प्राेफेसर से अागे का पद चाहिए ताे कराना हाेगा शाेध

Bhagalpur News - प्राेन्नति दर प्राेन्नति पाते हुए जब एक वक्त एेसा अाता है कि संबंधित पद पर अाैर काेई प्राेन्नति नहीं बचती है। एेसे...

Bhaskar News Network

Oct 13, 2019, 06:51 AM IST
Bhagalpur News - want post of professor from professor
प्राेन्नति दर प्राेन्नति पाते हुए जब एक वक्त एेसा अाता है कि संबंधित पद पर अाैर काेई प्राेन्नति नहीं बचती है। एेसे में कई शिक्षक प्राेफेसर बनने के बाद बेसिक काे छाेड़कर दूसरी काेई गतिविधि में ध्यान नहीं देते हैं। केवल कक्षा लेने व परीक्षा ड्यूटी पर ही सिमट जाते हैं। वे शाेध कराना तक बंद कर देते हैं। क्याेंकि इनके लिए शाेध तभी तक महत्वपूर्ण था जब तक इन्हें प्राेन्नति चाहिए थी। टीएमबीयू में लगभग यही हालत है। लेकिन अब यूजीसी के नए रेगुलेशन में इस पद से अागे सीनियर प्राेफेसर काे भी शामिल किया गया है अाैर इसके लिए प्राेफेसर काे शाेध कराना अनिवार्य हाेगा।

भुस्टा के अध्यक्ष प्राे. डीएन राय ने बताया कि यूजीसी ने नए रेगुलेशन में सीनियर प्राेफेसर काे शामिल किया है। इसके लिए शाेध अनिवार्य कर दिया है। एेसे में जाे प्राेफेसर शाेध में रुचि नहीं लेते थे, वे अब शाेध से फिर जुड़ सकेंगे।

टीएमबीयू में कई शिक्षक प्राेफेसर बनने के बाद नहीं करा रहे शाेध

यूजीसी के नए रेगुलेशन में सीनियर प्राेफेसर का भी पद किया गया है शामिल

नए रेगुलेशन से छात्राें की परेशानी दूर हाेगी

एेसे प्राेफेसर जाे शाेध नहीं करा रहे हैं, दरअसल विवि अाैर छात्राें के लिए परेशानी से कम नहीं हैं। इनके पास रिक्तियां हैं, लेकिन ये शाेध नहीं कराते हैं। उधर यूजीसी ने नई व्यवस्था की है कि शाेध की जितनी रिक्तियां हाेंगी, उतने के लिए ही पीएचडी एडमिशन टेस्ट लिया जाएगा। टीएमबीयू में पीएचडी एडमिशन टेस्ट में हाे रही देरी की एक वजह यह भी है।

ताे अब नए शाेधार्थियाें काे नहीं मिलेंगे गाइड

दूसरी तरफ पूर्व में जाे छात्र पीएचडी एडमिशन टेस्ट पास कर चुके हैं, उन्हें भी गाइड चाहिए। अगस्त में हुई पीजीअारसी की बैठक में पूर्व की शाेध काे अनुमति देने के बाद विवि ने बची हुई सीटाें की जानकारी विभागाें से मांगी थी। एेसे में अगर प्राेेफेसर अपनी रिक्ति की जानकारी नहीं देंगे ताे अब जाे छात्र पैट पास करेंगे, उनमें से कई काे गाइड नहीं मिलेंगे।

प्राेबेशनकाल में शाेध नहीं करा सकते असि. प्राेफेसर

एक तरफ प्राेफेसर शाेध नहीं करा रहे, दूसरी तरफ प्राेबेशन पीरियड में नए असिस्टेंट प्राेफेसर रिसर्च नहीं करा सकते हैं। प्रोवीसी प्राे. रामयतन प्रसाद ने बताया कि यह विवि प्रशासन पर निर्भर है कि नए शिक्षकाें का प्राेबेशन पीरियड 2 रखे या 1 साल। भुस्टा अध्यक्ष ने बताया कि यूजीसी ने 1 साल का प्राेबेशन पीरियड तय किया है जबकि रेगुलेशन में 2 साल है।

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