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प्रदूषण जांच के लिए गाड़ी नहीं, उसकी तस्वीर जरूरी, 100 रुपए दीजिए अाैर बिना किसी पड़ताल के सर्टिफिकेट लीजिए

Bhagalpur News - नए ट्रैफिक नियम में सख्ती के बाद शहर के प्रदूषण जांच केंद्राें पर सर्टिफिकेट के लिए भीड़ बढ़ गई है। इस सर्टिफिकेट...

Bhaskar News Network

Sep 14, 2019, 07:02 AM IST
Bhagalpur News - no vehicle for pollution check picture of it is necessary give rs 100 and take certificate without any investigation
नए ट्रैफिक नियम में सख्ती के बाद शहर के प्रदूषण जांच केंद्राें पर सर्टिफिकेट के लिए भीड़ बढ़ गई है। इस सर्टिफिकेट के नहीं रहने पर 10 हजार रुपए जुर्माने का प्रावधान नए नियम में किया गया है। सरकार के इस नए नियम से प्रदूषण जांच केंद्राें के संचालकाें की चांदी हाे गई है। वे नियम-कानून ताक पर रख कर सर्टिफिकेट बांट रहे हैं। वाहनाें की जांच तक नहीं कर रहे हैं। 100 रुपए लेते ही छह महीने के लिए गाड़ी के फिट हाेने का सर्टिफिकेट दे रहे हैं। इसके लिए गाड़ी लाने की भी जरूरत नहीं है। वीडियाे काॅलिंग पर गाड़ी देखकर भी कागजात दे रहे हैं। नियम के अनुसार अाॅनलाइन सर्टिफिकेट बनना चाहिए, लेकिन वे अाॅफलाइन काम कर रहे हैं। शहर के लगभग सभी 13 सेंटराें पर एेसे ही सर्टिफिकेट बांटे जा रहे हैं। ये लाेग 80 रुपए के बदले 100 रुपए भी ले रहे हैं। भास्कर ने शहर के दाे हिस्से में पड़ताल की ताे चाैंकाने वाले खुलासे सामने अाए।

जांच के लिए जल्द बनाएंगे टीम


प्रदूषण सर्टिफिकेट नहीं रहने से नए कानून में 10 हजार रुपए जुर्माने का है प्रावधान

100 रुपए लिये अाैर कंप्यूटर से सर्टिफिकेट निकाल कर दे दिया

प्रिंस वाहन प्रदूषण जांच केंद्र, जीराेमाइल चाैक

ये जांच केंद्र अभी हर दिन 80 से 100 गाड़ियाें काे सर्टिफिकेट दे रहा है। दैनिक भास्कर का रिपाेर्टर ग्राहक बन कर अपनी बाइक की जांच कराने पहुंचा ताे यहां के कर्मचारी ने सिर्फ बाइक के पेपर लिए अाैर कंप्यूटर से सर्टिफिकेट निकाल कर दे दिया। इसके लिए 100 रुपए लिये। कर्मचारी ने कहा कि अगर बाइक घर में है ताे भी उसका भी सर्टिफिकेट बन जाएगा। केवल वीडियाे काॅलिंग से बाइक की लाइव तस्वीर दिखा दीजिए। कर्मचारी स्वयंप्रकाश ने कहा कि इसके लिए 8434455381 नंबर पर वीडियाे काॅल करना हाेगा। हालांकि शुक्रवार काे जब इस नंबर पर बात की गई ताे उसने कहा कि मशीन खराब हाे गई है। एक दिन बाद बात कर लीजिएगा, काम हाे जाएगा।

बाइक की तस्वीर अपलाेड की अाैर अाॅफलाइन सर्टिफिकेट दे दिया, 80 के बदले 100 रु. लिये

