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अर्जित शाश्वत को हिरासत से छुड़ाने की कोशिश, पुलिस से उलझ गए समर्थक

केंद्रीय मंत्री चौबे ने कांग्रेस के नगर विधायक अजीत शर्मा के मोबाइल रिकॉर्ड के डिटेल्स की जांच कराने की बात कही है।

Bhaskar News | Last Modified - Apr 02, 2018, 05:24 AM IST

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    विक्रमशिला एप्रोच पथ पर गाड़ी के बोनेट पर चढ़कर अर्जित शाश्वत की गिरफ्तारी का विरोध करतीं भाजपा नेत्री श्वेता सिंह। मौके पर नारेबाजी करते समर्थक।

    भागलपुर.नाथनगर में हुए तनाव और उपद्रव के मामले में केंद्रीय मंत्री अश्विनी चौबे के गिरफ्तार पुत्र अर्जित शाश्वत चौबे को उनके समर्थकों ने पुलिस की गिरफ्त से छुड़ाने की कोशिश की। पटना से भागलपुर आने के क्रम में रविवार सुबह समर्थकों ने विक्रमशिला पुल के पास अर्जित और उनके साथ चल रहे पुलिस बलों की गाड़ी रोक ली और गेट खोल कर अर्जित को बाहर निकालने का प्रयास किया। जिस गाड़ी में अर्जित सवार थे, उसकी हवा निकाल दी।

    पुलिस की चौकसी के बाद भी भाजपा नेत्री श्वेता सिंह अर्जित की गाड़ी के बोनट पर चढ़ गईं। उन्होंने हंगामा मचाया और नारेबाजी की। दूसरी तरफ भाजपा नेत्री बिम्मी शर्मा गाड़ी के आगे लेट गईं। पुलिस ने सख्ती दिखाई तो समर्थक कोतवाली इंस्पेक्टर केएन सिंह व टीओपी प्रभारी सुनील कुमार से उलझ गए।


    समर्थक और पुलिस बलों में जमकर गुत्थमगुत्थी हुई। करीब 15 मिनट तक गिरफ्तार अर्जित चौबे को समर्थकों ने रोके रखा। जैसे-तैसे पुलिस ने अर्जित को निकाला और एसीजेएम के लालबाग स्थित आवास पर पेश किया। जज के आवास के बाहर भी बिम्मी शर्मा ने जमकर हंगामा किया। अर्जित को झूठे केस में फंसाने का आरोप लगाकर पुलिस के खिलाफ नारेबाजी की। उन्होंने धमकी दी कि अगर मामले की सही जांच नहीं हुई तो वे फिर अर्जित की गाड़ी के आगे सड़क पर सो जाएंगी। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा की महिला नेत्रियों के साथ पुरुष पुलिसकर्मियों ने मारपीट की, उन्हें धक्का दिया। इसमें बिम्मी के पैर में मोच भी आ गई। एक भी महिला सिपाही की पुल के पास तैनात नहीं थी। उन्होंने आरोप लगाया कि पुलिसवालों ने हमलोगों के साथ दुर्व्यवहार किया। भाजपा नेत्रियों का हंगामा देख जज आवास के बाहर महिला बलों को बुलाना पड़ा। इसके बाद किसी तरह मामला शांत हुआ और अर्जित को वहां से कैंप जेल ले जाया गया।

    पुलिस की सुरक्षा पर सवाल, खुफिया तंत्र फेल

    अर्जित का काफिला रोकने के लिए सुबह से ही भाजपा नेता और समर्थक विक्रमशिला पुल के पास जमा होने लगे थे। जैसे ही काफिला पुल पार कर एप्रोच रोड पर पहुंचा, समर्थक सड़क के बीचोबीच आ गए। बाध्य होकर पुलिस को गाड़ी रोकनी पड़ी। इसके बाद समर्थकों ने पुलिस बल और अर्जित की गाड़ी को चारों ओर से घेर लिया और हंगामा करने लगे। मुठ्ठी भर पुलिसवाले समर्थकों के आगे बेबस हो गए। गिरफ्तार अर्जित को रोकने की सुबह से तैयारी थी, लेकिन पुलिस को इसकी भनक तक नहीं लगी। पुलिस का खुफिया तंत्र भी फेल हो गया था। पुलिस की इस लापरवाही से अर्जित की सुरक्षा पर भी सवाल उठने लगा है।

