इन आंसुओं का दोषी कौन!

Bhagalpur News - भागलपुर, मंगलवार, 10 दिसंबर, 2019 फैक्ट्री मालिक समेत दोनों लोग 14 दिन की रिमांड पर भेजे गए सभी 43 मृतकों की हुई पहचान,...

Dec 10, 2019, 06:51 AM IST
Bhagalpur News - who is guilty of these tears
भागलपुर, मंगलवार, 10 दिसंबर, 2019

फैक्ट्री मालिक समेत दोनों लोग 14 दिन की रिमांड पर भेजे गए

सभी 43 मृतकों की हुई पहचान, इनमें से 37 मृतक बिहार के

भास्कर न्यूज|नई दिल्ली

दिल्ली की रानी झांसी रोड के पास अनाज मंडी की फैक्ट्री में आग में मारे गए 43 लाेगाें में से 34 की मौत लोकनायक जयप्रकाश नारायण अस्पताल में हुई। फिलहाल सभी मृतकों की शिनाख्त कर ली गई है। मृतकों में 37 लोग बिहार के रहने वाले हैं। अस्पताल में कुल 54 लोगों को लाया गया, जिनमें से 14 लोग अभी भी भर्ती हैं। मृतकों और घायलों में अधिकतर बिहार के लोग हैं।

इस बीच, दिल्ली की तीस हजारी अदालत ने फैक्ट्री मालिक रेहान और उसके पार्टनर फुरकान को 14 दिन रिमांड पर भेज दिया। उधर, जांच कर रही पुलिस की क्राइम ब्रांच ने मौके पर जाकर 3डी लेजर स्कैन की मदद से घटना का रूपांतरण किया। इस टीम के अलावा फोरेंसिक साइंस के विशेषज्ञ भी मौके पर पहुंचे। इससे पहले खबर आई थी कि इसी इमारत में सोमवार सुबह फिर आग लग गई। वहां से धुआं निकलने के बाद दमकल की 4 गाड़ियां मौके पर पहुंचीं। हालांकि इस आग को लेकर अधिकारियों ने प्रतिक्रिया नहीं दी है। इधर केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने मीडिया से बात करते हुए कहा कि दिल्ली सरकार के जिम्मेदारी न निभाने की वजह से हादसा हुआ। एमसीडी की जिम्मेदारी पर पुरी बोले- बिल्डिंग वैध थी या अवैध, जिस तरह वहां तारों का जाल फैला है, उस पर दिल्ली सरकार की एंजेसियों की नजर क्यों नहीं थी।

इनलू की बेटी ने कहा था-अब काम मत करो, वह कुछ दिन और करना चाहते थे

इनूूल (60) सीतामढी के रहने वाले थे। वह अपने दामाद अब्बास (33) के साथ मजदूरी कर परिवार का भरण पोषण कर रहे थे। इनूल की 5 बेटियां है। छोटी बेटी ने 15 दिन पहले मिलने पर उनसे कहा था कि अब शरीर जबाव देने लगा है,अब काम मत करो। लेकिन दामाद के सहयोग से वह काम कर पा रहे थे। कुछ दिन और काम करने को कहा था। देर रात कीरब 2.30 बजे तक उन्होंने काम किया था। बाद में एक ही बिस्तर पर सो गए। शोर शराबे में दामाद ने उठकर ससुर को जगाने की कोशिश की थी लेकिन उठ ही नहीं पाए। हादसे वाले दिन में दामाद और ससुर ने आखिरी सांस एक साथ ली। इनूूल की अभी तक तीन बेटियों की शादी हुई है, दो की बाकी थी। एक बेटी के लिए रिश्ता देख लिया था, लेकिन पक्का नहीं किया था। मार्च/अप्रैल तक घर जाना था।

जैसा इनलू के रिश्तेदार आदाब ने बताया

3 भाषाएं | 12 राज्य

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नाॅर्थ एमसीडी की नाक के नीचे चलती रही अवैध फैक्ट्री, सरकारी विभागों ने भी आंख मूंदकर दिए कनेक्शन, सोती रही पुलिस

थम नहीं रहा दर्द : किसी ने बेटा खोया, किसी ने पिता, किसी का सब उजड़ा

43 मौतों का जिम्मेदार किसे ठहराया जाए, आप खुद तय कीजिए


इलाके में किसी भी तरह की अवैध फैक्ट्री न चले यह सुनिश्चित करना।

क्या नहीं किया| अवैध फैक्ट्रियों को सील किया जाना चाहिए। मगर एमसीडी की नाक के नीचे अवैध फैक्ट्री चलती रही।

