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कमेंट करने पर चलाई थी गोली, हत्यारे भाजपा नेता मुन्ना को 7 साल की सजा

एपीपी ने बताया कि बबलू की हत्या 14 अप्रैल 2000 को रायफल से गोली मारकर कर दी थी।

Danik Bhaskar | Mar 13, 2018, 06:32 AM IST
सजा मिलने के बाद कोर्ट से निकलता भाजपा नेता मुन्ना सिंह। सजा मिलने के बाद कोर्ट से निकलता भाजपा नेता मुन्ना सिंह।

भागलपुर. पीरपैंती के बसंतपुर निवासी सूर्यनाथ सिंह के पोते हितेश कुमार उर्फ बबलू की हत्या के 17 साल पुराने मामले में एडिशनल सेशन जज ने दोषसिद्ध आशुतोष कुमार सिंह उर्फ मुन्ना सिंह को गैर इरादतन हत्या के मामले में सात साल की सजा सुनाई। अदालत ने मुन्ना सिंह पर 50 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया। जुर्माना राशि जमा नहीं करने पर 6 माह की अतिरिक्त सजा भी भुगतने को कहा गया।


अदालत ने 50 हजार की राशि मृतक के परिजनों को देने को कहा। अदालत ने मुन्ना को आर्म्स एक्ट में भी दोषी पाया अौर दो साल की सजा सुनाई। साथ ही 5 हजार रुपये का जुर्माना भी किया। जुर्माना रकम जमा नहीं होने पर 2 माह की अतिरिक्त सजा भुगतने को कहा गया। बता दें कि मुन्ना भाजपा के पीरपैंती प्रखंड के पूर्व अध्यक्ष रह चुके हैं। उन्हें 7 मार्च को अदालत ने हत्या की धारा को गैर इरादतन हत्या में बदलते हुए दोषी पाया था। मामले में सरकार की आेर से एपीपी जयकरण गुप्ता ने बहस में हिस्सा लिया।

14 अप्रैल 2000 को गोली मारकर की गई थी हत्या

एपीपी ने बताया कि बबलू की हत्या 14 अप्रैल 2000 को रायफल से गोली मारकर कर दी थी। रायफल से निकली गोली बबलू के दाहिने तरफ पेट में लगी थी। उसे पीरपैंती रेफरल अस्पताल लाया गया। जहां प्राथमिक इलाज के बाद मायागंज रेफर किया गया। लेकिन रास्ते में ही उसकी मौत हो गई थी। सूर्यकांत सिंह ने हत्या की वजह मुन्ना का मनबढ़पन बताया था। उसने पुलिस को बताया था कि रामरूप गौड़ ने मुन्ना से खेत जोतने को कहा था। जिस पर मुन्ना तैयार हो गया। सूर्यकांत ने बस इतना कहा था कि एक समय था कि रामरूप गौड़ उनके खेत में काम करते थे, आज समय आ गया कि हमलोग आपके यहां काम कर रहे हैं। बस यही बात मुन्ना को चुभ गई और उसने इसे सीधा कमेंट खुद पर पा लिया। बात बढ़ गई और गुस्से में मुन्ना ने घर में रखा रायफल निकाल लिया और सूर्यकांत को वंश खत्म करने की धमकी देकर शाम में बबलू को गोली मार दी। मामले में 13 लोगों की गवाही हुई। जिसमें चश्मदीद रामरूप होस्टाइल हो गया था। तमाम गवाहों और सबूतों के बाद अदालत का फैसला आने के बाद पीड़ित परिवारों ने कोर्ट के फैसले का स्वागत किया।