    अर्जित के जेल जाने के बाद भी फेसबुक अकाउंट एक्टिव रहा

    अर्जित शाश्वत के जेल जाने के बाद भी उनका फेसबुक एकाउंट एक्टिव है। दोपहर एक बजे के करीब जेल जाने के आधे घंटे बाद ही उनके फेसबुक पर विभिन्न सोशल साइट्स पर चल रही खबर को टैग किया गया। इसी फेसबुक अकाउंट से अर्जित ने शनिवार रात 10.40 बजे महावीर मंदिर पटना जाने की बात कही थी। कहा था कि वहां वे पुलिस के सामने सरेंडर करेंगे। फेसबुक एकाउंट के एक्टिव रहने की खबर मिलने पर जब पुलिस हरकत में आयी तो पता चला कि उनका मोबाइल जेल से बाहर किसी कार्यकर्ता के पास है। दरअसल, पुलिस को शक था कि कहीं अर्जित जेल के अंदर मोबाइल ले जाने में कामयाब तो नहीं हो गए। लेकिन जांच में ही स्पष्ट हो गया कि मोबाइल उनका बाहर है। सोशल मीडिया में जब अर्जित के पोस्ट की पड़ताल शुरू हुई तो जेल जाने के बाद के पोस्ट डिलीट कर दिए गए।

    अर्जित जेल अस्पताल में भर्ती, कहा-किडनी में है प्रॉब्लम
    जेल जाने के कुछ घंटे के बाद रविवार शाम अर्जित को जेल अस्पताल में भर्ती कराया गया। उनके हेल्थ की स्क्रीनिंग हुई। अर्जित ने जेलर से कहा कि उनकी किडनी में प्रॉब्लम है। एम्स से इलाज भी चल रहा है। रोजाना कई किस्म की सूई और दवा लेनी पड़ती है। यह सुनते ही जेलर ने तुरंत जेल डॉक्टर को फोन कर बुलाया गया। अर्जित ने कहा कि मेरे पास एम्स का चिट्ठा है। इसकी जांच करवा लीजिए। इसके बाद मुझे जिस वार्ड में रखना है, शिफ्ट कर दीजिएगा। उधर, जेल प्रबंधन का कहना है कि अर्जित को आॅब्जर्वेशन वार्ड में फिलहाल रखा गया है। उनके हेल्थ की जांच हुई है। अगले 24 से 48 घंटे तक वे इसी वार्ड में रहेंगे। सोमवार को फिर उनकी जांच होगी। हालांकि अब तक अर्जित को किसी तरह की परेशानी नहीं है। फिर भी नए बंदियों को 24-48 घंटे आॅब्जर्वेशन के बाद ही अन्य कैदियों के साथ सामान्य वार्ड में शिफ्ट कराया जाता है। सामान्य वार्ड की तुलना आॅब्जर्वेशन वार्ड थोड़ा साफ-सुथरा और सुविधायुक्त है। रात में अर्जित ने जेल का खाना रोटी-सब्जी खाया और जल्द ही सोने के लिए चले गए।

    चौबे पांच बार विधायक रहे, कभी ऐसी अशांति नहीं रही, कांग्रेस ने पैदा किया तनाव : भाजपा
    दंगे के बाद पहली बार चौबे विधायक बने, उन्हें पता है तनाव से किसे होता है फायदा : कांग्रेस

