जिस शिलालेख के अाधार पर निगम ने जीता केस, उसे ही नहीं कर रहा है संरक्षित
नाथनगर में कचरे से खाद बनाने के पिट निर्माण में शिलालेख काे ताेड़ा
तिलकामांझी भागलपुर विश्वविद्यालय व साहेबगंज के बीच स्थित 100 साल पुराने श्मशान घाट के जिस शिलालेख के अाधार पर नगर निगम ने उसकी जमीन का केस जीता, वही शिलालेख निगम की उपेक्षा का शिकार हाे रहा है। करीब 10 बीघे में फैले श्मशान घाट परिसर में निगम कचरे से खाद बनाने के लिए पिट बना रहा है। स्थानीय लाेगाें ने बताया कि पिट के निर्माण के दाैरान घाट के िशलालेख की दीवार काे ताेड़ दिया गया। इस शिलालेख पर शमशान घाट के कायदे-कानून लिखे हैं। यह निगम के लिए भी महत्वपूर्ण दस्तावेज हैं। अधिवक्ता सुधीर शर्मा ने बताया िक एक व्यक्ति ने घाट की जमीन पर अपना हक जताते हुए केस किया गया था, लेकिन इन्हीं शिलालेख के आधार पर निगम ने केस जीता था। निगम काे इसे संरक्षित करने की जरूरत है। 1918 में स्वर्गीय पद्मावती देवी की याद में श्मशान घाट का निर्माण हुअा था। पद्मावती देवी के पाेते अनुराग कुमार सलारपुरिया ने बताया िक उनकी दादी की याद में श्मशान घाट का निर्माण कराया गया था। उसे निगम काे निगरानी के लिए दिया गया था, लेकिन निगम उस जगह का उपयाेग खाद बनाने के लिए कर रहा है। वह इसके खिलाफ काेर्ट जाएंगे। उपनगर अायुक्त सत्येन्द्र वर्मा ने बताया कि पिट निर्माण के दाैरान िकसी प्रकार के शिलालेख काे ताेड़ा नहीं गया है। यदि एेसा हुअा है ताे इसकी जांच कराएंगे अाैर शिलालेख काे संरक्षित करेंगे।
प्राचीन शमशान घाट के टूटे हुए शिलालेख।