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नियमित कुलपति मिलने तक नहीं होंगे कोई नीतिगत निर्णय

कुलपति प्रो. एनके झा के निधन से टीएमबीयू एक बार फिर 20 महीने पहले वाली स्थिति में लौट सकता है जब तत्कालीन कुलपति प्रो....

Dainik Bhaskar

Nov 11, 2018, 02:30 AM IST
Bhagalpur - regular vc will not be able to meet any policy decision
कुलपति प्रो. एनके झा के निधन से टीएमबीयू एक बार फिर 20 महीने पहले वाली स्थिति में लौट सकता है जब तत्कालीन कुलपति प्रो. रमा शंकर दुबे न तो वित्तीय निर्णय ले सकते थे और न नीतिगत फैसले कर सकते थे। तब प्रो. दुबे अपने तीन साल के कार्यकाल के दो साल और नौ महीने पूरे कर चुके थे। इसलिए नए कुलपति की नियुक्ति को लेकर राजभवन ने प्रो. दुबे के निर्णय लेने की शक्ति पर रोक लगा दी थी। अब विवि में कुलपति का पद खाली है और ऐसे में जब तक नियमित कुलपति की नियुक्ति नहीं हो जाती है तब तक प्रभारी कुलपति न तो वित्तीय निर्णय कर सकेंगे और न नीतिगत फैसले ले पाएंगे। जानकार बताते हैं कि विवि एक्ट के तहत प्रभारी कुलपति ऐसे फैसले नहीं ले सकते हैं। अगर राजभवन किसी को प्रभारी कुलपति की जिम्मेदारी देने के साथ वित्तीय और नीतिगत फैसले लेने का अधिकार भी दे तभी ऐसे निर्णय लिए जा सकेंगे या बहुत जरूरी होने पर प्रभारी कुलपति को राजभवन से इसके लिए अनुमति लेनी होगी। राजभवन ने अभी नियमित कुलपति की नियुक्ति की प्रक्रिया शुरू नहीं की है और इसमें अभी करीब तीन महीने लग सकते हैं। तब तक किसी को प्रभारी कुलपति बनाए जाने की संभावना है।

पूर्व में प्रतिकुलपति के रहते भी दूसरे विवि के वीसी और कमिश्नर को मिला था प्रभार

पहले भी होते रहे हैं ऐसे निर्णय

केके मंडल के प्रोवीसी रहते हुए राजभवन ने कमिश्नर को कुलपति का प्रभार दिया था। हालांकि कुछ साल पहले सुप्रीम कोर्ट की आेर से मना होने पर अब कमिश्नर को कुलपति का प्रभार शायद ही मिले। वहीं कुमारेश प्रसाद और टीके शांडिल्य के प्रोवीसी रहते हुए बीआरएयू के वीसी बिमल कुमार प्रभार मिला था।

प्रभारी वीसी को लेकर अभी स्थिति स्पष्ट नहीं

राजभवन प्रभारी कुलपति किसे बनाएगा इसको लेकर बहुत कुछ स्पष्ट नहीं है। एक्ट के अनुसार वीसी के देहांत या उनके इस्तीफे की स्थिति में प्रतिकुलपति स्वत: प्रभार में आ जाते हैं। लेेकिन यह उनके आगे भी प्रभार में रहने की गारंटी नहीं हो सकता है। बताया जा रहा है कि इसको देखते हुए फिलहाल टीएमबीयू के प्रोवीसी के साथ ही टीएमबीयू से ही अलग होने के कारण मुंगेर विवि, यहां के मूल शिक्षक और पूर्व प्रोवीसी होने के कारण बीएनएमयू विवि और बीएनएमयू से नजदीक होने के कारण पूर्णिया विवि के कुलपतियों को प्रभार देने की चर्चा राजभवन में चल रही है।

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