भागलपुर / स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट में 30 करोड़ का घपला उजागर दो बैंकों में जमा पैसों का नहीं मिल रहा हिसाब



Smart City project can not get deposited money in two banks highlighted by 30 crore rupees
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Smart City project can not get deposited money in two banks highlighted by 30 crore rupees

  • निवर्तमान नगर आयुक्त श्याम बिहारी मीणा की भूमिका संदिग्ध पाई गई

Dainik Bhaskar

Jul 13, 2019, 10:44 AM IST

भागलपुर (राकेश पुरोहितवार). भागलपुर स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट को मिले फंड में 30 करोड़ का घपला उजागर हुआ है। प्रमंडलीय आयुक्त वंदना किनी ने नगर विकास विभाग विभाग के प्रधान सचिव को गोपनीय पत्र लिखकर उक्त घोटाले की जानकारी दी है और आग्रह किया है कि विभागीय स्तर पर इसकी जांच कराना अति आवश्यक है। 

 

आयुक्त ने पूरे घपले की जांच तीन सदस्य कमेटी से कराई थी, जिसमें निवर्तमान नगर आयुक्त श्याम बिहारी मीणा की भूमिका संदिग्ध पाई गई है। जांच कमेटी की रिपोर्ट आ जाने के बाद प्रमंडलीय आयुक्त वंदना किनी ने 27 जून को ही नगर विकास विभाग के प्रधान सचिव को पूरे मामले की जानकारी दी थी और उनसे अनुरोध किया था कि श्याम बिहारी मीणा का अन्यत्र तबादला कर दिया जाए और उनकी जगह पर किसी योग्य पदाधिकारी की तैनाती हो, ताकि स्मार्ट सिटी मिशन की लंबित परियोजनाएं निर्धारित समय में पूरा किया जा सके। सनद रहे कि दैनिक भास्कर ने स्मार्ट सिटी फंड में हो रही गड़बड़ी का मामला प्रमुखता से उजागर किया था।

 

नगर आयुक्त ने तथ्यों को छिपाया, वित्तीय अनियमितता बरती: रिपोर्ट
प्रमंडलीय आयुक्त द्वारा नगर विकास विभाग के प्रधान सचिव को भेजे गए गोपनीय पत्र में खुलासा हुआ है कि भागलपुर स्मार्ट सिटी लिमिटेड के रोकड़ पंजी, बैंक स्टेटमेंट और चेक पंजी में गंभीर वित्तीय अनियमितता जांच के दौरान पाई गई है। जांच में यह भी पता चला कि स्मार्ट सिटी के द्वारा राशि को केनरा बैंक के अलावा बैंक ऑफ बड़ौदा और यूनियन बैंक ऑफ इंडिया के खाते में भी रखा गया है। लेकिन केनरा बैंक को छोड़कर बाकी दो अन्य बैंकों के खाते से संबंधित कोई भी रिकॉर्ड, रोकड़ बही जांच दल के समक्ष नगर आयुक्त ने प्रस्तुत नहीं किया। इससे नगर आयुक्त के द्वारा तथ्यों को छिपाने व उनके द्वारा बरती गई वित्तीय अनियमितताओं को दबाने का प्रयास परिलक्षित होता है। जांच टीम के द्वारा एक अप्रैल 2017 से 31 मार्च 2018 के दौरान भागलपुर स्मार्ट सिटी लिमिटेड के मात्र केनरा बैंक के खाते से संबंधित अभिलेखों की जांच ही की जा सकी। जिसमें कई गंभीर वित्तीय अनियमितता पाई गई है।

 

निदेशक मंडल की स्वीकृति के बिना ही खर्च कर दिए 30 करोड़
रिपोर्ट के मुताबिक स्मार्ट सिटी लिमिटेड द्वारा वर्ष 2016 से लेकर अभी तक 30 करोड़ की राशि डस्टबिन, जेसीबी, एलईडी टीवी, झूला आदि में किया गया। यह भी पता चला है कि उक्त सामान की खरीददारी के लिए निदेशक मंडल की स्वीकृति भी प्राप्त नहीं की गई है। इस प्रकार स्मार्ट सिटी मिशन भागलपुर की विभिन्न परियोजनाओं के लिए उपलब्ध कराई गई राशि निर्धारित सभी वित्तीय नियमों की अवहेलना एवं निदेशक मंडल की स्वीकृति प्राप्त किए बिना ही 30 करोड़ की सामग्री की खरीद नगर निगम के द्वारा की गई है।

 

पूर्व कमिश्नर के आदेश पर डीएम ने करवाई थी जांच
रिपोर्ट के मुताबिक, खरीदारी से संबंधित रिकॉर्ड भी नियमानुसार नहीं रखे गए हैं। उपरोक्त तथ्यों के आधार पर वर्ष 2016 से 2019 तक नगर निगम में भागलपुर स्मार्ट सिटी मिशन के अंतर्गत प्राप्त राशि में से कुल 30 करोड़ का गंभीर वित्तीय अनियमितता बरती गई है और राशि के दुरुपयोग किए जाने की आशंका है। अलबत्ता इसकी विस्तृत जांच विभागीय स्तर से कराई जानी आवश्यक है। इसके अलावा निवर्तमान नगर आयुक्त श्याम बिहारी मीणा के द्वारा सभी वित्तीय नियमों की लगातार अनदेखी पर करोड़ों रुपए का व्यय किये जाने की प्रवृत्ति से भी यह स्पष्ट है कि स्मार्ट सिटी मिशन भागलपुर की किसी भी परियोजना का क्रियान्वयन उनके द्वारा सही प्रकार नियमानुसार संपादित नहीं किया सका। नतीजतन योजनाओं का कार्य भविष्य में बाधित होने की पूर्ण संभावना है। स्मार्ट सिटी के घपले की जांच के लिए तत्कालीन प्रमंडलीय आयुक्त राजेश कुमार के निर्देश पर डीएम ने कमेटी बनाई थी।

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