गांव में तीन महीने पहले ही बेटी ने जन्म लिया था, उसे भी नहीं देख पाया साजिद

साजिद घर से 4 महीने पहले ही दिल्ली अाया था। लेकिन फैक्ट्री में काफी दिनों से काम कर रहा था। वह परिवार में अकेला कमाने वाले था। परिवार में प|ी, दो बेटियां एक बेटा है। बेटी को देखने के लिए फरवरी महीने में घर जाना था। हादसे के समय उसने कमरे से बाहर निकलने के लिए खिड़की को खोलने की बहुत कोिशश की, लेकिन खुल नहीं पाई। फिर धुंए की वजह से बेहोश होकार वहीं गिर गया। बाद में उसे जब अस्पताल लाया गया तो उसने दम तोड़ दिया। साजिद की प|ी सहनाज ने 3 महीने पहले ही बेटी गुलनाज को जन्म दिया था। लेकिन साजिद बेटी को देखे बिना है अग्निकांड हादसे का शिकार हो गए। एक सप्ताह पहले फोन कर कहा था कि अभी घर की आर्थिक हालत ठीक नहीं है। कुछ रुपए इक्टठा करके फरवरी में घर आएगा।

जैसा साजिद के रिश्तेदार बाजिद अली ने बताया


बिजली विभाग| सारे कागजात होने पर बिजली के रिहायशी और कॉमर्शियल कनेक्शन देना।

क्या नहीं किया|रिहायशी इलाके में फैक्ट्री चलाना अवैध है तो बिजली कनेक्शन कैसे दिया गया। अगर कनेक्शन रिहायशी था और गतिविधि कमर्शियल हो रही है तब भी ध्यान देना चाहिए था। मगर नजरअंदाज किया गया।

दर्द की एक और कहानी... मेरा भाई मेरी अांखों के सामने जलकर मर गया

अपने भाई ग्यासुद्दीन के साथ एक ही कमरे में सो रहा था। मैं खिड़की के पास था, वाे 10 फीट दूर गेट के पास। दोनों के बीच सामान रखा था। सुबह करीब 4.45 बजे धुंए व चीखों की आवाज से हड़बड़ी में उठा, पूरे कमरे में आग लग हुई थी। हमारे बीच में रखा सामान जल रहा था। अचानक भाई ग्यासुददीन की चीखें सुनाई दी। मैंने कहा-खिड़की के पास आ जा, बचा लूंगा। गेट खुल नहीं पा रहा था, जिससे वह निकल सके। लपटें तेज थीं, मेरी आंखों के सामाने भाई जिंदा जल गया।

- परवेज(हादसे में बचा चश्मदीद)

मानवाधिकार आयोग ने दिल्ली सरकार, नगर निगम, पुलिस कमिश्नर को नोटिस दिया

अग्निकांड मामले में राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने सोमवार को दिल्ली सरकार, नई दिल्ली नगर निगम और पुलिस कमिश्नर को नोटिस जारी किया है। आयोग ने इस मामले में छह हफ्ते में रिपोर्ट मांगी है। इसमें दोषी अधिकारियों पर कार्रवाई और पीड़ितों या मृतकों के परिजन की मदद का ब्योरा भी देना होगा।


इलाके की चलने वाली अवैध गतिविधियों पर नजर रखना।

क्या नहीं किया| अवैध फैक्ट्री की शिकायत करनी चाहिए थी लेकिन किसी को शिकायत नहीं दी गई।

मेरे पिता मुझे इंजीनियर बनाना चाहते थे, उनका सपना जरूर पूरा करूंगा

मेरे पिता मुझे इंजीनियर बनाना चाहते थे। वे जब भी मोबाइल पर बात करते तो खूब पढ़ाई करने के लिए कहते थे। पिता जी जब भी घर आते थे तो मेरे लिए ट्रेन, हवाई जहाज जैसे खिलौने लेकर आते थे। अब मेरा एक मात्र मकसद इंजीनियर बन अपने पिता का सपना साकार करना है। पिता के साथ काम करने वाले साथी ने बताया था कि हादसे वाली रात डेढ़ बजे तक काम किया। फिर खुद ही खाना बनाकर खाया था। 2.30 बजे सो गए थे। सोने से पहले कहा था कल छुटटी है, बेटे के लिए लैदर की जैकेट लानी है। कई साथी देर रात तक करते रहे। कमरे के सभी साथी तीन बजे तक सो गए थे। आग लगने पर चीखें शेार शराबे में कई साथी ने झकझोर कर पिता को उठाया था। उठाने की कोशिश की थी। कमरे में धुंआ अधिक होने पर उठ ही नहीं पाए।

जैसा इकरान के बेटे अली अहमद ने बताया

समस्तीपुर के मरनेवालों की संख्या 14 हुई हरिपुर का इफ्तकार ही चलाता था फैक्ट्री

भास्कर न्यूज | सिंघिया (समस्तीपुर)

