खुलासा / पूर्व डीसीओ की लापरवाही से हुआ घोटाला, सृजन संस्था की कभी नहीं की जांच, पत्नी को 1 लाख लोन दिलाया



Scam done due to negligence of former DCO, creation institution never investigated
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Scam done due to negligence of former DCO, creation institution never investigated

  • अब चलेगी विभागीय कार्यवाही, संयुक्त निबंधक संचालन पदाधिकारी के रूप में नियुक्त हुए 

Dainik Bhaskar

Aug 14, 2019, 10:46 AM IST

भागलपुर. पूर्व जिला सहकारिता पदाधिकारी और भागलपुर सेंट्रल को-ऑपरेटिव बैंक के पूर्व प्रबंधक निदेशक व पूर्णिया के डीसीओ कवींद्र नाथ ठाकुर की लापरवाही के कारण ही सृजन घोटाला हुआ है। 

 

कवींद्र नाथ ठाकुर भागलपुर में 2005 से लेकर 2007 के बीच कार्यरत रहे। लेकिन उन्होंने सृजन महिला विकास सहयोग समिति की एक बार भी जांच नहीं की। बल्कि उलटे सृजन को लाभ पहुंचाने का हर संभव प्रयास किया। इससे खुद भी लाभांवित होते रहे। अपनी पत्नी पूनम रानी ठाकुर के नाम से वहां से एक लाख रुपए लोन भी लिए और इसके लिए वे खुद गारंटर भी बन गए। जबकि सरकारी सेवक होने के नाते वे वहां से कोई लाभ नहीं ले सकते थे। 

 

वहां बैंक चल रहा था, किस नियम के तहत चलता था, इसकी जांच करनी की भी जहमत नहीं उठाई। इसका खुलासा सहकारिता विभाग की निगरानी शाखा की जांच से हुआ है। साथ ही पूर्व डीसीओ के खिलाफ आरोप पत्र भी गठित किया गया है। इसको लेकर अब सहकारिता विभाग ने उनके खिलाफ विभागीय कार्यवाही चलाने का निर्णय लिया है। सारण प्रमंडल के सहयोग समितियां के संयुक्त निबंधक को संचालन पदाधिकारी और पटना के सहयोग समिति के सहायक निबंधक को प्रस्तुतिकरण पदाधिकारी नियुक्त किया गया है। साथ ही कवींद्रनाथ ठाकुर को अपना पक्ष रखने के लिए 15 दिन का समय दिया गया है। 

 

दायित्व भूले व समिति के कामों की जांच नहीं की 
जिला सहकारिता पदाधिकारी के रूप में कवीन्द्र नाथ ठाकुर आठ मार्च 2005 से लेकर पांच अगस्त 2007 तक भागलपुर में रहे। दी भागलपुर सेंट्रल कोऑपरेटिव बैंक लिमिटेड के प्रबंध निदेशक के रूप में एक जनवरी 2000 से छह मार्च 2005 तक कार्यरत रहे। इस दौरान सृजन महिला विकास सहयोग समिति में बड़े पैमाने पर अनियमित काम और आर्थिक अपराध हुआ। लेकिन पदस्थापन अवधि में समिति के कार्यकलाप की जांच पड़ताल तत्कालीन डीसीओ ने नहीं की। 

 

गारंटर बनकर पत्नी को एक लाख लोन दिलवाया 
तत्कालीन डीसीओ कवींद्र नाथ ठाकुर ने अपनी पत्नी पूनम रानी ठाकुर को 13 मार्च 2007 को सृजन महिला विकास सहयोग समिति से एक लाख रुपया का लोन दिलवाया। इसके लिए वह खुद गारंटर बने थे। सृजन महिला विकास सहयोग समिति के लोन रजिस्टर के अनुसार, पूनम रानी ठाकुर को समिति का नोमिनल मेंबर बनाया गया। 

 

बैंकिंग एक्ट का उल्लंघन कर किया संशोधन 
डीसीओ के पद पर रहते हुए कवींद्र ने 25 जनवरी 2006 को सृजन समिति की उपविधियों में तीसरा संशोधन किया। इसके बाद समिति की कंडिका का संशोधन करते हुए निबंधन प्रमाण पत्र जारी किया। समिति के कर्ज लेने की क्षमता समिति की हिस्सा पूंजी व सुरक्षित निधि के पूर्व वर्णित पांच गुना से बढ़ाकर 40 गुना हो गया। 

 

ड्यूटी में लापरवाही 
तत्कालीन डीसीओ ने सृजन महिला विकास सहयोग समिति लिमिटेड की उपविधियों में जो संशोधन किया गया, वह बिहार सहकारिता अधिनियम के प्रावधान को ओवररूल कर दिया। सहकारी समिति बैंकिंग एक्ट व रिजर्व बैक ऑफ इंडिया के कई प्रावधानों का भी उल्लंघन किया गया। यह सृजन महिला विकास सहयोग समिति लिमिटेड सबौर भागलपुर को लाभ पहुंचाने के मकसद से नियमों का उल्लंघन कर किया और घोर लापरवाही बरती गई। 

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