राजनीति / हवाई सेवा व भोलानाथ पुल फ्लाईओवर के मुद्दे गायब, जातीय गणित और केमेस्ट्री हावी



Bhagalpur political news Air Services and Bholanath Bridge Flyover Issues Vanishing
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Bhagalpur political news Air Services and Bholanath Bridge Flyover Issues Vanishing

  • सब अपने-अपने हिसाब से जातीय समीकरण तैयार करने में जुटे हैं
  • दलों ने भी जाति फैक्टर के आधार पर उम्मीदवार को टिकट दिया

Dainik Bhaskar

Mar 25, 2019, 10:39 AM IST

भागलपुर.  भागलपुर लोकसभा सीट पर दूसरे चरण में 18 अप्रैल को चुनाव होगा। लेकिन इस बार चुनावी फिजा में जाति का शोर ज्यादा है। हवाई सेवा और भोलानाथ पुल फ्लाईओवर जैसे मुद्दे गायब हैं और जातीय समीकरण चुनाव हावी हो गया है। विकास के मुद्दे अब तक चुनावी सीन से गायब हैं। उम्मीदवार व समर्थक जाति के गणित और केमेस्ट्री को लेकर कागजी घोड़े दौड़ा रहे हैं। 

 

गठबंधन भी जातीय समीकरण के मद्देनजर किया गया है। सब अपने-अपने हिसाब से जातीय समीकरण तैयार करने में जुटे हैं। किन-किन जातियों के वोट किस उम्मीदवार को मिलेंगे, इसका जोड़-घटाव करने में दोनों गठबंधन के नेता व कार्यकर्ता माथापच्ची करने में लगे हैं। इस बार दलों ने भी जाति फैक्टर के आधार पर ही उम्मीदवार को टिकट दिया है। अब दोनों गठबंधन के नेता व समर्थक जाति के आधार पर वोट का गणित सुलझाने में जुटे हैं। दोनों के दावे हैं कि जाति की गोलबंदी उनके समर्थन में ज्यादा है। 

 

जदयू के अजय मंडल और राजद के बुलो मंडल एक ही जाति गंगोता समाज से 
महागठबंधन में कांग्रेस, राजद, हम, रालोसपा व वीआईपी शामिल हैं। राजद का वोट बैंक मुख्य रूप से यादव और मुस्लिम जाति पर आधारित है। बुलो के समर्थकों का मानना है कि गंगोता का अच्छा-खासा वोट उन्हें मिलेगा। जीतनराम मांझी के कारण महादलित, उपेंद्र कुशवाहा के कारण कुशवाहा समाज के वोटों को वे अपने पक्ष में जोड़ रहे हैं। वीआईपी पार्टी प्रमुख मुकेश सहनी मल्लाह जाति से आते हैं। ऐसी स्थिति में उन पार्टी के महागठबंधन में शामिल होने से उस जाति का भी वोट मिलेगा। 

 

एनडीए ने किया पिछड़े मुस्लिमों के वोट पर दावा
एनडीए की ओर से जदयू ने अजय मंडल व राजद से बुलो मंडल को मैदान में उतारा है। दोनों गंगोता समाज से आते हैं। पिछले लोकसभा चुनाव में गंगोता जाति का अधिकतर वोट बुलो मंडल को मिला था। इसलिए इस बार जदयू ने उस वोट बैंक में सेंध लगाने के लिए अजय मंडल को टिकट दिया है। जदयू के रणनीतिकार मानते हैं कि भाजपा के वोटरों के अलावा पासवान जाति का एक से डेढ़ लाख वोट जदयू के उम्मीदवार को मिलेगा। कोइरी-कुर्मी व धानुक का वोटों पर भी उनका दावा है। मुस्लिम में पिछड़े वर्ग के लोगों का वोट को वह अपना मानकर चल रहा है। 

 

पांच साल में केवल बाइपास का हो पाया है काम
पिछले लोकसभा चुनाव में मुख्य रूप से शहर के विकास को लेकर तीन मुख्य मुद्दे छाए हुए थे। इनमें घरेलू हवाई सेवा, स्थाई बाइपास और फूड प्रोसेसिंग प्लांट शामिल थे। पांच साल बीत गए। इनमें से हवाई सेवा और फूड प्रोसेसिंग प्लांट पर एक कदम भी काम आगे नहीं बढ़ सका। हालांकि बाइपास पर काम हुआ है। केवल 155 मीटर जमीन का पेच फंसा है। इसके अलावा भोलानाथ अंडरपास के पास फ्लाईओवर का भी मुद्दा था। लेकिन इस बार अब तक एक भी उम्मीदवार ने इन मुद्दों पर कोई चर्चा नहीं की है।

 

ऐसे समझिए जाति का गणित

  • यादव- 2.5 से 3.5 लाख
  • मुस्लिम - 4.22 लाख
  • गंगोता- 1.50-2.50 लाख
  • अगड़ी व बनिया- 5.50 लाख
  • कोइरी-कुर्मी- 1.5 लाख
  • धानुक- 1.5 लाख
  • पासवान - 1.25 लाख
  • दलित व महादलित- 2.25
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