भागलपुर / बाढ़ में बहे एनएच-80 पर इंजीनियर ने बनाया बहाना तो प्रभारी सचिव ने लगाई फटकार



नाथनगर के चर्च मैदान शिविर में बाढ़ राहत कैंप का निरीक्षण करते प्रधान सचिव। नाथनगर के चर्च मैदान शिविर में बाढ़ राहत कैंप का निरीक्षण करते प्रधान सचिव।
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नाथनगर के चर्च मैदान शिविर में बाढ़ राहत कैंप का निरीक्षण करते प्रधान सचिव।नाथनगर के चर्च मैदान शिविर में बाढ़ राहत कैंप का निरीक्षण करते प्रधान सचिव।

  • मुख्यमंत्री के प्रधान सचिव सह जिले के प्रभारी सचिव चंचल कुमार ने बहानेवाली को पकड़ लिया

Dainik Bhaskar

Oct 10, 2019, 09:54 AM IST

भागलपुर. सबौर के घोषपुर के पास बाढ़ में बह गए एनएच को दुरुस्त करने के नाम पर एक बार फिर एनएच के एग्जीक्यूटिव इंजीनियर ने नया बहाना खोज लिया है। लेकिन मुख्यमंत्री के प्रधान सचिव सह जिले के प्रभारी सचिव चंचल कुमार ने उनके इस बहानेवाली को पकड़ लिया और उन्हें कड़ी फटकार लगाई। उसे तुरंत दुरुस्त करने का निर्देश दिया। 

 

जिले के प्रभारी सचिव ने बाढ़ से राहत व बचाव के लिए तीन दिनों तक भागलपुर में कैंप किया। इस दौरान उन्होंने सड़क से लेकर राहत शिविरों व बांधों की स्थिति को जाकर देखा। पदाधिकारियों के साथ समीक्षा बैठक की। इस दौरान अफसरों को आवश्यक निर्देश जारी किए। एक दिन पहले मंगलवार को समीक्षा बैठक के दौरान उन्होंने जब एनएच के एग्जीक्यूटिव इंजीनियर राजकुमार से सबौर में कट गए एनएच की मरम्मत को लेकर निर्देश दिया तो एग्जीक्यूटिव इंजीनियर ने नया बहाना बनाया। 

 

उन्होंने कहा कि अब यह एनएच बिहार स्टेट रोड डेवलपमेंट कॉरपोरेशन लिमिटेड को हैंडओवर कर दिया गया है। इस पर प्रभारी सचिव ने कहा कि कॉर्पोरेशन केवल सड़क की देखभाल करेगा, लेकिन उसका स्वामित्व एनएच का ही होगा। अगर इसको लेकर कोई भ्रम है तो इसे दूर कर लें। बाढ़ के दौरान सबौर के पास बहे-कटे एनएच को जल्द दुरुस्त करवाएं। इसके साथ ही पथ निर्माण विभाग और ग्रामीण कार्य विभाग के एग्जीक्यूटिव इंजीनियर को भी निर्देश दिया गया कि जहां सड़क को क्षति हुई है, उसके लिए विभाग से राशि मांगकर उसकी जल्द मरम्मत करवाएं।

 

प्रभावित किसानों की सूची तीन दिनों के अंदर तैयार करें
प्रभारी सचिव चंचल कुमार ने निर्देश दिया कि बाढ़ में क्षतिग्रस्त घर, मकान, पशु, फसल का सर्वे शुरू कर दें और सप्ताहभर के अंदर उसकी रिपोर्ट सरकार को भेज दें। फसल क्षति का आकलन करने के लिए जिला कृषि पदाधिकारी को निर्देश दिया गया कि तीन दिनों में किसानों की सूची तैयार कर लें। इसके बाद रिपोर्ट मुख्यालय भेजें, ताकि राशि की मांग कर प्रभावित किसानों को मुआवजे का भुगतान किया जा सके। पशु चारा की कमी को लेकर जिला पशुपालन पदाधिकारी को भी फटकार लगाई गई। उनसे कहा गया कि पशुओं को चारा की दिक्कत न हो, अगर पैसे की कमी है तो इसके लिए विभाग से मांगे, वहां से राशि मिलेगी।

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