स्वतंत्रता संग्राम में महिलाओं की भूमिका उल्लेखनीय, उन्हें याद करने की है जरूरत
नागरिक सेवा समिति कि ओर से गुरुवार काे मदरसा जामिया मोहिउद्दीन, शहबानगर में देश की आजादी में महिलाओं की भागीदारी विषय पर सेमिनार का अायाेजन किया गया। इसकी अध्यक्षता रिजवान खान ने की। इस अवसर पर मदरसे में पढ़ने वाली बच्चियों ने अपना विचार व्यक्त किया। शमीम फातमा ने कहा कि देश की आजादी की लड़ाई में पुरुषों के साथ-साथ महिलाओं की भी बराबर की भागीदार रही। आज हम लोगों ने कहीं न कहीं उन महिलाओं कर कुर्बानियों को भुला दिया है, जिसे आज याद करने की जरूरत है।
सेमिनार में आलिया नूर ने कहा कि देश की आजादी में पहले दिन से महिलाओं ने बढ़-चढ़ कर हिस्सा लिया जिसमें सभी मजहब की महिलाएं शामिल थीं। आज देश के लिए उनके दिए गए बलिदान को याद कर के गर्व होता है। कहा कि भारतीय स्वतंत्रता संग्राम की लड़ाई केवल पुरुषों की हिस्सेदारी से फतह नहीं की गई, बल्कि इस महायज्ञ में महिलाओं की भूमिका भी उल्लेखनीय रही। इन्दौर की महारानी अहिल्याबाई होल्कर, झांसी की महारानी लक्ष्मीबाई आजाद भारत का सपना पूरा करने के लिए पुरूषों के साथ एकजुट हुईं। रानी लक्ष्मी बाई और रानी चेनम्मा जैसी वीरांगनाओं ने अंग्रेजों से लड़ते हुए अपनी जान दे दी। तो सरोजिनी नायडू और लक्ष्मी सहगल जैसी वीरांगनाओं ने देश की आजादी के बाद भी सेवा की।
15 बच्चियाें ने लिया भाग, शमीमा फातमा काे मिला पहला स्थान
अयोजित इस सेमिनार में भाषण प्रतियाेगिता में 15 बच्चियों ने भाग लिया। अच्छा भाषण देने के लिए तीन बच्चियाें काे पुरस्कृत किया गया। शमीमा फातमा काे पहला स्थान, अालिया नूर काे दूसरा स्थान अाैर लाइवा नूर काे तीसरा स्थान मिलता। इस अवसर पर एकराम हुसैन शाद, तकी जावेद, वली अहमद खान, तौकीर पप्पू, मंज़र आलम, साबिया परवीन, प्रधान शिक्षक रहीम उल्लाह अादि माैजूद थे।
सेमिनार में विचार रखती छात्रा। मंच पर मौजूद रिजवान खान व अन्य।