दिल्ली बैग फैक्ट्री हादसा में सिंघिया प्रखंड के मरने वालों की संख्या दस से बढ़ कर 14 हो गई है। सभी शवों की पहचान सिंघिया से दिल्ली पहुंचे लोगों ने की है। सोमवार को पहचान होने वाले शवों में लिलहौल पंचायत के हरिपुर निवासी मो. फारूक के पुत्र मो. नौशाद, मो. मोती के पुत्र मो. छेदी व बेलाही गांव के मो. हासिम का पुत्र पुत्र एहसान (16 वर्ष) व रसूला खातून का नाती महताब (12 वर्ष) शामिल हैं। इसके साथ ही सिंघिया प्रखंड के लिलहौल, फुलहारा, निरपुर भररिया पंचायत मिलाकर कुल 14 लोगों की मौत हो चुकी है। रविवार को मो. मोसिन का पुत्र मो. साजिद, मो. मंसूर का पुत्र मो. सदरे, मो. उल्फत का पुत्र साजिद व वजीर, मो. हसन का पुत्र अताबुल, मो. रजाक का पुत्र मो. अकबर, मो. आलम का पुत्र गुड्डू, ब्रह्मपुर निवासी मो. एनुल का पुत्र सहमत, मो. इदरीश का पुत्र महबूब व बेलाही गांव निवासी सब्बीर का पुत्र खालिद की पहचान हुई थी। दिल्ली में जिस बैग फैक्ट्री में आग लगी, उसका मालिक हरिपुर का ही इफ्तकार है। उसकी फैक्ट्री में हरिपुर, ब्रह्मपुरा और बेलाही गांव के लगभग तीन दर्जन लोग काम करते थे। इनमें 14 लोगों की मौत हो चुकी है। यह जानकारी हरिपुर की रसूला खातून ने दी। इस घटना में रसूला के नाती महताब की भी मौत हो गई है।

ग्राउंड जीरो से रिपोर्ट
सीलिंग न हो जाए इसलिए फैक्ट्री मालिकों ने आग बुझाने वाले सिलेंडर रखवाए, सीढ़ियां साफ करवाई, काम कुछ दिन बंद रखेंगे

नीरज आर्या|नई दिल्ली

अनाज मंडी सदर बाजार इलाके में आग की घटना के बाद सोमवार को तकरीबन सभी फैक्टिरियां बंद मिलीं। दरवाजे और शटर पर ताले लगे हुए थे और वहां काम करने वाले लेबर गायब थे। कार्रवाई के डर से लोगों ने बचाव के तरीकों पर काम करना भी शुरू कर दिया। एकदम से उन्हें नियम कायदे कानून याद आ गए। किसी फैक्टरी के मालिक ने आग बुझाने वाला नया सिलेंडर लाकर रख दिया तो कहीं पर सीढि़यों पर रखे सारे सामान को वहां से हटाया गया। अब लोगों को लग रहा है इस क्षेत्र पर अब सभी जांच एजेन्सियों की नजर है।

दर्जनभर ग्रामीण रविवार को ही हो गए थे दिल्ली रवाना

ग्रामीणों ने बताया कि हादसे की सूचना के बाद गांव के दर्जनभर लोग रविवार को ही विभिन्न माध्यमों से दिल्ली रवाना हो गए थे। दिल्ली पहुंच कर लोगों ने सभी शवों की पहचान की। जिसके बाद दिल्ली पुलिस सभी शव परिजनों को सौंप दिया। हादसे के शिकार रोसड़ा विधानसभा क्षेत्र के सिंघिया प्रखंड के सभी लोगों के होने के कारण सोमवार को रोसड़ा के विधायक डॉ अशोक कुमार दिल्ली में परिजनों से मिलने पहुंचे। दिल्ली से फोन पर विधायक ने बताया कि सभी शव दिल्ली से समस्तीपुर के लिए रवाना कर दिया गया है। मंगलवार शाम तक शव समस्तीपुर पहुंचेगा।

पुलिस ने जो एफआईआर लिखी, उसके मुताबिक इमारत में न आपातकालीन दरवाजा था और न पैनिक अलार्म





दामाद और 12 साल का बेटा-दोनों नहीं रहे, दो बेटे अस्पताल में भर्ती हैं

मेरा 12 साल का बेटा आदिल 2 साल पहले ही दिल्ली पढ़ाई के लिए आया था। दो बेटे परवेज और गुलरेज यहां पहले से काम करते थे। उनके साथ ही वह रहता था। मेरा 28 साल का दामाद इकलाक यहां डेढ़ महीने पहले ही काम पर आया था। उसके चार बच्चे हैं तीन लड़की और एक लड़का। रविवार सुबह बड़े बेटे परवेज का फोन आया कि आग लग गई है बचने का रास्ता नहीं है। हमने तुरंत ट्रेन पकड़ी और यहां आ गए। बेटे आदिल और दामाद इकलाक की मौत हो गई है। छोटे बेटे और दामाद की मौत के बारे में सुनकर सभी बहुत परेशान हैं। बेटे परवेज और गुलरेज दोनों घायल हैं और लोकनायक अस्पताल में भर्ती हैं।

मोहम्मद हकीम, बिसनपुर, अलफगंज, दरभंगा

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