वाहन प्रदूषण जांच केंद्र, डिक्सन माेड़, मुंदीचक

यहां भी ग्राहकाें की भीड़ दिनभर लगी रहती है। यहां भीखनपुर का रितेश कुमार अपनी बाइक लेकर पहुंचा ताे कर्मचारी ने सर्टिफिकेट के लिए साै रुपए मांगे। उसकी बाइक की जांच नहीं की। जांच केंद्र के कर्मचारी ने केवल बाइक की तस्वीर ले ली। उसे कंप्यूटर पर अपलाेड किया अाैर सर्टिफिकेट दे दिया। अाॅनलाइन के बदले अाॅफलाइन ही सर्टिफिकेट बनाया। रितेश कुमार ने 80 रुपए के बदले 100 रुपए लेने पर विराेध जताया ताे कर्मचारी ने कहा कि 100 रुपए ही लगेंगे। रितेश कुमार ने एमवीअाई से ज्यादा पैसे लेने की शिकायत की ताे उन्हाेंने लिखित शिकायत करने काे कहा।

बाइक का फाेटाे लेता जीराेमाइल स्थित प्रिंस वाहन प्रदूषण जांच केंद्र का कर्मचारी। इसने बाइक की जांच नहीं की।

शाेपीस की तरह हैं जांच किट और पाइप

लगभग सभी सेंटराें पर पाॅल्यूषण जांच करनेवाले किट अाैर पाइप समेट कर रखे हुए हैं। इसका उपयाेग नहीं हाे रहा है। अगर काेई ग्राहक कहता भी है कि मशीन से वाहन चेक कर लीजिए कि गाड़ी ठीक है या नहीं, ताे सेंटर का कर्मचारी बहाना बनाता है कि अभी वर्कलाेड ज्यादा है। जब सब कुछ सामान्य हाे जाएगा, ताे अाइएगा, चेक कर देंगे।

डिक्सन माेड़ स्थित वाहन प्रदूषण जांच केंद्र पर भी बिना जांच के सर्टिफिकेट दिये गए।

प्रदूषण जांच की ये है दर

वाहन सरकारी रेट

दाे पहिया 80 रुपये

तीन पहिया 100 रुपये

चारपहिया, लाइट 120 रुपये

चारपहिया, मीडियम 200 रुपये

हेवी व्हीकल 500 रुपये

ये हैं नुकसान

पाॅल्यूषण सर्टिफिकेट जारी करने से लाेगाें काे जुर्माना से ताे मुक्ति मिल जाएगी, लेकिन जिस मकसद से प्रदूषण काे कम करने की कवायद चल रही है, वह पूरा नहीं हाेगा। लिहाजा धुअां देनेवाले वाहन प्रदूषण फैलाते रहेंगे। इससे संचालक काे पैसा कमाएंगे, लेकिन अाम लाेग बीमारी के गिरफ्त में अाएंगे।

इसकी हाेती है जांच

पॉल्यूशन अंडर कंट्रोल (पीयूसी) टेस्ट में गाड़ियाें के धुएं में कार्बन मोनोऑक्साइड, हाइड्रोकार्बन और अन्य कणाें की जांच हाेती है। जांच के आधार पर पीयूसी सर्टिफिकेट जारी किया जाता है कि गाड़ी उत्सर्जन और प्रदूषण नियंत्रण मानदंडों को पूरा करता है।

एमवीआई ने कहा-सभी संचालक लगाएं रेट चार्ट

एमवीअाई विनय शंकर तिवारी ने बताया कि प्रदूषण केंद्र संचालकाें से कहा है कि वे 24 घंटे के अंदर रेट चार्ट दुकान के बाहर लगाएं। सभी संचालक अाॅनलाइन ही वाहनाें का प्रमाण पत्र बनाएंगे। अाॅफलाइन बनाने पर इसे मान्यता नहीं मिलेगी। प्रमाण पत्र बनाने के बाद इसकर रसीद भी देनी हाेगी। अगर तय फीस से अधिक पैसे की मांग की जा रही हाे ताे परिवहन विभाग में लिखित शिकायत करें। वाहन विक्रेताअाें से भी कहा है कि वे बिना रजिस्ट्रेशन के गाड़ी काे नहीं बेचें। अगर बिना रजिस्ट्रेशन के वाहन काे सड़क पर उतारा जाएगा ताे वाहन विक्रेता से फाइन लिया जाएगा। नाबालिग के वाहन चलाने के मामले में विक्रेता से 4490 काे रुपया फाइन किया गया है।

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