विवि के लिए गले की फांस बना वेतन बंद करने और सेवा रोकने का निर्णय

Bhagalpur News - एजुकेशन रिपाेर्टर | भागलपुर टीएमबीयू प्रशासन अपने ही फैसले पर घिरता नजर अा रहा है। विवि ने टीएनबी काॅलेज के 11...

Nov 11, 2019, 06:46 AM IST
एजुकेशन रिपाेर्टर | भागलपुर

टीएमबीयू प्रशासन अपने ही फैसले पर घिरता नजर अा रहा है। विवि ने टीएनबी काॅलेज के 11 कर्मियाें का वेतन अगस्त माह से बंद कर दिया है, जो 32 साल से अपनी सेवा दे रहे हैं। इन कर्मियाें काे न ताे टर्मिनेट किया जा रहा है और न ही इनके मामले में काेई विचार ही किया जा रहा है। अब ये कर्मी खुद ही मांग कर रहे हैं कि या ताे विवि उन्हें टर्मिनेट करे या वेतन पर से राेक हटाए।

इस मांग के साथ साेमवार काे दिन के 11 बजे ये कर्मी रजिस्ट्रार अाॅफिस जाएंगे अाैर अपनी मांग रखेंगे। इन 11 कर्मियाें में शामिल पूर्व एसअाे अमरेंद्र झा ने कहा कि विवि ने तथ्य छिपाकर सरकार काे गलत जानकारी दी है। इस वजह से ही सरकार का निर्देश अाया अाैर हमारा वेतन बंद कर दिया गया। अगस्त माह में काम करने के बावजूद हमें वेतन नहीं दिया गया है। सरकार ने कहा कि इन कर्मियाें कि मामले में 90 दिनाें के अंदर कार्रवाई कीजिए। अादेश के बाद भी पांच वर्ष तक जिन पदाधिकारियाें के अंदर में इन्हें वेतन भुगतान किया गया है, उनसे ही रिकरवरी करने कहा गया है। मगर इस मामले में 66 दिन हाे जाने के बाद भी कार्रवाई नहीं हुई है। अब कर्मचारी खुद काे टर्नमिनेट करने या वेतन देने की मांग कर रहे हैं।

टीएनबी में 32 साल से सेवा दे रहे 11 कर्मी अाज रजिस्ट्रार अाॅफिस जाकर खुद काे टर्मिनेट करने या वेतन देने की करेंगे मांग, अगस्त से वेतन पर लगा दी गई है राेक

हाईकाेर्ट में विचाराधीन है कर्मचारियों का मामला

टीएनबी में 32 साल से सेवा दे रहे, इन 11 कर्मियों का मामला हाईकोर्ट में विचाराधीन है। अमरेंद्र झा का दावा है कि इस मामले में बीते 5 साल में किसी कुलपति व कुलसचिव ने इसपर फैसला नहीं दिया। इसकी वजह पूर्व में पारित आदेश है कि प्रतिवादी राज्य सरकार व विश्वविद्यालय मामले की सुनवाई करे, याचिकाकर्ता प्रभावित न हों। सरकार के विशेष सचिव की सुनवाई को कर्मियाें ने पुनः हाईकोर्ट में 2014 में चुनौती दी थी। मगर विवि ने इस मामले में सरकार काे जानकारी में ये नहीं बताया कि मामला 2014 से काेर्ट में है। कर्मियाें का अाराेप है कि उसी मामले पर बगैर कुलपति का आदेश प्राप्त किए ही कुलसचिव व टीएनबी के प्राचार्य ने अगस्त से ही इनके वेतन व कार्य करने पर रोक लगा दी है।

जानें क्या है पूरा मामला : कर्मियाें ने बताया कि उनका मामला सामंजन का था। इसकी तिथि 2007 में सेटल हाे गई थी। 2009 में काेर्ट ने कहा कि विवि ने भ्रमक तथ्य दिया है अाैर हमारा सामंजन दोबारा 2009 में शिफ्ट किया गया। इस मामले 2013 में हमने याचिका दयार की, ताे सरकार ने कहा हम सुनवाई करना चाहते हैं। काेर्ट ने कहा कि अाप सुनवाई करें, मगर याचिका कर्ता प्रभावित न हाें। इस बीच विशेष सचिव में हमारी काे अवैध करार दिया, ताे 2014 में हाईकाेर्ट में केस किया। 2014 में पांच वीसी पांच कुलसचिव रहे, मगर काेई कार्रवाई नहीं हुई। वर्तमान कुलसचिव ने एक कर्मचारी रिटायर हुए, ताे सरकार से पूछा कि क्या करना है। सरकार ने कहा कार्रवाई करें। इस पर रजिस्ट्रार ने टीएनबी काॅलेज के प्राचार्य ने कहा कि कार्रवाई करें। प्रचार्य ने कार्रवाई की। हमने 31 अगस्त तक काम किया। 4 सितंबर काे पत्र निकालकर हमारे वेतन पर राेक लगा दी गई। हमारी सेवा समाप्त नहीं हुई है।

यह भी जानें : टीएनबी कॉलेज के 11 कर्मचारी 32 वर्ष से अधिक समय से काम कर रहे हैं। बिना स्पष्टीकरण पूदे कैसे टर्मिनेट कैसे किया सकता है। 2023 तक ये कर्मी सेवानिवृत हाे जाएंगे। इसमें से तीन कर्मी रिटायर हाे चुके हैं। कुलसचिव ने बिना कुलपति के अनुमाेदन के की की कार्रवाई कर दी।

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