सुख-समृद्धि व अखंड सौभाग्य के लिए महिलाओं ने की गणगौर पूजा
सोलह दिनाें तक होने वाली गणगौर पूजा होली के दूसरे दिन यानी 11 मार्च से शुरू हो गई है। 27 मार्च को शुक्ल पक्ष तीज को व्रत के बाद गणगौर को विदाई दी जाएगी। मारवाड़ी समाज की कुंवारी लड़कियां व नवविवाहिताएं सुख-समृद्धि के लिए भगवान शिव-पार्वती (गणगौर) की पूजा-अर्चना करती हैं। इसमें होलिका की राख से गणगौर तैयार करती हैं और गोबर के आठ पीलिया गोल-गोल बनाकर वैदिक विधि-विधान से पूजा कर रहीं हैं।
शांता देवी झुनझुनवाला, मधु अग्रवाल ने बताया कि गणगौर की पूजा राजस्थान में खास तौर पर की जाती है लेकिन अब यह देश के अन्य क्षेत्रों में भी हर्षोल्लास के साथ मनाया जाता है। मिनी राजस्थान के नाम से प्रसिद्ध भागलपुर जिले में लगभग 50 हजार मारवाड़ी समाज की संख्या है। मंदरोजा चौक के समीप की रहने वाली मारवाड़ी समाज की महिलाओं ने बताया कि गणगौर पूजा सुख-समृद्धि व अखंड सौभाग्य का प्रतीक माना जाता है। उन्होंने बताया कि पहली गणगौर पूजा मायके में की जाती है। कुंवारी लड़कियां भी अच्छे पति की कामना को लेकर गणगौर पूजन करती हैं। डोकानिया धर्मशाला के समीप रहने वाली नव विवाहिता नेहा तीसरी बार गणगौर पूजा को लेकर उत्साहित नजर आयी। उन्होंने बताया कि यह पर्व पति के दीर्घायु व परिवार की सुख-समृद्धि के लिए किया जाता है।