमार अमर | Last Modified - Jan 28, 2018, 06:11 AM IST

  • 13 घंटे बेड पर तड़प कर महिला की मौत, पर बंद दरवाजे से नहीं निकले डॉक्टर
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    एक परिचित की गोद में नवजात बच्ची।

    सुपाैल (भागलपुर).जिले की चरमराई स्वास्थ्य व्यवस्था की एक अाैर तस्वीर सामने अायी है। यहां अपने मायके में रह रही बेबी कुमारी नाम की महिला को प्रसव पीड़ा के बाद अाशा की मदद से पीएचसी में एडममिट कराया गया। बेबी 13 घंटे पीएचसी में तड़पती रही। नर्स की निगरानी में इलाज हुआ। लेकिन इस दौरान डॉक्टर देखने तक के लिए नहीं अाए। परिजनों ने दरवाजा खटखटाया, लेकिन वे बंद कमरे से नहीं निकले। नतीजा यह हुअा कि सदर हॉस्पिटल जाने के दौरान रास्ते में बेबी की माैत हाे गयी।

    25 जनवरी को किया था एडमिट

    - बताया जा रहा है कि 25 जनवरी काे दिन के 11 बजे हॉस्पिटल में एडमिट कराने के बाद वहां माैजूद एएनएम माला कुमारी अाैर संगीता कुमारी ने बेबी का इलाज करना प्रारंभ किया।

    - बेबी कुमारी के भतीजे विकास कुमार ने बताया कि वो जाेर-जाेर से चिल्लाती रही। लेकिन नर्स बाेलती रही सब ठीक हाे जाएगा। 7:25 में बेबी ने एक बच्ची काे जन्म दिया। जिसके बाद महिला की हालत अाैर बिगड़ गई।

    पति के आने के बाद होगा अंतिम संस्कार
    घटना के बाद से मृतिका की मां व परिजनाें का राे-राेकर बुरा हाल है। तीन दिन से घर के लाेग पति अाैर पिता के अाने का इंतजार कर रहे हैं। पति मुंबई में जाॅब करते हैं। जबकि पिता भी घटना की जानकारी के बाद दिल्ली से निकल चुके हैं। परिजनाें ने बताया कि मृतिका का अंतिम संस्कार पिता अाैर पति के अाने के बाद हाेगा।

    2015 में बांका में हुई थी शादी
    मृतिका बेबी की शादी हिंदू रीति-रिवाज के साथ वर्ष 2015 में बांका जिले के शंभूगंज थाना के झफरा गांव के राजीव पाठक से हुर्इ थी। जाे वर्तमान में मुंबर्इ में किसी प्राइवेट कंपनी में जाॅब करते हैं। जानकारी मिलने पर उसके पति अाैर पिता मुंबई और दिल्ली से अपने घर के लिए रवाना हाे गए।

    बख्शीश के लिए बेटी को बेटा बता दिया
    एएनएम ने परिजनाें काे बताया कि बेटा हुअा है मुंह मीठा कराइए। भतीजा विकास ने इसके बाद मिठाई लाकर उनलाेगाें काे दी। 15 मिनट बाद बताया कि बेटी हुई है।

    एंबुलेंस में ऑक्सीजन था न टेक्नीशियन
    सुपौल अस्पताल से रेफर किए जाने के बाद जिस 102 एंबुलेंस से महिला को ले जाया गया, उसमें न ऑक्सीजन था और न टेक्नीशियन. विकास ने बताया कि मेरी बुअा की माैत सुपाैल जाने के क्रम में मानगंज के पास ही हाे गयी थी। एंबुलेंस पर माैजूद कर्मियाें से जब पूछा ताे हमलाेगाें काे बताया कि नहीं पेशेंट की हालत ठीक है।

    सांसद बाेले, महिला मरी नहीं मार दी गई
    बेबी की माैत की जानकारी मिलने पर जाप के संरक्षक सह मधेपुरा सांसद राजेश रंजन उर्फ पप्पू यादव मृतिका के मायके राजेश्वरी पहुंचकर परिजनाें काे ढाढ़स बंधाया। बताया कि बेबी की माैत नहीं हुर्इ है, बल्कि स्वास्थ्य कर्मियाें ने मार दिया है। इस संबंध में सीएस से बात हुर्इ है। घटना के लिए जिम्मेदार लाेगाें के विरूद्ध सख्त कार्रवाई हाे।

    डॉक्टर ने दो बार देखा था, गलत है आरोप

    पीएचसी के प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी समरेंद्र मोहन चौधरी ने बताया कि प्रसव कराने अायी महिला बेबी काे भर्ती के दाैरान चिकित्सक डाॅ. पवन कुमार दाे बार देखने अाए। मैंने रजिस्टर चेक किया है मरीज काे रेफर भी चिकित्सक ने ही किया है। ड्यूटी पर तैनात एएनएम ने भी बताया कि चिकित्सक अस्पताल में ही माैजूद थे। परिजनाें का अाराेप बेबुनियाद है।

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    बेबी की मौत के बाद परिजन।
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Web Title: Death Of Women Due To Negligence Of Doctors
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