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अंतिम समय में भी दुनिया की खबर जानने को इच्छुक रहे मुकुटधारी, बेटे से मांगा अखबार, कहा- हेडलाइन ही पढ़ लूंगा

2 वर्ष पहले
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समाजसेवी व उद्योगपति मुकुटधारी अग्रवाल का खबरों से अंतिम क्षणों तक बना रहा। पेशे से पत्रकार रहे अग्रवाल गुरुवार से अस्पताल में भर्ती थे। शुक्रवार शाम अपने निधन से पहले तक वे देश-दुनिया में हो रही घटना-दुघर्टनाओं को जानने को इच्छुक थे। उन्होंने अपने बेटे आलोक अग्रवाल से अखबार मांगा। आलोक ने जब यह कहा कि अभी आपकी तबियत ठीक नहीं है, कैसे पढ़ेंगे? इस पर अग्रवाल ने कहा, चश्मा दो, मोटा-मोटा हेडलाइन ही पढ़ लेंगे। फिर उन्होंने अखबारों की हेडलाइन पढ़ी। दोपहर में अस्पताल में मिलने आए कुछ लोगों को उन्होंने खूब डांटा भी। कहा, इतनी धूप है, अभी क्या जरूरत थी आने की? शाम में आ जाते? लोगों के मिलने और देश-दुनिया की जानकारी पढ़ने के बाद शाम 6 बजे अचानक उनके पेट में दर्द बढ़ा और शाम 6.15 बजे उनका निधन हो गया। उनके निधन की खबर फैलते ही पूरा शहर शोक में डूब गया। युवा, बुजुर्ग, सामाजिक संगठनों से जुड़े लोगों के साथ चेंबर, सीए समेत सभी राजनीतिक दलों के लोग उनके दर्शन को उनके घर पहुंचे। जिसने भी पहली बार उनके निधन की खबर सुनी, उन्हें अपनी कानों पर यकीन ही नहीं हुआ। सभी ने घरवालों को सांत्वना दी। उनके कार्यों व अंतिम बार उनसे हुई बातचीत दोहराई। ईस्टर्न बिहार चेंबर ऑफ कॉमर्स के अध्यक्ष अशोक भिवानीवाला ने उनके शोक में शनिवार को चेंबर दफ्तर बंद रखने की घोषणा की।

भागलपुर की एकजुटता में योगदान याद रहेगा

समाजसेवी अग्रवाल के दर्शन को उनके घर पहुंचे डिप्टी मेयर राजेश वर्मा, चेंबर अध्यक्ष अशोक भिवानीवाला, शिक्षाविद राजीवकांत मिश्रा, प्राकृतिक चिकित्सा केंद्र प्रमुख जेता सिंह, डॉ. अजय कुमार सिंह, मनोज मीता, अभिषेक जैन, लायंस क्लब ऑफ सिल्क सिटी के पूर्व अध्यक्ष उज्जैन कुमार मालू, सीए प्रदीप सिंघानिया, विनीत बुधिया, चेंबर के पूर्व अध्यक्ष रामगोपाल पोद्दार ने परिजनों को सांत्वना दी। सभी ने कहा, भागलपुर की एकजुटता के लिए उनका योगदान हमेशा याद रहेगा। वे समाज के मजबूत स्तंभ थे।

फेसबुक पर रोज भरते थे सभी में ऊर्जा सोशल मीडिया (फेसबुक) पर वे रोज लोगों में ऊर्जा भरते थे। उनके आखिरी संदेश भी शहरवासियों के हितों को लेकर ही था। उन्होंने चार दिन पहले 20 अगस्त की सुबह 10.45 बजे लिखा था कि चाटुकारों से बचें..ये तभी तक आपकी चाटुकारिता में हैं, जब तक उनका आपसे स्वार्थ सिद्धि हो रही है। 19 अगस्त को उन्होंने शंकराचार्य के उपदेश से मृत्यु को भी परिभाषित किया था। फेसबुक पर शोक संदेश भी छाया रहा। आज भागलपुर रो रहा है, आपको कभी नहीं भूल पाएंगे..जैसे वाक्य से लोगों का दु:ख झलकता रहा। मोहित कुमार जैन ने तो लिखा कि विश्वास अब भी नहीं हो रहा कि हमारे मुकुटधारी अंकल नहीं रहे। कौशल त्यागी ने भागलपुर के ज्ञानपूंज रूपी दीपक सदा के लिए बुझ गया..आप हमें बहुत याद आएंगे..विनम्र श्रद्धांजलि।

