मिलीभगत छिपाने को ड्रग डिपार्टमेंट जानकारी देने से करता रहा अानाकानी

Bhagalpur News - दवा दुकानों में मरीजों से लूट में ड्रग डिपार्टमेंट की मिलीभगत का मामला नया नहीं है। यह काफी पुराना है। मरीजों की...

Bhaskar News Network

Jun 16, 2019, 06:40 AM IST
Bhagalpur News - anakani keeps on giving drug department information to hide collusion
दवा दुकानों में मरीजों से लूट में ड्रग डिपार्टमेंट की मिलीभगत का मामला नया नहीं है। यह काफी पुराना है। मरीजों की जेबें ढीली कर रहे दुकानों पर ड्रग डिपार्टमेंट किस तरह से अपनी कृपा बरसाता रहा है, इसका खुलासा सूचना के अधिकार के तहत मांगी गई एक जानकारी के आवेदन के बाद भी हुआ। आरटीआई एक्टिविस्ट अजीत कुमार सिंह ने डिपार्टमेंट से सूचना मांगी तो अफसरों ने अपनी मिलीभगत छिपाने के लिए पहले तो सूचना न देने के लिए कई बहाने बनाए। उन्होंने आरटीआई नियमों को ताक पर रखकर एक्टिविस्ट से ही उसके चरित्र का शपथ पत्र मांग लिया। हालांकि प्रधान सचिव और कमिश्नर के पास लगी गुहार के बाद ड्रग डिपार्टमेंट ने जानकारी दी। लेकिन इसमें भी अहम जानकारी छिपा ली।

विभाग व दवा दुकानों की साठगांठ का मामला नया नहीं, सूचना के अधिकार के तहत एक्टिविस्ट अजीत सिंह ने मांगी थी कई जानकारी

ये मांगी थी जानकारी

27 अप्रैल 2018 को आरटीआई एक्टिविस्ट अजीत कुमार सिंह ने ड्रग डिपार्टमेंट से जानकारी मांगी। उन्होंने जिले में रजिस्टर्ड दवा दुकानों व एजेंसियों की संख्या पूछी। दुकानों की निगरानी और रूटीन जांच की व्यवस्थाओं व संसाधनों का ब्योरा मांगा। इसके साथ ही ड्रग इंस्पेक्टरों के स्वीकृत व कार्यरत पद पूछे। इसके अलावा 2012 से अब तक कितनी दुकानों व एजेंसियों की नियमित जांच हुई और नहीं हुई, इसके ब्योरे के साथ अनियमितता में पकड़े गए दुकानों पर कार्रवाई की जानकारी मांगी।

अजीत कुमार सिंह

सूचना मांगने पर ऐसे छिपाई डिपार्टमेंट ने जानकारी

जानकारी छिपाने का पहला कदम

30 दिनों में जवाब देने की बजाय 25 दिनों तक ड्रग डिपार्टमेंट पहले सोया रहा। 26वें दिन जागा और 23 मई 2018 को उन्होंने एक्टिविस्ट अजीत कुमार सिंह को पत्र भेजा। इसमें कहा, सूचना देने से पहले आप शपथ पत्र दें कि आप स्वच्छ नागरिक हैं और किसी प्रकार का आपराधिक मामला आप पर नहीं है।

बताया कानून, फिर भी डिपार्टमेंट बेअसर

9 जून को एक्टिविस्ट सिंह ने फिर से विभाग को पत्र लिखा। इसमें बताया कि सूचना के अधिकार के तहत ऐसा शपथ पत्र मांगना गलत है। अधिनियम सभी नागरिकों को सूचना लेने का अधिकार देता है। उन्होंने उमा देवी बनाम कर्नाटक राज्य में सुप्रीम कोर्ट के आदेश का हवाला भी दिया। इसमें एक्टिविस्ट सिंह ने कहा, कि आप सूचना छिपाने की मानसिकता रखते हैं। 15 दिनों में जानकारी दें। इस पत्र के बाद भी ड्रग डिपार्टमेंट पूरी तरह बेअसर रहा। उन्होंने जवाब देने की जहमत नहीं उठाई।

पीएस-कमिश्नर को शिकायत

जानकारी छिपाने वाले ड्रग डिपार्टमेंट की शिकायत एक्टिविस्ट ने स्वास्थ्य विभाग के पीएस (प्रधान सचिव) और कमिश्नर से की।

विभाग ने नहीं दी पूरी जानकारी

इस शिकायत के बाद ड्रग डिपार्टमेंट हरकत में आया और 8 अगस्त को जानकारी दी। उन्होंने कहा, छह ड्रग इंस्पेक्टर के पद स्वीकृत हैं। इनमें एक पद खाली है। पांच ड्रग इंस्पेक्टर काम कर रहे हैं। उन्होंने कुल दवा और एजेंसियों की संख्या 1650 बताई। लेकिन यह जानकरी छिपा ली कि कितनी दुकानों को अनियमितता में पकड़ा गया। उस पर क्या कार्रवाई हुई। दुकानों के स्थान तक बदले गए, विभाग को अनाधिकृत तौर पर इसकी जानकारी है, लेकिन इसका रिकॉर्ड विभाग ने जानकारी में नहीं दिया।

डिपार्टमेंट इसलिए छिपा रहा था जानकारी

ड्रग डिपार्टमेंट की कृपा से ही पूरे जिले में दुकानदार मरीजों से लूट का खेल खेल रहे हैं। दुकानदारों की निगरानी के नाम पर ड्रग इंस्पेक्टर निरीक्षण प्रतिवेदन तो जमा करते हैं, लेकिन मरीजों को बेची जा रही दवाइयों की पूरी जानकारी नहीं लिखते। दवा दुकानदार मुनाफाखोरी के लिए मरीजों को जबरन पूरा पत्ता खरीदने के लिए विवश कर रहे हैं। उनकी जेब पर बोझ बढ़ा रहे हैँ। गैर-जरूरी दवा की वापसी भी नहीं हो रही। इसे ड्रग डिपार्टमेंट मौन सहमति दे रहा है।

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