इंजीनियरिंग काॅलेज में शुरू होगी एमटेक की पढ़ाई

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Bhaskar News Network

Jan 25, 2019, 02:36 AM IST
Bhagalpur News - college of engineering
साइंस एंड टेक्नोलॉजी विभाग के विशेष सचिव ने कॉलेज को भेजा पत्र

एजुकेशन रिपोर्टर | भागलपुर

भागलपुर कॉलेज आॅफ इंजीनियरिंग समेत सूबे के पांच इंजीनियरिंग कॉलेजों में इस वर्ष से एमटेक की पढ़ाई शुरू हो जाएगी। इलेक्ट्रॉनिक्स विभाग में दो विषयों-माइक्रो इलेक्ट्रॉनिक्स और वीएलएस आई टेक्नोलॉजी में इसकी पढ़ाई होगी। दोनों विषयों में 30-30 सीटों पर दाखिला होगा। साइंस एंड टेक्नोलॉजी विभाग के विशेष सचिव ने बुधवार को इंजीनियरिंग कॉलेज के प्राचार्य को यह निर्देश जारी किया। इसमें बताया गया है कि भागलपुर कॉलेज आॅफ इंजीनियरिंग के साथ ही गया कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग में सिविल के अंतर्गत स्ट्रक्चरल इंजीनियरिंग, नालंदा कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग में इलेक्ट्रिकल एंड इलेक्ट्रॉनिक्स के अंतर्गत पावर सिस्टम, मोतिहारी कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग में कंप्यूटर साइंस एंड इंजीनियरिंग, एलएनजेपरआईटी छपरा में मैकेनिकल इंजीनियरिंग के अंतर्गत थर्मल इंजीनियरिंग स्ट्रीम में भी एमटेक की पढ़ाई शुरू की जाएगी। कॉलेजों को निर्देश दिया है कि वे जल्द से जल्द एआईसीटीई को आवेदन भेजकर सारी प्रक्रियाएं पूरी कर लें। इसके बाद सत्र 2019-20 से स्टूडेंट्स का दाखिला लेना शुरू करें। इस सभी विषयों में 30-30 सीटों पर पढ़ाई शुरू होगी।

एनबीए से लेना होगा एक्रीडिटेशन

इन कॉलेजों में पढ़ाई शुरू कराने के लिए अखिल भारतीय तकनीकी शिक्षा परिषद से शैक्षणिक सत्र 2019-20 में मान्यता प्राप्त किए जाने के लिए आवश्यक कार्रवाई करनी होगी। एनबीए से मान्यता भी लेना होगा। भागलपुर कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग ने तीन विभागों का मूल्यांकन कराने के लिए एनबीए को आवेदन भेजा है। इसके लिए सेल्फ असेस्मेंट रिपोर्ट भी तैयार की है। तीन विभागों में इलेक्ट्रॉनिक्स, मेकेनिकल और इलेक्ट्रिकल शामिल हैं।

स्पेशल प्रोजेक्ट के तहत सरकार की ओर से कॉलेज को मिले हैं दस करोड़ रुपए

कॉलेज को स्पेशल प्रोजेक्ट के तहत सरकार की ओर से दस करोड़ रुपए मिले थे। इससे एमटेक की पढ़ाई शुरू कराने के लिए सारे संसाधन शुरू मुहैया कराने थे। इससे कॉलेज में संसाधन बढ़ाए गए। सेल्फ असेसमेंट रिपोर्ट एक्सेप्ट होने के बाद ही कॉलेज में एक्रेडेशन के लिए प्रोसेस आगे बढ़ेगा।

शैक्षणिक व्यवस्था के लिए एक बार में छह साल के लिए मिलता है एक्रीडिटेशन

एनबीए यानी नेशनल बोर्ड ऑफ एक्रीडिटेशन के जरिए इंजीनियरिंग कॉलेजों में यूजी और पीजी लेवल पर शैक्षणिक व्यवस्था को गुणवत्तापूर्ण बनाया जाता है। एक बार कॉलेज को एनबीए एक्रेडिटेशन मिल जाता है तो छह साल तक इसकी मान्यता रहेगी। इसके बाद दुबारा एक्रीडिटेशन कराना होगा।

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