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बिहुला विषहरी की गाथा और मंजूषा का शोध इंग्लिश में होगा प्रकाशित, अब अंग क्षेत्र की संस्कृति को जानेगी पूरी दुनिया

Bhagalpur News - अंग जनपद की लोक गाथा बिहुला विषहरी व मंजूषा कला पर विशेष शोध करने के लिए रविवार को पटना यूनिवर्सिटी के दो प्रोफेसर...

Bhaskar News Network

Aug 19, 2019, 06:50 AM IST
Bhagalpur News - bihula vishwari39s saga and manjusha39s research will be published in english now the whole world will know the culture of the organ area
अंग जनपद की लोक गाथा बिहुला विषहरी व मंजूषा कला पर विशेष शोध करने के लिए रविवार को पटना यूनिवर्सिटी के दो प्रोफेसर भागलपुर पहुंचे। सांस्कृतिक पक्ष के साथ इसके भौगोलिक व ऐतिहासिक पक्षों को उजागर करने की मंशा के साथ चल रहे इस शोध को उन्होंने खास माना। दोनों प्रोफेसरों ने चम्पानगर के मनसा मंदिर समेत अलग-अलग क्षेत्रों में भी जाकर जानकारियां जुटाईं। उन्होंने बिहुला विषहरी व मंजूषा कला से जुड़े जानकारों से भी बातें कीं। दोनों प्रोफेसरों ने यह भी कहा कि इस संस्कृति को दुनियाभर में स्थान मिलेगा। इसका शोध अब इंग्लिश में भी प्रकाशित की जाएगी।

रमन सिन्हा

बिहार और बंगाल में प्रचलित गाथा का तुलनात्मक अध्ययन किया जाना जरूरी

पटना यूनिवर्सिटी के कॉमर्स कॉलेज के डॉ. नकी अहमद जौन व साइंस कॉलेज के डॉ. शोभन चक्रवर्ती ने अपने शोध के लिए जनसंपर्क विभाग के उप-निदेशक रहे शिवशंकर सिंह पारिजात से मुलाकात की। दोनों ही प्रोफेसरों ने कहा, यह शोध अंग की आस्था और लोक गाथा के सांस्कृतिक पक्षों के साथ भौगोलिक व ऐतिहासिक पक्षों को उजागर किया जाएगा। इसके बाद रिटायर्ड उप-निदेशक पारिजात ने एनएल डे, उमेशचंद्र द्विवेदी, आरसी मजूमदार समेत उपेंद्र महारथी संस्थान के कई संदर्भ दिए। उन्होंने दोनों प्रोफेसरों से यह भी कहा कि बिहुला के गंगा मार्ग से स्वर्ग लोक जाने की प्रमाणिकता पर शोध करने की दरकार है। इतना ही नहीं, बिहार और बंगाल में प्रचलित गाथा का तुलनात्मक अध्ययन भी होने चाहिए। इसके बाद दोनों प्रोफेसरों के साथ सभी ने चम्पानगर के मनसा मंदिर व अन्य क्षेत्रों का दौरा किया।

शोध के लिए भागलपुर पहुंचे डॉ. नकी अहमद और डॉ. शोभन चक्रवर्ती।

विदेशों में भी पहुंचे अंग संस्कृति

दोनों प्रोफेसरों ने कहा, अब तक यह अंग की लोक गाथा है। लेकिन अब समय आ गया है कि आस्था के साथ दुनिया को भी यह बताया जाए कि अंग की धरती पर किस तरह की संस्कृति और लोकगाथाएं हैं। इसलिए यह पूरा शोध इंग्लिश में भी प्रकाशित किया जाएगा। इससे बिहुला विषहरी के साथ मंजूषा कला को वैश्विक पहचान मिलेगी।

(लेखक एसएम कॉलेज में इतिहास के प्रोफेसर हैं। उन्हाेंने यह खास खबर भास्कर के लिए िलखी है)

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