कोतवाली थाना में पहले कीपिटाई, फिर फोड़ दीं आंखें

Bhagalpur News - कहीं से घूमकर शर्मा डीएसपी आया। थानेदार ने बताया कि अब भी कुछ नहीं बताया। तब डीएसपी मुझे देख क्रोधित हो गया।...

Mar 27, 2020, 06:40 AM IST
कहीं से घूमकर शर्मा डीएसपी आया। थानेदार ने बताया कि अब भी कुछ नहीं बताया। तब डीएसपी मुझे देख क्रोधित हो गया। थानेदार को बोला, ‘थर्ड डिग्री अपनाओ और आंखें फोड़ कर गंगाजल डाल दो। सारा दर्द मिट जाएगा।’ उसका इतना कहना था कि पुलिस वाले फिर से मेरे ऊपर टूट पड़े।

किस्त : 9

पुलिस की जीप उमेश यादव को मुजाहिदपुर थाना नहीं ले गई। उसे सीधे कोतवाली थाना लाया गया और डीएसपी बीके शर्मा के सामने प्रस्तुत किया गया। डीएसपी ने उससे पूछताछ की। मगर, उमेश ने खुद को निर्दोष बताते हुए सवाल दाग दिया, ‘आखिर मुझे किस जुर्म में यहां लाया गया। मुझे जाने दिया जाए। मैं निर्दोष हूं।’ उमेश की बात सुनकर डीएसपी भड़क गए। पहले तो खुद दो-चार डंडे जड़े। फिर थानाध्यक्ष से बोले, ‘शातिर है यह अहिर… बिना थर्ड डिग्री अपनाए, कुछ बताने वाला नहीं है। ले जाइए इसे और बढ़िया से इलाज कर इससे राज उगलवाइए। जब तक नहीं बताता, तब तक थर्ड डिग्री हथकंडा जारी रखिए।’

उमेश को लेकर थानाध्यक्ष अपनी कक्ष की ओर गए। बरामदे पर उसके हाथ-पांव बांध दिए। फिर उसके बाद जो सलूक किया गया, उसे उमेश नहीं भूल पाया। वह कहता है, ‘ननिहाल से लौटने के दौरान मुजाहिदपुर थाने की पुलिस ने मुझे बेवजह पकड़ लिया। बोली कि थाना ले चलते हैं। मगर, मुजाहिदपुर न ले जाकर, कोतवाली थाना पहुंचा दिया। शर्मा डीएसपी ने हथकड़ी पहनवाकर बेरहमी से पिटाई की। तरह-तरह के कांडों के बारे में पूछने लगा। हम जानते ही नहीं थे तो बताते कैसे। इनकार करने पर पिटाई की जाती। इसी तरह रात बीत गई। सुबह में शर्मा डीएसपी फिर आया। वही धौंस… वही सवाल, जिसका जवाब मेरे पास नहीं था। इतनी बेरहमी से सभी मारते थे कि हम यदि हृष्ट-पुष्ट नहीं होते तो शायद पिटाई से ही मर गए होते। दूसरे दिन भी सुबह से लेकर शाम तक रुक-रुक कर पुलिसवाले पीटते और हम पिटाते रहे। शाम हो गई।

कहीं से घूमकर शर्मा डीएसपी पुन: आया। थानेदार ने बताया कि अब भी कुछ नहीं बताया। तब डीएसपी मुझे देख क्रोधित हो गया। उसने थानेदार को बोला, ‘थर्ड डिग्री अपनाओ और आंखें फोड़ कर गंगाजल डाल दो। इसका सारा दर्द मिट जाएगा।’ उसका इतना कहना था कि पुलिस वाले फिर से मेरे ऊपर टूट पड़े। टेकुआ से मेरी दोनों आंखें भोंक दीं और उसमें तेजाब डाल दिया। हम चीख उठे। मगर, उन बेरहमियों पर कोई फर्क नहीं पड़ा। कुछ देर बाद रात में ही मुझे सदर अस्पताल में भर्ती कराया और अगले दिन न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया। मुझे आज तक यह समझ में नहीं आया कि मेरे साथ पुलिस वालों ने ऐसी क्रूर हरकत क्यों की। जबकि मैं कोई अपराधी नहीं था। लेकिन किससे कहते, कोई सुनने वाला भी नहीं था। पुलिस के सभी बड़े अधिकारी मिले हुए थे। परिजनों को जब पता चला तो कोहराम मच गया। छह माह की दुल्हन प|ी के ऊपर जैसे पहाड़ ही टूट पड़ा।’

-सुजीत कुमार ‘पप्पू’

अगली किस्त : आंखें फोड़ने की खबर सुन बेहोश हुई उमेश की दुल्हन।

भागलपुर अंखफोड़वा कांड

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