फर्जीवाड़ा / फर्जी आरोपी बन कोर्ट से लिया था बेल, ड्राइविंग लाइसेंस में लगे फोटो से पकड़ाया



फर्जी अभियुक्त बन जमानत लेने वाले पप्पू दास को गिरफ्तार कर ले जाती पुलिस। फर्जी अभियुक्त बन जमानत लेने वाले पप्पू दास को गिरफ्तार कर ले जाती पुलिस।
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फर्जी अभियुक्त बन जमानत लेने वाले पप्पू दास को गिरफ्तार कर ले जाती पुलिस।फर्जी अभियुक्त बन जमानत लेने वाले पप्पू दास को गिरफ्तार कर ले जाती पुलिस।

  • पैसे लेकर फर्जी अभियुक्त और जमानतदार बन कर कोर्ट से बेल लेने और दिलवाने वाले गिरोह का हुआ खुलासा
  • वकील विजय सिंह, फर्जी आरोपी पप्पू दास समेत अन्य पर केस दर्ज

Dainik Bhaskar

Sep 13, 2019, 11:06 AM IST

भागलपुर. पैसे लेकर फर्जी अभियुक्त और जमानतदार बन कर कोर्ट से बेल लेने वाले और दिलवाने वाले एक गिरोह का भागलपुर पुलिस ने खुलासा किया है। इस मामले में पुलिस ने एक वकील के मुंशी पप्पू दास को गिरफ्तार किया है, जो सबौर का रहने वाला है। पप्पू सड़क हादसे के एक केस में पैसे लेकर फर्जी अभियुक्त बना था और कोर्ट से जमानत ले ली थी। 

 

मामला 2014 का है, जिसमें ट्रैक्टर के धक्के से कहलगांव इलाके में एक आईएएस के पिता की मौत हो गई थी। पप्पू दास ट्रैक्टर का ड्राइवर इकबाल अहमद (बरहपुरा) बनकर कोर्ट के समक्ष हाजिर हुआ था, जिसके बाद उसे बेल मिल गया था। पप्पू ने ड्राइवर इकबाल अहमद के नाम से जारी ड्राइविंग लाइसेंस भी कोर्ट के समक्ष प्रस्तुत किया था। लाइसेंस में नाम और पता तो इकबाल अहमद का था, लेकिन फोटो पप्पू दास का लगा था। इसी फोटो की जांच के बाद फर्जीवाड़े का खुलासा हुआ तो पांच साल बाद पप्पू दास को गिरफ्तार किया गया। 

 

पूछताछ में उसने स्वीकार किया है कि पैसे लेकर वह कई केसों में फर्जी बेलर और अभियुक्त बना है। इस फर्जीवाड़े में पप्पू के अलावा भागलपुर कोर्ट के वकील विजय कुमार सिंह की भी संलिप्तता का खुलासा हुआ है। पुलिस उक्त दोनों समेत अन्य के खिलाफ तिलकामांझी थाने में जालसाजी की रिपोर्ट दर्ज की है। एसएसपी आशीष भारती के मुताबिक, पूरे फर्जीवाड़े में डीटीओ ऑफिस और कोर्ट के कर्मियों की भूमिका संदिग्ध है, जिसकी जांच की जा रही है।

 

ये है मामला
कहलगांव में घटना के बाद अज्ञात ट्रैक्टर ड्राइवर के खिलाफ केस दर्ज कराया गया था। पुलिस ट्रैक्टर के नंबर के आधार पर उसके मालिक गोराडीह निवासी कन्हैया के पास पहुंची। ट्रैक्टर मालिक ने बताया कि हादसे के समय उसका ट्रैक्टर बरहपुरा निवासी इकबाल अहमद चला रहा था। पुलिस ने इकबाल अहमद को आरोपी बनाया। इसके बाद ही पप्पू दास इकबाल अहमद बनकर कोर्ट में हाजिर हो गया, जहां उसे बेल भी मिल गया। पप्पू ने इकबाल अहमद के नाम से जारी ड्राइविंग लाइसेंस की छायाप्रति भी कोर्ट के समक्ष प्रस्तुत की।

 

ट्रायल में आरोपी के हाजिर नहीं होने पर मामले का हुआ भंडाफोड़
केस के ट्रायल में कोर्ट ने आरोपी को हाजिर होने को कहा। लेकिन वह हाजिर नहीं हुआ तो उसके खिलाफ कुर्की वारंट जारी हो गया। इशाकचक पुलिस ने ड्राइवर की तलाश शुरू की। डीटीओ ऑफिस से कोर्ट में प्रस्तुत डीएल नंबर के आधार पर पता लगाया तो लाइसेंस इकबाल अहमद के नाम से नहीं था। जाने आलम वारसी के नाम उक्त लाइसेंस जारी हुआ था, जो बनिया टोला, बरारी का रहने वाला है। तब पुलिस ने इकबाल अहमद के जमानतदार राज कुमार यादव (उर्दू बाजार,

