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2.30 करोड़ रूपए कीमत की 5 दुर्लभ प्रजाति की छिपकली संग तस्कर गिरफ्तार

आम बोलचाल की भाषा में इसे टोके बुलाया जाता है, वैज्ञानिक नाम है गीको

Danik Bhaskar | Sep 03, 2018, 06:05 AM IST

ठाकुरगंज. सीमा पर तैनात एसएसबी 41वी बटालियन के जवानो ने शनिवार शाम को गलगलिया सीमा से 15 किलोमीटर की दूरी पर नक्सलवाड़ी के बाबूपाड़ा से एक तस्कर को करोड़ो के पांच टोके (दुर्लभ प्रजापति की छिपकली) के साथ गिरफ्तार करते हुए नक्सलवाड़ी वन विभाग के हवाले किया है।

घटना के संबंध में बताया जाता है कि शनिवार को दोपहर के समय एसएसबी को गुप्त सूचना मिली कि एक तस्कर दो टोके (वैज्ञानिक नाम गीको) को लेकर किसी तस्कर गिरोह से बेचने के फिराक में है। उसके बाद बटालियन सेनानायक राजीव राणा के निर्देश पर सहायक सेनानायक रीना कुमारी के नेतृत्व में एक टीम गठित करके उक्त स्थान पर छापेमारी करने के लिए भेजा गया। उक्त स्थान घात लगाए एसएसबी जवानो को जैसे ही तस्कर अमल सरकार पर पड़ी तो उसे घेरकर दबोच लिया। जिसके बाद उसके सामानों की तलाशी ली गई तो एक झोले में मुसहरी नेट में छिपाकर रखे पांच टोके को जब्त करते हुए उसे नक्सलवाड़ी वन विभाग के सुपुर्द किया गया है। जब्त एक टोके की कीमत अन्तरराष्ट्रीय बाजार में दो करोड़ तीस लाख रुपए है। इस हिसाब से पांच टोके की कीमत वन विभाग ने वन जीव सरंक्षण अधिनियम के तहत कार्रवाई करते हुए मामला दर्ज करते हुए न्यायिक हिरासत में भेजा है।
नेपाल से भेजा जाना था विदेश
तस्कर अमल सरकार साकिन बंगाल नक्सलवाड़ी बाबूपाड़ा बाबू से पूछताछ में पता चला है कि उसे किसी ने तस्कर गिरोह के सदस्य ने पांच टोके को नेपाल भेजने की जिम्मेदारी दी थी, जिसे बताये ठिकाने पर पहुंचाने पर पांच टोके के बदले 2 करोड़ 30 लाख रूपये मिलने थे। जिसमे उसका कमीशन फिक्स था।
दवाइयों में होता है इस्तेमाल
दरअसल गीको नाम की इस छिपकली का मांस दवाइयां बनाने में इस्तेमाल होता है। दक्षिण-पूर्व एशियाई देशों में डायबिटीज, एड्स और कैंसर, सैक्स पावर को बढ़ाने जैसी परंपरागत दवाई बनाने में इसका इस्तेमाल होता है।
50 लाख तक में बिकती है एक
चीन में इसे ट्रेडिशनल मेडिसिन के तौर पर इस्तेमाल किया जाता है। इन्हीं वजहों से इंटरनेशनल ब्लैक मार्केट में इनकी खासी मांग है. यहां इन्हें 40 से 50 लाख की कीमत तक खरीदा-बेचा जाता है।
बिहार सहित नेपाल व इंडोनेशिया में पाई जाती है
यह छिपकली दक्षिण-पूर्व एशिया, बिहार, इंडोनेशिया, बांग्लादेश, पूर्वोत्तर भारत, फिलीपींस तथा नेपाल में पाई जाती है। जंगलों की लगातार कटाई की वजह से गीको नामक यह छिपकली अब खत्म होने की कगार पर है।