वीसी के इस्तीफा से वेतन, छात्र संघ चुनाव व सेवांत लाभ के मामले फंसे

Bhagalpur News - टीएमबीयू में कुलपति की अनुपस्थिति से कई महत्वपूर्ण काम ताे रुक ही गए हैं, कई मामले भी फंस गए हैं। करीब अाठ साै...

Bhaskar News Network

Sep 14, 2019, 06:55 AM IST
Bhagalpur News - vc39s resignation cases of salary student union elections and terminal benefits stuck
टीएमबीयू में कुलपति की अनुपस्थिति से कई महत्वपूर्ण काम ताे रुक ही गए हैं, कई मामले भी फंस गए हैं। करीब अाठ साै छात्राें की डिग्री कुलपति के हस्ताक्षर के इंतजार में रुकी हुई है। पैट की तिथि तय नहीं हाे रही है। साइंस अाैर लाॅ के डीन के नाम तय नहीं हाे रहे हैं। बीपीएससी से नियुक्त वैसे असिस्टेंट प्राेफेसर जिनकी काउंसिलिंग हाे चुकी है, की पाेस्टिंग नहीं हाे रही है। दूसरी तरफ अब छात्र संघ चुनाव भी फंसता दिख रहा है। डीएसडब्ल्यू प्राे. याेगेन्द्र ने कहा था कि दशहरा की छुट्टियाें से पहले काॅलेज अाैर पीजी का चुनाव करा लिया जाएगा। लेकिन अब इसमें परेशानी हाे रही है। चुनाव की तिथि इसलिए तय नहीं हाे रही क्याेंकि कुलपति की अनुमति जरूरी है। अब प्रतिकुलपति या किसी दूसरे विवि के कुलपति काे प्रभार मिलता भी है ताे यह देखना हाेगा कि इन्हें वित्तीय अधिकार मिलता है या नहीं क्याेंकि चुनाव की तिथि तय हाेने के बाद इसके लिए काॅलेजाें काे राशि उपलब्ध करानी हाेगी। शिक्षकाें अाैर कर्मचारियाें के अगस्त का वेतन भी अटक गया है। सीनेट में कर्मचारियाें के प्रतिनिधि बलराम सिंह ने रजिस्ट्रार काे पत्र देकर त्याेहार अग्रिम तथा वेतन भुगतान करने की मांग की है क्याेंकि अागे दशहरा है। इधर जाे शिक्षक अाैर कर्मचारी 31 अगस्त या इससे पहले रिटायर हुए हैं उन्हें भी पेंशन, ग्रेच्यूटी अाैर सेवांत लाभ से जुड़े अन्य वित्तीय लाभ नहीं मिल रहे हैं। कहा जा रहा है कि सेवांत लाभ से जुड़े करीब दाे-ढाई कराेड़ का भुगतान हाेना है। बताया जा रहा है कि कुलपति की अनुपस्थिति में हुई पीजी जूलाॅजी के हेड, साेशल साइंस की डीन की नियुक्ति अाैर टीएनबी काॅलेज के 11 कर्मियाें काे काम से राेकने के निर्णय भी अंतिम नहीं हैं क्याेंकि इसके लिए कुलपति की अनुमति जरूरी है।

6 सितंबर को राजभवन पहुंचा था वीसी का इस्तीफा

नियमित या प्रभारी कुलपति बनने के लिए शिक्षकाें या याेग्य लाेगाें द्वारा एड़ी-चाेटी का जाेर लगाने के किस्से ताे कई हैं लेकिन इस पद पर रहते हुए खुद इस्तीफा देने के मामले बहुत कम हैं। डाॅ. विभाष चंद्र झा वर्ष 2000 के बाद से अब तक इस कड़ी के तीसरे उदाहरण हैं। डाॅ. झा ने टीएमबीयू के कुलपति के पद पर 29 जुलाई काे याेगदान दिया था अाैर 6 सितंबर काे उन्हाेंने इस्तीफा दे दिया। हालांकि उनके इस्तीफे की तिथि काे लेकर कई बातें हाेती रहीं। कभी 23 अगस्त ताे कभी 27 अगस्त काे इस्तीफा देने की बात सामने अाती रही। लेकिन उनका इस्तीफा कुलाधिपति के टेबल पर 6 सितंबर काे पहुंचा था।

2004 में तत्कालीन कुलपति पतंजलि ने भी दे दिया था इस्तीफा

जानकार बताते हैं कि डाॅ. झा वर्ष 2000 के बाद टीएमबीयू के कुलपति के पद से इस्तीफा देने वाले दूसरे नियमित अाैर प्रभारी कुलपति मिलाकर तीसरे कुलपति हैं। इनसे पहले 2004 में तत्कालीन कुलपति पीसी पतंजलि ने भी नियमित कुलपति के पद से इस्तीफा दे दिया था। बताया गया कि डाॅ. झा की तरह ही उन्हाेंने भी विवि मुख्यालय से बाहर रहते हुए इस्तीफा दिया था। इसके बाद वर्ष 2009 के आसपास प्रतिकुलपति रहे डाॅ. सैयद एहतशामुद्दीन काे जब कुलपति का प्रभार दिया गया था ताे उन्हाेंने प्रतिकुलपति के पद से इस्तीफा दे दिया था अाैर प्रभारी कुलपति के पद पर याेगदान ही नहीं किया था।

नियमित या प्रभारी कुलपति बनने के लिए शिक्षकाें या याेग्य लाेगाें द्वारा एड़ी-चाेटी का जाेर लगाने के किस्से ताे कई हैं लेकिन इस पद पर रहते हुए खुद इस्तीफा देने के मामले बहुत कम हैं। डाॅ. विभाष चंद्र झा वर्ष 2000 के बाद से अब तक इस कड़ी के तीसरे उदाहरण हैं। डाॅ. झा ने टीएमबीयू के कुलपति के पद पर 29 जुलाई काे याेगदान दिया था अाैर 6 सितंबर काे उन्हाेंने इस्तीफा दे दिया। हालांकि उनके इस्तीफे की तिथि काे लेकर कई बातें हाेती रहीं। कभी 23 अगस्त ताे कभी 27 अगस्त काे इस्तीफा देने की बात सामने अाती रही। लेकिन उनका इस्तीफा कुलाधिपति के टेबल पर 6 सितंबर काे पहुंचा था।

‘इस्तीफा बताता है कि मूल्य अभी भी बचा हुअा है’...

भागलपुर|
टीएमबीयू के लिए किसी नियमित कुलपति की नियुक्ति के एक माह में ही इस्तीफा देने का संभवत: यह पहला मामला है। उनके इस्तीफे के पीछे कई कयास लगाए जा रहे है। लेकिन एक अाैर कारण साेशल मीडिया पर वायरल हाे रहा है। हालांकि यह कारण इशारे में बताया गया है। विवि के एक शिक्षक ने अपने फेसबुक वाल पर पाेस्ट किया है- डाॅ. वीसी झा का कुलपति के पद से इस्तीफा देना बताता है कि हमारे समाज में मूल्य अब भी बचा हुअा है। उन्हाेंने कुलपति के इस्तीफे काे दुखद बताया है। वैसे कहा यह भी जा रहा है कि शांति निकेतन जैसे विवि से अाए डाॅ. झा टीएमबीयू के माहाैल में खुद काे ढाल नहीं पाए। लेकिन यह भी सच है कि बीते एक महीने में राजभवन से लेकर विश्वविद्यालयाें तक में तेजी से कई बदलाव हुए हैं। डाॅ. झा की नियुक्ति पूर्व कुलाधिपति लाल जी टंडन के समय हुई थी।

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