तातारपुर) और प्रकाश हरिजन (डहरपुर, गोराडीह) को खोज निकाला और उससे पूछताछ की।

 

खोए डीएल को फर्जी तरीके से बनाया इकबाल अहमद का लाइसेंस
पुलिस ने असली लाइसेंसधारी जाने आलम वारसी से पूछताछ की तो पता चला कि उसका ड्राइविंग लाइसेंस चार साल पहले खो गया था। वारसी ने डीएल पर लगे फोटो की पहचान पप्पू दास के रूप में की। उसने बताया कि पप्पू दास वकील सईद मकबूल के यहां मुंशी का काम करता है। जाने आलम भी कोर्ट में मुंशी का काम करते हैं, इस कारण वह पप्पू दास को पहचानता है। पुलिस कोर्ट कैंपस पहुंची और पप्पू दास को गिरफ्तार कर लिया।

 

वकील विजय सिंह के कहने पर पप्पू बना फर्जी अभियुक्त
पप्पू ने बताया कि वकील विजय कुमार सिंह के कहने पर फोटो देकर फर्जी डीएल बनवाया था और उनके ही कहने पर कहलगांव के एक सड़क दुर्घटना वाले केस में फर्जी अभियुक्त बन कर जमानत ली थी। दोनों जमानतदारों ने भी उसकी पहचान की। जमानतदारों के मुताबिक, वकील विजय कुमार सिंह के कहने पर ये लोग इकबाल अहमद का जमानतदार बने थे। पुलिस की जांच में आया कि वकील विजय कुमार सिंह और पप्पू दास की मिलीभगत से कोर्ट को गुमराह किया गया।

 

पांच हजार में फर्जी अभियुक्त और तीन सौ में फर्जी बेलर बनता था
पप्पू दास ने पुलिस को बताया कि वकील विजय सिंह के कहने पर सात-आठ केसों में फर्जी बेलर बना है। एक केस में बेलर बनने पर 300 रुपए मिलते थे। बरारी थाने में हत्या से संबंधित एक केस में भी फर्जी बेलर बना था, जिसके बाद आरोपियों को कोर्ट से बेल मिला था। फर्जी अभियुक्त बनने पर पांच हजार रुपए मिलते थे। पुलिस अब उन सारे केसों की जांच भी जांच कर रही है, जिसमें पप्पू दास फर्जी अभियुक्त और बेलर बना है।

 

जिला जज और पुलिस मुख्यालय को देंगे जानकारी : एसएसपी
एसएसपी आशीष भारती ने बताया कि एक संगठित गिरोह की तरह पूरा फर्जीवाड़ा चल रहा था। जिला जज और पुलिस मुख्यालय को पूरे मामले की जानकारी देंगे, ताकि अन्य संदिग्ध कर्मियों पर भी कार्रवाई हो सके।

 

आरोपी की बारीकी से आईओ ने जांच नहीं की, अब होगी कार्रवाई
एसएसपी आशीष भारती ने बताया कि ट्रैक्टर दुर्घटना के मामले में कहलगांव थाने में दर्ज प्राथमिकी के आरोपी की जांच आईओ सुग्रीव सिंह ने बारीकी से नहीं की। अभियुक्त चालक के नाम, पता का सत्यापन नहीं किया और केस में अंतिम प्रतिवेदन कोर्ट में समर्पित कर दिया। इशाकचक पुलिस ने भी डीएल का सत्यापन कराए बिना यह रिपोर्ट दे दिया कि संबधित आरोपी उनके थाना क्षेत्र का नहीं है। अगर केस की बारीकी से जांच होती तो इस फर्जीवाड़े का खुलासा शुरुआत में ही हो जाता। इस कारण आईओ द्वारा बरती गई लापरवाही को लेकर उनपर अनुशासनिक कार्रवाई की जाएगी।

 

एएसपी की जांच रिपोर्ट से मामले में कई तथ्यों का हुआ खुलासा
इस मामले की जांच एसएसपी ने एएसपी विनीत से कराई। उन्होंने जांच में पाया कि न्यायिक प्रक्रिया को बाधित करने में दलाल पेशेवर जमानतदार, अधिवक्ता, कोर्ट के कनीय कर्मी, वकीलों के मुंशी और अभियुक्तों की मिलीभगत से पूरा खेल चल रहा है। कोर्ट कैंपस में एक बड़ा नेटवर्क चल रहा है, जो फर्जी जमानतदार, अभियुक्त को जाली परिचय-पत्र देकर पुलिस व न्यायालय को गुमराह कर रहे हैं। इस कारण सही अभियुक्तों का पता नहीं लग पाता है। एएसपी की जांच रिपोर्ट के बाद एसएसपी ने मामले में केस दर्ज करने का आदेश दिया है।

 

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