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  • Whatever the body may be, with the money of Rs 1100, they put the dam in the Ganga sacks and put it in the Ganges.

नमामि गंगे की अंत्येष्टि / शव किसी का भी हो, 1100 रुपए लेकर ईंट भरी बोरियों में बांध गंगा में डाल देते हैं शव के सौदागर

शव को गंगा में डालते लोग। शव को गंगा में डालते लोग।
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शव को गंगा में डालते लोग।शव को गंगा में डालते लोग।

  • भागलपुर के बरारी घाट पर भास्कर स्टिंग अंतिम संस्कार पर अधिक खर्च न कर पाने वाले गरीबों से यूं होती है सौदेबाजी...
  •  रोजाना औसतन पांच लाशों को गंगा में इसी तरह से फेंका जा रहा है

Dainik Bhaskar

Dec 03, 2019, 10:24 AM IST

भागलपुर (त्रिपुरारि). ये अमानवीयता की हद है। बरारी श्मशान घाट पर खुलेआम शव के सौदागरों की जेबें गर्म हो रही हैं। मजबूरी की ये ऐसी सौदेबाजी है जिसे सुनकर आपके रोंगटे खड़े हो जाएंगे। अंतिम संस्कार पर दो से पांच हजार रुपए खर्च ना कर पाने वाले लोगों से यहां लूट हो रही है। कम कीमत पर अंतिम संस्कार कराने के नाम पर यहां पूरा गिरोह सक्रिय है। वे लाशों को सीधे गंगा में बहा रहे हैं। न कोई जांच और न पड़ताल। 

नाविक और घाटों पर अंतिम संस्कार करवाने वाले राजा की मिलीभगत से ये सब चल रहा है। गिरोह में छोटे-छोटे बच्चे भी हैं। इससे यहां गंगा मैली हो रही है, नमामि गंगे योजना दम तोड़ रही है। रोजाना औसतन पांच लाशों को गंगा में इसी तरह से फेंका जा रहा है। प्रति लाश 1100 रुपए की दर से 5500 रुपए की वसूली हो रही है। अगर साल का हिसाब लगाएं तो यह रकम 20 लाख से ज्यादा की होती है। नगर निगम भी इसे गलत तो मानता है पर रोकने की कोई योजना नहीं।

... और जानिये परिजनों से कैसे होती है अंतिम यात्रा की खरीद
जगदीशपुर तगेपुर गांव के रीतेश पंडित की 10 वर्षीय भतीजी रूबी की मौत बिजली के खंभे लगाने के दौरान सिर पर गिरने से हुई। परिजन अंतिम संस्कार के लिए श्मशान घाट पहुंचे। एक नाविक व दाह संस्कार करवाने वाले ने परिजनों से कहा कि 1100 रुपए में हो जाएगा। गरीबी से जूझ रहे परिजनों ने उनकी बात मान ली। इसके बाद मृत रूबी के शव को प्लास्टिक में पैक किया। शव के साथ ईंट से भरी बोरी बांधी और नाव से पुल घाट व श्मशान के बीच गंगा में बहा दिया।

डीएफओ बोले-यह हमारा नहीं, निगम का काम
गंगा में डॉल्फिन अभ्यारण्य क्षेत्र बनाया गया है। इसमें मृत पशुओं व इंसानी शवों को बहाए जाने पर हम रोकथाम नहीं कर सकते। यह काम नगर निगम का है। उन्हें कार्रवाई करनी चाहिए। - एस. सुधाकर, डीएफओ

निगम का जवाब-कार्रवाई कैसे करें, कानून ही नहीं
 निगम के किसी भी एक्ट में गंगा में प्रदूषण फैलाने पर कार्रवाई का प्रावधान नहीं है। लाशों का प्रॉपर डिस्पोजल करना और सुविधाएं देना ही हमारा काम है। -सत्येंद्र प्रसाद वर्मा, पीआरओ, नगर निगम

हकीकत: निगम-जिला प्रशासन को कार्रवाई का अधिकार
नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) ने गंगा के 500 मीटर के दायरे में किसी भी तरह के कचरा फेंकने पर रोक लगाई है। ऐसा करने पर 50 हजार तक का जुर्माना तय है। अधजले शव व मृत पशुओं, मल-मूत्र, गंदे पानी व शहर भर के कचरे को बहाए जाने पर भी कार्रवाई तय है। इस पर जिला प्रशासन और नगर निगम दोनों ही कार्रवाई कर सकता है।

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