    नाथनगर मामले में अर्जित शाश्वत पर हुई एफआईआर से उनकी गिरफ्तारी व जेल जाने के बीच 15 दिनों में स्थानीय स्तर पर भी जोर-शोर से सियासत हो रही है। भाजपा ने कांग्रेस पर तनाव फैलाने का आरोप लगाया। भाजपा कह रही है जिस तरह शांति भंग हो रही है, वैसा 30 साल में नहीं हुआ। अश्विनी चौबे पांच पर यहां विधायक रहे, अशांति नहीं रही। कांग्रेस ने यह माहौल बनाया है। दूसरी ओर केंद्रीय मंत्री चौबे ने कांग्रेस के नगर विधायक अजीत शर्मा के मोबाइल रिकॉर्ड के डिटेल्स की जांच कराने की बात कही है। इस पर विधायक अजीत शर्मा ने केंद्रीय मंत्री चौबे पर हमला बोला। उन्होंने कहा, 1989 दंगे के बाद ही चौबे पहली बार विधायक बने। उन्हें ज्यादा पता है कि ऐसे तनाव से किसे लाभ मिलता है।

    कांग्रेस पर भाजपा के आरोप
    भाजपा कार्यकर्ता और केंद्रीय मंत्री अश्विनी चौबे के नजदीकी रामनाथ पासवान ने रविवार शाम सोशल मीडिया व मोबाइल पर मैसेज भेज कर नाथनगर उपद्रव के लिए कांग्रेस को जिम्मेदार ठहराया। उन्होंने कहा, भागलपुर में जिस तरह शांति भंग हो रही है, 30 साल में ऐसा नहीं हुआ। चौबे पांच बार विधायक रहे। कभी ऐसी अशांति नहीं रही। जब से कांग्रेस यहां आई, अशांति का माहौल बन रहा है। कांग्रेस और उनके गुर्गों ने अशांति फैलाई। दोषारोपण भाजपा पर कर रही है। राजनीतिक फायदे के लिए कांग्रेस ने यह सब किया।

    विदेश में बेटे को पढ़ाने का यही हुअा फायदा समाज को बांटने का काम किया: प्रवीण सिंह
    अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी सदस्य व बिहार के पूर्व उपाध्यक्ष प्रवीण सिंह कुशवाहा ने पलटवार किया। उन्होंने कहा, बदनाम हुए तो क्या हुआ.. नाम नहीं होगा? अर्जित चौबे ने जो गलती की, सो की। उनके पिता केंद्रीय मंत्री अश्विनी चौबे को भी बेटे पर गर्व हो रहा है कि वह विदेश से पढ़ कर आया है। विदेश में पढ़ाने का यही फायदा है जो उनके बेटे ने समाज को बांटने का काम किया।

    केंद्र व राज्य में सरकार भाजपा की है, हमारे दबाव पर अर्जित की गिरफ्तारी प्रशासन कैसे कर सकता है : अजीत शर्मा
    विधायक अजीत शर्मा ने कहा, जुलूस निकालना सबका अधिकार है। जुलूस में जैसी भाषा का प्रयोग हुआ, वह गलत है। केंद्र व राज्य में सरकार भाजपा की है। ऐसे में हमारे दबाव पर अर्जित की गिरफ्तारी प्रशासन कैसे कर सकता है? प्रशासन तो सरकार के दबाव में काम करता है। अर्जित की बात अलग है, लेकिन उनके पिता अश्विनी चौबे 1989 में दंगे के बाद पहली बार विधायक बने। इसलिए उन्हें पता है कि ऐसी घटना से किसे लाभ होता है। 2015 में अर्जित चुनाव हारे। इससे पहले भाजपा लोकसभा चुनाव हार गई। अब 2019 व 2020 में चुनाव है। इसे लेकर सब किया जा रहा है। उस दिन के फुटेज की जांच प्रशासन कर रहा है।

    भाजपा जिलाध्यक्ष रोहित पांडेय ने बताया कि यह राजनीति नहीं है। भाजपा समाज तोड़ कर राजनीति करने में विश्वास नहीं करती। कई दलों के लोग ऐसा करते हैं, जिन्होंने इस घटना से तनाव बढ़ाने की कोशिश की। प्रशासन ने सरकार को सही फीडबैक नहीं दिया। इसलिए समाज में विरोध हो रहा है। लेकिन दूध का दूध और पानी का पानी हर हाल में होगा, हमें उम्मीद है।