इन्होंने जताया शोक : मेयर सीमा साहा, पूर्व डिप्टी मेयर डॉ. प्रीति शेखर, भाजपा नेता मृणाल शेखर, अर्जित शाश्वस्त चौबे, लायंस क्लब के पूर्व अध्यक्ष डॉ. पंकज टंडन, विनोद अग्रवाल, नागरिक विकास समिति के अध्यक्ष जियाउर रहमान, सलाहकार रमण कर्ण, मारवाड़ी युवा मंच के अश्विनी जोशी मोंटी, पूर्व अध्यक्ष नितिन भुवानिका, सचिव जॉनी संथालिया, चेंबर उपाध्यक्ष अजीत जैन, नीरज कोटरीवाला, शरद सलारपुरिया, महासचिव रोहित झुनझुनवाला, सचिव सीए पुनीत चौधरी, गिरधर गोपाल मावंड़िया, आशीष सर्राफ,अभिषेक डालमिया, पदम जैन ने भी उनके घर पहुंचकर उनके अंतिम दर्शन किए और शोक जताया।

इन संदेशों से लोगों में ऊर्जा भरते थे अग्रवाल

जीवन बहती नदी है, अत: हर परिस्थिति में आगे बढ़ें

तस्वीर के रंग चाहे जो भी हो, किन्तु मुस्कान का रंग हमेशा खूबसूरत ही होता है

अगर किसी को पराजित करना है तो उसे विनम्रता से पराजित करें क्रोध हमारे पतन की पहली सीढ़ी है, मित्र व्यवहार सबों से रखें हमारी विफलता का सबसे बड़ा कारण हमारी नकारात्मक सोच है

मुझे चेंबर से जोड़ा बहुत कुछ सिखाया

शहर ने एक पुरोधा खो दिया। सरकार की बेहतर आर्थिक नीतियों की प्रशंसा तो भविष्य में नुकसान देने वाली नीतियों की आलोचना करने में वे कभी पीछे नहीं रहे। चेंबर के अध्यक्ष के रूप में उनका छह साल अविस्मरणीय है। उन्होंने ही मुझे चेंबर से जोड़ा, बहुत कुछ सिखाया। शैलेन्द्र कुमार सर्राफ, पूर्व अध्यक्ष, ईस्टर्न ऑफ कॉमर्स

मुकुटधारी अग्रवाल के निधन से भागलपुर को अपूरणीय क्षति हुई है। इसकी भरपाई नहीं हो सकती। वे हमेशा भागलपुर के विकास को लेकर चिंतित रहते थे। कहकशां परवीन, सांसद, राज्यसभा

मुकुटधारी अग्रवाल के मैं बेहद करीब था। वे शहर के विकास को लेकर चिंतित रहते थे। उनके जाने से शहर ही नहीं, मुझे व्यक्तिगत भी बड़ी क्षति हुई है। अजीत शर्मा, विधायक

वे समाज के धरोहर थे। हर वर्ग को साथ लेकर चले। उनके विचार और उनकी दी गई सीख को आत्मसात कर यह शहर हमेशा आगे बढ़ेगा। वे हमारे विचारों में हमेशा जीवित रहेंगे। राजेश वर्मा, डिप्टी मेयर

मुकुटधारी अग्रवाल का जाना बड़ी क्षति है। भगवान से प्रार्थना करता हूं कि उनकी आत्मा को शांति दे। राम गोपाल पोद्दार, पूर्व अध्यक्ष, इस्टर्न बिहार चेंबर ऑफ कॉमर्स

