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किसानों की सहमति के बाद नहीं उखाड़ी गई सड़क

3 वर्ष पहले
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इस्माइलपुर प्रखंड में तीन करोड़ 94 लाख की लागत से बनाई गई छोटू सिंह टोला से प्रखंड मुख्यालय तक जाने वाली सड़क को हाईकोर्ट के आदेश पर उखाड़ने गए मजिस्ट्रेट व पुलिस पदाधिकारी को किसानों ने सड़क नहीं उखाड़ने दिया। जिन किसानों की निजी जमीन पर सड़क का कुछ हिस्सा आ गया है उन किसानों ने जमीन पर सड़क रहने की सहमति भी पदाधिकारी को दिया। किसान बिंदेश्वरी मंडल ने कहा कि मैं अपनी जमीन पर सड़क रहने देंगे। सड़क नहीं तोड़ने देंगे। दंडाधिकारी ग्रामीण कार्य विभाग के कार्यपालक अभियंता राम मनोहर ठाकुर ने किसानों को बताया कि माननीय उच्च न्यायालय के आदेश के बाद हम जिन किसानों की जमीन में सड़क बनी है उसे तोड़ने के लिए आए हैं। उन्होंने कहा कि कुल आठ किसानों द्वारा निजी जमीन में सड़क निर्माण होने व मुआवजा नहीं मिलने का केस उच्च न्यायालय में किया गया था। फैसला किसानों के पक्ष में आया है। यह सड़क बिंदेश्वरी मंडल, बासुकी यादव, अमरेश यादव, वीणा कुमारी एवं रूपेश कुमार के खेतों से गुजरी है। जिसे हम उखाड़ने के लिए आए हैं। वहीं मौके पर मौजूद ग्रामीणों ने कहा कि यह सड़क हम लोगों के लिए लाइफलाइन है। इसके उखड़ जाने के बाद पूरे प्रखंड वासियों को परेशानियों का सामना करना पड़ेगा। ग्रामीणों की परेशानियां को देखते हुए किसानों ने अपनी जमीन सड़क में लिखित रूप से देने का आश्वासन दिया। मौके पर इस्माइलपुर सीओ व थानाध्यक्ष मौजूद थे।

मालूम हो कि तीन करोड़ 94 लाख की लागत से वर्ष 2016 में इस्माइलपुर छोटू सिंह टोला से इस्माइलपुर प्रखंड मुख्यालय तक सड़क का निर्माण किया गया था। डेढ़ किमी सड़क किसानों की निजी जमीन पर निर्माण हुआ था। इसके बाद किसानों ने उच्च न्यायालय में मुआवजा नहीं मिलने का केस दायर किया था। हाईकोर्ट ने किसानों के पक्ष में फैसला सुनाते हुए खेतों में निर्माण किए गए सड़क को उखाड़कर हटाने का आदेश दिया था।

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