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सूर्य पूजा, आरोग्य का वरदान

Dainik Bhaskar

Nov 11, 2018, 02:32 AM IST

Bhagalpur News - विकर्तनो विवस्वाश्च मार्तंडो भास्करो रवि: लोक प्रकाशक: श्री माँल्लोक चक्षुर्मुहेश्वर: लोकसाक्षी त्रिलोकेश:...

Bhagalpur - sun worship blessing of health
विकर्तनो विवस्वाश्च मार्तंडो भास्करो रवि:

लोक प्रकाशक: श्री माँल्लोक चक्षुर्मुहेश्वर:

लोकसाक्षी त्रिलोकेश: कर्ता हर्ता तमिश्रहा

तपनस्तापनश्चैव शुचि: सप्ताश्ववाहन:

गभस्तिहसतो ब्रह्मा च सर्वदेवनमस्कृत:

अर्थ | 1. विकर्तन (विपत्तियों को काटने तथा नष्ट करने वाले),2.विवस्वान् (प्रकाश-रूप),3. मार्तण्ड (जिन्होंने अण्ड में बहुत दिन निवास किया। अदिति के गर्भ में। मारीचि पुत्र ऋषि कश्यप की प|ि।), 4.भास्कर, 5.रवि, 6.लोकप्रकाश, 7.श्रीमान्, 8.लोकचक्षु, 9.ग्रहेश्वर, 10.लोकसाक्षी, 11.त्रिलोकेश, 12.कर्ता, 13.हर्ता, 14.तमिस्रहा (अंधकार को नष्ट करनेवाला), 15. तपन, 16. तापन, 17. शुचि (पवित्रतम), 18.सप्त अश्व वाहन, 19.गभस्तिहस्त (किरणें ही जिनके हाथ स्वरूप हैं), 20. ब्रह्मा और 21. सर्वदेवनमस्कृत। -ब्रह्म पुराण

ज्योर्तिलिंग भी सूर्य स्वरूप

ज्योर्तिलिंगरूपी सूर्य 12 प्रकार की ज्योतियों में समाविष्ट है। इसलिए 12 ज्योतिर्लिंग हैं। शास्त्रों में शंकर और सूर्य का अभेद (कोई अंतर नहीं) स्थापित किया गया है।



सौराष्ट्रे सोमनाथं च श्रीशैले मल्लिकार्जुनम्। उज्जयिन्यां महाकालममोकांरममरेश्वरम्।।

केदारं हिमवत्पृष्ठे डाकिन्यां भीमशंकरम्। वाराणस्यां च विश्वेशं त्र्यम्बकं गौतमी तटे।।

वैद्यनाथं चिताभूभौ नागेशं दारुकावने।सेतुबन्धं च रामेशं घुश्मेशं च शिवालये।

1.सौराष्ट्र में सोमनाथ

2.श्रीशैल पर मल्लिकार्जुन

3. उज्ज्यनी में श्रीमहाकाल

4.नर्मदा किनारे ओंकारेश्वर

5. केदारखंड में केदारनाथ

6.डाकिनी में भीमशंकर

7. काशी में श्रीविश्वनाथ

8. गौतमी तट पर श्री त्र्यंबकेश्वर

9. चिताभूमि में श्रीवैद्यनाथ

10. दारुकावन में श्रीनागेश्वर

11.सेतुबंध पर श्रीरामेश्वर

12. सेतुबंध पर घुश्मेश्वर

-शिव पुराण

जल में खड़े हो अर्घ्य देने का विधान सर्वाधिक जलस्रोत अपने बिहार में

छठ व्रत में जल में खड़े होकर सूर्य को अर्घ्य देने का विधान है। जल स्रोतों के किनारों की सफाई कर लोग घाट बना पूजा करते हैं। बिहार में जल स्रोतों की भरमार है। नदियों के अलावा 27,931 छोटे-बड़े तालाब, आहर-पइन, झील और ताल-तलैया हैं। इनमें अधिकांश का क्षेत्रफल 0.5 हेक्टेयर से अधिक है और 23,471 में पानी बरसात के मौसम में ही भरता है। राज्य में 17 ऑक्स-बो लेक (नदियों का छाड़न, झील या मन) हैं और इनमें स्थायी भाव से पानी रहता है। राज्य की नदियां ही 74% आर्द्रभूमि निर्मित करती हैं ये सूबे की पारिस्थितिकी (ईकोसिस्टम) की किडनियां हैं। बेगूसराय जिले की काबर झील, दरभंगा जिले का कुशेश्वर स्थान, वैशाली की बरैला झील, भागलपुर की डॉल्फिन सेंक्चुरी और पूर्वी चंपारण की मोती झील की गणना राज्य की प्रमुख आर्द्रभूमि में होती है। सभी के किनारे छठ होता है।

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