वे सामाजिक थे। जीवन के अंतिम क्षणों में भी गतिमान रहे। उनके जीवन ने हमलोगों को हमेशा प्रेरणा दी है। दु:ख की इस घड़ी में भगवान उनके परिजनों को धैर्य और दु:ख सहने की शक्ति दे। डॉ. प्रीति शेखर, पूर्व डिप्टी मेयर

मैं बाहर हूं, मुझे जानकारी मिली, काफी दु:ख हुआ। वे सकारात्मक सोच के व्यक्ति थे। उनकी कमी पूरी नहीं हो सकेगी। टुनटुन साह, अध्यक्ष, जिला परिषद

व्यापारी थे पर समाज व सरोकारों की चिंता में ही जीवन गुजारा

मुकुटधारी अग्रवाल की शख्सियत बिल्कुल अलग थी। वे जितने सामाजिक थे, उतने की सांस्कृतिक, उतने ही कलात्मक। पूरा शहर उनके घर जैसा ही था। समाज के लिए उनकी चिंता बेहद गहरी रही है। यूं तो वे व्यावसायी थे, लेकिन कभी व्यापार तक सीमित नहीं रहे। वे पत्रकार थे। रंगकर्मी थे। तकनीक को ग्रामीण भारत से भी जोड़ने को इच्छुक रहे। उनके जीवन का सबसे खास पहलु स्पष्टवादिता थी।

बात बहुत पुरानी है..एक दौर था, जब पत्रकारिता के क्षेत्र में भागलपुर में सीमाएं थीं। मेरे चाचा गोपालकृष्ण मिश्रा पत्रकारिता से जुड़े थे। तब भागलपुर में गिने-चुने इक्का-दुक्का अखबार चलते थे। उस दौर में उन्होंने पत्रकारिता की। कई सम-सामयिक मुद्दों पर उन्होंने कई खबरें लिखीं। लेख और फीचर से भागलपुर की संस्कृति और जनमुद्दों को उठाया।

सामाजिक सरोकार उनके लिए अहम रहा

सामाजिक सरोकार उनके लिए प्राथमिक था। उन्होंने न सिर्फ नाट्य मंचन किया, बल्कि कई किरदार भी निभाए। रंगमंच, साहित्य के क्षेत्र में भी उन्होंने खूब काम किया। जानकारियां तो उनके पास बहुत थी। जब भी कोई रिसर्च करता या भागलपुर के इतिहास व संस्कृति, परम्परा से जुड़ी जानकारी की तलाश करता तो मुकुटधारी अग्रवाल ही एकमात्र ऐसे शख्स थे, जिनके पास लोग खुद पहुंच जाते थे। ऐसी जानकारियां देने में भी वे खूब बढ़-चढ़कर हिस्सा लेते थे। अपने ज्ञान को उन्होंने खूब लोगों तक पहुंचाया।

बेकरी से की थी अपने सफर की शुरुआत

मुझे 40 साल पुराना एक संस्मरण याद आ रहा है। उन्होंने अपने घर से ही बेकरी आइटम्स की शुरुआत की थी। उनकी दुकान चल निकली। काफी दिनों तक उन्होंने यह दुकान चलाई, लेकिन बाद में वे अलग-अलग व्यवसाय में आ गए। शहर की अर्थव्यवस्था को भी गति देने में उनका योगदान अहम रहा है। ईस्टर्न बिहार चेंबर ऑफ कॉमर्स वे अध्यक्ष भी चुने गए। अपने कार्यकाल में कई काम करवाए। व्यापार जगत को ऊंचाइयां दीं। इतना ही नहीं, उन्होंने भागलपुर में पहली बार चेंबर ऑफ इंडस्ट्रीज का भी गठन किया। कृषि को तकनीक से जोड़ने के लिए काम किया। नई तकनीक से वे बेहद प्रेम करते थे। यही कारण था कि 82साल की उम्र में भी वे स्मार्टफोन, फेसबुक, कम्प्यूटर, व्हाट्सएप पर एक्टिव रहते थे।

(जैसा कि शिक्षाविद् राजीवकांत मिश्रा ने बताया)

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