दर्द से कराहती-रातभर उल्टी करती रही प्रसूता, 9 घंटे बाद लेबर रूम में ले गईं नर्सें...काफी कोशिश के बावजूद सिर्फ एक पैर आ पाया बाहर, इसके बाद नर्सों ने कहा- अब इसे फला हॉस्पिटल लेकर जाओ

बिहार न्यूज: पीड़िता बची पर नवजात की चली गई जान, अस्पताल में नहीं थे डॉक्टर, नर्सों ने की थी जांच

Bhaskar News

Mar 16, 2019, 05:57 PM IST
Bhagalpur Bihar News in Hindi: Newborn baby death in hospital due to negligence of nurses

भागलपुर (बिहार)। सदर अस्पताल में डॉक्टरों की बड़ी लापरवाही शुक्रवार को सामने आई। 9 घंटे तक एक गर्भवती प्रसव पीड़ा से तड़पती रही, लेकिन डॉक्टरों ने उसे नहीं देखा। सुबह 7 बजे डिलिवरी की कोशिश नर्सों ने की। नवजात का एक पैर और नाभी कॉड बाहर भी आया, लेकिन प्रसव नहीं हो सका। तीन महिला और 7 पुरुष डॉक्टराें की तैनाती वाले अस्पताल में नर्सों ने किसी डॉक्टर को नहीं बुलाया गया। नर्सों ने भी मानवता तार-तार कर दी। आधी डिलिवरी में ही उसे नर्सों ने प्रसूता काे लेबर रूम से बाहर निकाल दिया। आशा उसे निजी क्लीनिक ले गई। वहां डॉक्टर ने महज 10 मिनट में ही महिला की नॉर्मल डिलिवरी करवाई। जैसे-तैसे महिला की जान तो बचाई, लेकिन नवजात को अपनी जान देकर डॉक्टराें की लापरवाही की कीमत चुकानी पड़ी। परिजनों ने कमीशनखोरी का आरोप लगाया और अस्पताल प्रभारी से शिकायत कर कार्रवाई की मांग की।

गुरुवार रात अस्पताल में नहीं थे डॉक्टर, नर्सों ने की थी जांच


तातारपुर थाना क्षेत्र के अजय रजक की पत्नी निशा को गुरुवार रात 10 बजे प्रसव पीड़ा पर सदर अस्पताल में भर्ती करवाया गया। यहां डॉक्टर ही नहीं थे। उस समय डॉक्टर मनोज कुमार की ड्यूटी थी। नर्सों ने जांच की और कहा- सुबह नॉर्मल डिलिवरी होगी। निशा पूरी रात दर्द से कराहती रही। उल्टी करती रही, लेकिन नर्सों ने डॉक्टर को नहीं बुलाया। वह सब कुछ ठीक होने की बात कहकर मामला टालती रहीं। शुक्रवार सुबह निशा को लेबर रूम में ले जाया गया। प्रसव करवाने की कोशिश भी की, लेकिन उसकी हालत देख नर्सों की घबराहट बढ़ गई। उसे लेबर रूम से बाहर निकाल दिया। मौके पर मौजूद आशा प्रतिमा व नर्सों ने मिल कर बड़ी पोस्ट ऑफिस के पास डॉ. रोली भारती के निजी क्लीनिक में निशा को भर्ती करवाया।

हेल्थ मैनेजर भी नहीं थे


परिजनों का कहना कि सदर अस्पताल में गुरुवार रात से शुक्रवार सुबह तक कोई डॉक्टर नहीं था। इससे उसके मरीज का इलाज नहीं हुआ, बच्चे की भी जान चली गई। नर्से निजी क्लीनिक में भेजकर कमीशन चाहती थीं। इसलिए डॉक्टर को नहीं बुलाया। जब सब हाथ से निकल गया तो निजी क्लीनिक में भेजा। परिजनों का कहना है कि शिकायत करने के लिए हेल्थ मैनेजर भी नहीं थे। किसी का मोबाइल नंबर भी कर्मचारियों ने नहीं दिया।

समय से सर्जरी होती तो बच जाती जान : डॉ. रोली


मरीज की जान बचाने वाली डॉ. रोली भारती ने बताया कि मेरे यहां जब महिला आई तब हालत बेहद गंभीर थी। गर्भ में ही बच्चे की मौत हो चुकी थी। समय पर सर्जरी होती तो बच्चे की जान बच जाती।

शिकायत हुई तो मांगा जवाब


मैं छुट्टी से लौटा तो जानकारी मिली है। जांच करेंगे। सीएस डॉ. एके ओझा ने 24 घंटे में अस्पताल प्रभारी से शोकॉज का जवाब मांगा है। जांच के लिए डॉ. विनय कृष्ण सिंह से कहा है। यह बड़ी लापरवाही है। हेल्थ मैनेजर से लेकर संबंधित सभी डॉक्टर जिम्मेदार हैं। कार्रवाई होगी।

- डॉ. एके मंडल, प्रभारी, सदर अस्पताल

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