    अजीत शर्मा के मोबाइल रिकॉर्ड की कराएंगे जांच : अश्विनी चौबे

    केंद्रीय स्वास्थ्य राज्य मंत्री अश्विनी चौबे ने बेटे अर्जित की गिरफ्तारी व जेल भेजने के बाद विधायक अजीत शर्मा पर हमला बोला। उन्होंने कहा, उनके मोबाइल पर बातचीत के कॉल रिकॉर्ड की जांच कराएंगे। नाथनगर के पूरे मामले की भी जांच होगी। मामले में नाथनगर पुलिस की भूमिका संदिग्ध है। 1989 का दंगा भी कांग्रेस के गुंडों ने करवाया था। इस बार भी तनाव बढ़ाने वाले कांग्रेस व राजद के ही कुछ गुंडे थे। मैं लगातार पांच बार भागलपुर का विधायक रहा। कभी ऐसी नौबत नहीं आई, लेकिन जबसे स्थानीय विधायक यहां आए हैं, ऐसी घटनाएं लगातार हो रही हैं। हमारे परिवार के रग-रग में देशभक्ति और सौहार्द बनाए रखने का जज्बा है। 1942 में हुए दंगे में भी मेरे चाचा ने पांच मुस्लिम परिवार के सदस्यों को अपने घर में शरण देकर उनकी जान बचाई थी। मैंने भी 1989 के दंगे में कई लोगों की जान बचाई थी। ऐसे में मेरे बेटे पर तनाव बढ़ाने का आरोप निराधार है। इसकी हम उच्च स्तरीय जांच करवाने की सरकार से मांग करेंगे।

    राजनीति न करें तेजस्वी : संजय

    प्रदेश जदयू के मुख्य प्रवक्ता संजय सिंह ने कहा- हकीकत यही है कि पटना पुलिस ने अर्जित को महावीर मंदिर के पास से गिरफ्तार किया और थाने ले गई। कोई भी आरोपी आत्मसमर्पण करने के लिए कोर्ट या पुलिस के सामने जाता है, मंदिर में नहीं। ऐसे में तेजस्वी यादव को राजनीति नहीं करनी चाहिए। कल तक एफआईआर और गिरफ्तारी नहीं होने पर सवाल उठा रहे थे। बीती रात जब पुलिस ने आरोपी को गिरफ्तारी कर ली तो उस पर भी हाय तौबा मचा रहे हैं। सच सबको मालूम है कि पुलिस ने गिरफ्तारी कब और कहां से की। हकमार यादव जान लें कि नीतीश सरकार का सुशासन कायम है। अपराधी चाहे कितना भी रसूख वाला हो, नीतीश शासन में उसका बचना नामुमकिन है। कानून चेहरा देखकर काम नहीं करता। हमारी सरकार न किसी को फंसाती है और न बचाती है।

    कानून से बड़ा कोई नहीं : नीरज
    जदयू प्रवक्ता नीरज कुमार ने कहा कि कानून तोड़ने वाले आरोपी की गिरफ्तारी के बाद विपक्षियों को सांप सूंघ गया, जो लोगों की भावना भड़काकर राज्य को अशांत करने की साजिश रच रहे थे। भागलपुर के नाथनगर में सांप्रदायिक सद्‌भाव बिगाड़ने के आरोपी की अग्रिम जमानत के मामले में सहायक लोक अभियोजक ने भी अदालत को बताया कि उसने सांप्रदायिक तनाव फैलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। ऐसे नारे लगाने की जरूरत क्या थी, जिससे किसी की भावना को ठेस पहुंचे। पुलिस के पास वीडियो साक्ष्य भी हैं। उन्होंने कहा कि कानून का पालन शासन के इकबाल से होता है और इस मामले को लेकर एनडीए भी एक है। विपक्ष को इसका एहसास हो गया होगा कि केवल भाषणबाजी से शासन का इकबाल नहीं होता?

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    भागलपुर में एसीजेएम अमित रंजन उपाध्याय के आवास पर पेशी के लिए अपने वकील के साथ पहुंचे अर्जित शाश्वत।
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