प्रमोट हो बने प्रोफेसर, अधिसूचना में देरी से अनुभव हुआ 10 साल से कम, वीसी की दौड़ से कई बाहर
{प्राेफेसर के पद पर प्रमाेशन बैक डेट से प्रभारी केवल अधिसूचना में देरी से पेच
{टीएमबीयू के कई शिक्षक 2017 से लेकर अब तक नहीं कर पाए अावेदन
प्राेफेसर के पद पर प्रमाेशन बैक डेट से प्रभावी लेकिन इसकी अधिसूचना में देरी से टीएमबीयू सहित राज्यभर के कई विश्वविद्यालयाें के शिक्षक कुलपति के लिए अावेदन करने से वंचित हाे गए। 2017, 2019 से लेकर अब तक 3 बार कुलपति नियुक्ति के लिए की गई प्रक्रिया में शिक्षक इस वजह से शामिल नहीं हाे पाए क्याेंकि ये इस पद के लिए प्राेफेसर के पद पर कम से कम 10 साल के अनुभव की अर्हता पूरी नहीं कर पाए।
ये वैसे शिक्षक हैं जिनका प्राेफेसर के पद पर प्रमाेशन कई वर्षाें से लंबित था। निर्धारित समय पर प्रमाेशन मिलता ताे ये शिक्षक वर्ष 1998, 2002 या 2004 में ही प्राेफेसर हाे जाते। एेसे में जब 2017 में कुलपति की नियुक्ति की प्रक्रिया हुई थी तब ये शिक्षक 10 साल से अधिक का अनुभव रखते हुए अावेदन कर सकते थे। लेकिन इन शिक्षकाें काे 2016 या 2017 में प्राेफेसर के पद पर प्रमाेशन दिया गया अाैर इसकी अधिसूचना जारी की गई। उधर कुलपति के पद पर नियुक्ति के लिए अावेदन करने का जाे अाॅनलाइन फाॅर्मेट है उसमें प्राेफेसर के पद पर प्रमाेशन मिलने की अधिसूचना जारी हाेने की तिथि से कम से कम 10 साल का अनुभव मांगा जाता रहा है।
कुछ पीजी हेड ने बताया कि उनलाेगाें काे प्राेफेसर के पद पर वर्ष 2004 या उससे पहले प्रमाेशन मिलना चाहिए था। लेकिन प्रक्रिया अटकी रही अाैर 2016 या 2017 में प्रमाेशन मिला। हालांकि प्रमाेशन काे 2004 या उससे पहले की तिथि से प्रभावी माना गया लेकिन प्रमाेशन की अधिसूचना 2016 या 2017 में जारी हुई अाैर उस समय से जाेड़ें ताे 10 साल का अनुभव 2026 या 2027 में पूरा हाेगा।
इस बारे में भुस्टा के अध्यक्ष डाॅ. डीएन राय ने कहा कि जब अधिसूचना की तिथि से 10 साल का अनुभव जाेड़ने का अादेश काेर्ट ने दिया था तभी इसका विराेध हाेना चाहिए था। जब प्रमाेशन का लाभ बैक डेट से मिल रहा है अाैर हेड या डीन तक उसी के अाधार पर तय हाे रहे हैं ताे कुलपति नियुक्ति में 10 साल के अनुभव क गिनती अधिसूचना की तिथि से करना गलत है। जल्द ही इसमें बदलाव के लिए तैयारी की जाएगी।