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बिहार में जाम पर लगाम है, सड़क पर निकलकर देख हर चौराहे पर जाम है

एक वर्ष पहले
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कौन कहता है बिहार में जाम पर लगाम है, सड़क पर निकलकर देख हर चौराहे पर बड़ा जाम है...जबलपुर के कवि सुदीप भोला ने रविवार रात अपनी कविता के इस मुखड़े से शहर में लग रहे जाम और राज्य में शराब पर लगे प्रतिबंध को उजागर किया। उनकी कविता पर पूरे पंडाल में हास्य रंग घुल गया। मौका था मारवाड़ी युवा मंच के मारवाड़ी पाठशाला परिसर में हुए 59वेंं मित्र बसंतगोष्ठी का। इस गोष्ठी में एक ओर हास्य, शृंगार, वीररस से भरी कविताओं का पाठ हुआ तो पूरा शहर झूमा, दूसरी ओर सड़क मार्ग से भागलपुर पहुंचे कवियों ने अपनी कविताओं में जाम का दर्द भी बताया। जबलपुर के कवि सुदीप भाेला ने देश में काेराेना से फैले भय काे हाेली के रंग में रंगकर पेश किया। उन्होंने कहा, कहा कि रे गोरी गोरी छोरी खड़ी है कोरी कोरी गलियों में छोरे मनाते फिरे होरी...तू कितना भोला तू...उसके कोरी कोरी ड्रेस है, इतनी साफ रखी है जैसे दिल्ली से कांग्रेस है। अपने हाथ पे थोड़ा सेनेटाइजर धोरोना, हाइजेनिक हूं लड़की बोली हो जाये ना कोरोना.. इस पर श्रोताओं ने तालियों से उनका स्वागत किया। उन्होंने देशभक्ति कविता में फौजियों और शहीदों के सम्मान में कहा, उनके लिए क्या गर्मियां, क्या उनके लिए सर्दियां, वर्दियां, वर्दियां ये वर्दियां।

21वीं सदीं में ढूंढते रह जाअाेगे : दिल्ली के हास्य कवि अरुण जेेमिनी ने डिजिटल जमाने पर तंज सका, कहा- 21वीं सदीं में ढूंढते रह जाअाेगे, अांखाें में पानी, दादी की कहानी.. अर्थियाें काे कंधे ढूंढते रह जाअाेगे।

भारत बनाया था पटेल ने : देवास के वीररस के कवि शशिकांत यादव ने देश की वर्तमान हालात बताई। कहा, अाज तुम हाेते गांधी, बंदूक उठाते हाथ में, विश्वास तुम्हारा बढ़ जाता... अाजादी की भाेर हुई, राष्ट्रवादी ध्वज लहराया था पटेल ने... जम्मू कश्मीर पर कहा, धारा हटा दी, अाैर हटाएंगे.., लाहाैर करांची, ढाका पिंडी जरा धैर्य धरें, चप्पा-चप्पा घाटी पर तिरंगा फहराएंगे।

महिलाओं का सम्मान भी झलका कविता में : इंदाैर से अाईं कवियित्री डाॅ. भुवन माेहिनी ने शृंगार व हास्य रंग से रंगी कविताएं सुनाई। उन्होंने महिलाओं के सम्मान और सुरक्षा पर कहा, तनाव जब सिर पर हाे ताे सावन क्या बिगाड़ेगा, दुपट्टा हाे बदन पर जब दुशासन क्या बिगाड़ेगा। इसे सुनते ही पंडाल में बैठा हर शख्स सोचने पर विवश हो गया। इसके बाद इटावा से अाईं कवियित्री याेगिता चाैहान ने कहा कि कन्हैया कैसे खेलूं फाग नई नई मेरी रेशमी चुनर लग न जाएं दाग। महिलाअाें की ताकत पर उन्हाेंने कहा कि चूड़ी वाले काेमल हाथाें में तलवार सजती है..। पहली बार भागलपुर अाई याेगिता चाैहान ने कहा कि भूल गई मैं सारी बातें एक फंसाना याद रहा ..।


सीता आग में न जली...

इंदाैर के कवि अमन अक्षर ने कहा, जग की पहेलियाें का देके कैसा हल गए, लाेक के जाे प्रश्न थे शाेक में बदल गए... सीता अाग में न जली, राम जल में जल गये। मुंबई के कवि सुरेश मिश्रा, सुरेंद्र यादवेंद्र व सुरेश मिश्रा ने भी कविताएं पढ़ी। उद्घाटन मेयर सीमा साहा, डिप्टी मेयर राजेश वर्मा, शिक्षाविद् राजीवकांत मिश्रा, पूर्व जिप अध्यक्ष शंभू दयाल खेतान, जगदीशचंद्र मिश्र पप्पू, अश्विनी जोशी मोंटी, नरेशचंद्र मिश्र ने किया। मौके पर संयाेजक पवन कुमार बजाज, शिव कुमार केेजरीवाल, अालाेक बजाज माेंटी, जाॅनी संथालिया, रवि सर्राफ मौजूद थे।

खूब चले हंसगुल्ले, नेताअाें पर भी जमकर चले व्यंगवाण , देश के विभिन्न हिस्साें से अाए कवियाें ने देर रात तक बांधे रखा समां

मित्र बसंतगोष्ठी में कविताओं से श्रोताओं को कविता सुनातीं कवियित्री।

उद्घाटन करते मेयर सीमा साह, डिप्टी मेयर राजेश वर्मा, शिक्षाविद् राजीवकांत मिश्रा व अन्य।
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