भागलपुर की पहली महिला वकील स्टेला जुडा नहीं रहीं, दीवानी व फौजदारी मुकदमे 52 साल तक लड़ीं
जिले की पहली महिला अधिवक्ता स्टेला जुडा का शनिवार रात 8 बजे पोस्टऑफिस के सामने स्थित आवास में निधन हो गया। वे 75 वर्ष की थीं। स्टेला ने दो जुलाई 1968 को वकालत पेशा की शुरुआत की थीं। वे सिविल के साथ-साथ क्रिमिनल की जानी-मानी वकील थीं। एजीपी, एससी-एसटी की स्पेशल पीपी थीं। वे एनटीपीसी कहलगांव की पैनल लॉयर भी थीं। स्टेला ने टीएनबी लॉ कॉलेज से एलएलबी कर युगल किशोर प्रसाद की जूनियर के रूप में कैरियर की शुरुआत की थीं। स्टेला के पति पॉल गुड़िया ने बताया कि कुछ साल पहले कमर की हड्डी का ऑपरेशन कराया था। उसके बाद से ही वह अस्वस्थ रहने लगी थीं। मधुमेह के चलते रिकवर नहीं कर पाईं और शनिवार रात चल बसीं। स्टेला निसंतान थीं। बड़ी बहन की बेटी संध्या गोम्स को गाेद लिया था। संध्या लखनऊ में रहती हैं। मौत की खबर पाकर रविवार दोपहर भागलपुर पहुंची।
अभिनेता अशोक कुमार के आदमपुर स्थित ननिहाल की जमीन को लेकर हुए विवाद का केस करीब 30 साल तक लड़ीं और जीत हासिल कीं। कई चर्चित सिविल केस में जीत हासिल करने वाली स्टेला के निधन की खबर पाकर डीबीए के महासचिव संजय कुमार मोदी, आेम प्रकाश तिवारी समेत कई अधिवक्ताओं ने उनके घर पहुंचकर शोक-संतप्त परिवार को ढांढस बंधाया। इससे पहले फादर जॉन कोचुचिरा, फादर एनएम थॉमस के अलावा कई मिशनरी स्कूलों की सिस्टर आकर प्रे किया। आठ मई 1945 को भागलपुर में ही जन्मी स्टेला को परबत्ती स्थित कैथोलिक कब्रिस्तान में देर शाम दफन किया गया।
स्टेला जुडा।