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नालियाें की सफाई को निगम ने खरीदीं डेढ़ करोड़ की तीन मशीनें, न ड्राइवर, न मजदूर, हो रही कबाड़

एक वर्ष पहले
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नगर निगम में चल रही अफसरशाही में डेढ़ करोड़ की मशीन धूल खा रही है। तीन साल पहले शहर की नालियों की बेहतर सफाई के लिए निगम ने 45 लाख प्रति गाड़ी की दर से तीन ड्रेनेज क्लीनिंग गाड़ियां खरीदी, लेकिन इन मशीनों से नालियां साफ नहीं हुई। इतना ही नहीं, जिम्मेदारों ने इसी खरीद से लेकर इसे जमीन पर उतारने तक में बड़ी लापरवाही की। पहले अधूरे पार्ट्स के साथ मशीन खरीदी। खरीदारी के दो साल बाद निगम हरकत में आया और बचे पार्ट्स मंगवाए, लेकिन इन गाड़ियों को चलाने के लिए ड्राइवर की तैनाती ही नहीं की।

इतना ही नहीं, इन मशीनों पर काम करने के लिए मजदूर तक नहीं लगाए। नतीजा, निगम परिसर में खड़ी गाड़ियां कबाड़ हो रही हैं और सभी संसाधनों के रहने के बावजूद निगम सुप्रीम कोर्ट के आदेशों को धत्ता बता रहा है। जिम्मेदार मजदूरों की जान जोखिम में डालकर हाथों से नालियों की सफाई करवा रहे हैं। दरअसल, पूर्व नगर आयुक्त अवनीश कुमार सिंह के कार्यकाल में नालियों की सफाई के लिए 45-45 लाख से तीन मशीनें खरीदी। 2017 में खरीदी ये मशीनें निगम परिसर में शोभा बनी रही।

2019 में नगर आयुक्त श्यामबिहारी मीणा ने मशीनों का मुआयना किया तो पता चला, कई पार्ट्स सप्लाई एजेंसी ने रोक दिए। एजेंसी का पैसा निगम ने रोका था, इसलिए एजेंसी ने पूरे पैसे नहीं दिए। नगर आयुक्त मीणा ने एजेंसी को रिमाइंडर भेजा और बचे पार्ट्स मंगवाए। पार्ट्स आए और दो माह पहले इन गाड़ियों का ट्रायल हुआ।

बेपटरी कर दी व्यवस्था : पहले अफसर ने गाड़ियां खरीदी और तबादले के बाद चले गए। दूसरे अफसर अाए तो अधूरे पार्ट्स देख ठेका एजेंसी का बकाया रोका। एजेंसी ने 2019 में बाकी पार्ट्स दिए तो ट्रायल हुआ। इसके बावजूद अफसरों ने ड्रेनेज क्लीनिंग की इन गाड़ियों से सफाई नहीं करवाई। अब तक गाड़ियांें पर ड्राइवर व मजदूराें की तैनाती नहीं हुई।

बरसात से तीन माह पहले ही नालाें की उड़ाही करानी हाेगी, यह ध्यान में है। नगर अायुक्त की इजाजत के बाद ड्रेनेज क्लीनिंग गाड़ियाें से उड़ाही कराएंगे। - सत्येंद्र प्रसाद वर्मा, पीअारअाे, निगम

स्वास्थ्य शाखा का अजीबोगरीब जवाब

स्वास्थ्य शाखा प्रभारी माे. रेहान ने बताया, बंद नालाें की सफाई ही ड्रेनेज क्लीनिंग गाड़ियाें से हाे तीन कारणों से इस मशीन का इस्तेमाल नहीं हो रहा है। जाम में गाड़ी नहीं निकल पाती। इसमें जमा गाद को फेंकने के लिए जगह नहीं है। डंपिंग ग्राउंड तक अभी रास्ता नहीं है। खुली नाले में पाइप डालते ही ईंट-पत्थर व लकड़ियां अटक जाती हैं।

निगम परिसर में कराेड़ांे की गाड़ियां पड़ी-पड़ी हो रही हैं खराब।

ट्रायल किया फिर परिसर में सड़ने को छोड़ा

मशीनों के ट्रायल होने के बाद भी निगम ने इन मशीनों से काम नहीं लिया। जिम्मेदारों ने इसे निगम परिसर में वापस खड़ी करवा दी। नतीजा, परिसर में खड़ी गाड़ियों के टायर खराब हो रहे हैं। मशीनें जवाब दे रही हैं। इसके बावजूद जिम्मेदार हरकत में नहीं आ रहे।

नालियों में जमा है गाद : उक्त मशीनों से सफाई न होने से नालियों में गाद जमा है। दक्षिणी क्षेत्र में सबसे ज्यादा गाद जमा है। यहां दिखावे के लिए सफाई हो रही है। नियमित सफाई न होने से दो-तीन फीट तक गाद जमा है। इससे घरों से निकलने वाला पानी नालियों में ओवरफ्लो होकर सड़क पर बह रहा है।

इशाकचक में उफन रही नाली, नहीं हो रही सफाई।

सुप्रीम कोर्ट की गाइडलाइन है कि मशीन से होनी है सफाई, फिर भी निगम मजदूरों की जान डाल रहा जोखिम में, खुले हाथों से सफाई करने को विवश हैं कर्मचारी
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