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जिले में 60 मॉडल आंगनबाड़ी केन्द्रों का होगा निर्माण, सभी सुविधाओं से होंगे लैस
महिला विकास निगम द्वारा बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ अभियान के तहत जागरूकता फैलाने के लिए मिली राशि का सही तरीके से उपयोग नहीं किया गया है। गुरुवार को आईसीडीएस की समीक्षा के दौरान डीएम योगेन्द्र सिंह ने निगम के जिला योजना प्रबंधक से स्पष्टीकरण पूछा है। साथ ही उन्होंने कहा है कि शिशु मृत्यु दर में कमी लाने के लिए आंगनबाड़ी केन्द्र पर अन्नप्राशन दिवस का आयोजन किया जाता है। उन्होंने कहा कि इस मौके पर बच्चों के घर से लाये गये खाद्य पदार्थों की सिर्फ प्रदर्शनी न लगाये बल्कि सेविका के माध्यम से बच्चों को खिलाएं। सभी सीडीपीओ और एलएस को महादलित टोलों के आंगनबाड़ी केन्द्रों पर विशेष रूप से अन्नप्राशन दिवस का आयोजन सुनिश्चित करने का निर्देश दिया गया है। बैठक में आईसीडीएस डीपीओ रश्मि सिन्हा, महिला विकास निगम के परियोजना प्रबंधक ब्रजेश चन्द्र सुधाकर, स्वस्थ भारत प्रेरक श्रुति प्रिया, केयर इंडिया के प्रतिनिधि उपस्थित थे।
हुई कार्रवाई : मुख्यमंत्री कन्या उत्थान योजना के तहत बिहारशरीफ शहरी और ग्रामीण परियोजनाओं में शिविर के माध्यम से लक्ष्य से कम आवेदन सूचित किये गये। दोनों सीडीपीओ को जल्द से जल्द शत प्रतिशत लक्ष्य प्राप्त करने को कहा गया है। साथ ही आवेदनों की स्थिति की समीक्षा में बिहारशरीफ ग्रामीण परियोजना की उपलब्धि मात्र 33 प्रतिशत पायी गयी। डीएम ने सीडीपीओ से स्पष्टीकरण की मांग करते हुए वेतन बंद करने का निर्देश दिया है।
पोषण पखवारा के दौरान प्रत्येक प्रखंड में सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करने वाली एक एक टीम को 50 हजार का पुरस्कार दिया जायेगा जो टीम के सदस्यों के बीच बराबर बराबर बटेगी। उन्होंने टीम का चयन विभागीय मानक के आधार पर पारदर्शी तरीके से सुनिश्चित करने को कहा है। साथ ही बेहतर प्रदर्शन करने वाली सेविका और सहायिका को भी प्रोत्साहन राशि का भुगतान होना है। डीएम ने बताया कि प्रत्येक माह में लगातार 21 कार्य दिवस तक खुलने वाले आंगनबाड़ी केन्द्र तथा कम से कम 60 प्रतिशत ग्रोथ मॉनिटरिंग एवं गृह भ्रमण करने वाली सेविका को संबंधित माह में 500 तथा सहायिका को 250 रुपये का भुगतान किया जायेगा।
सेविका और सहायिका की होगी ग्रेडिंग
सेविका और सहायिका की क्षमता और कार्य कुशलता के आधार पर ग्रेडिंग होगी। डीएम ने निर्देश दिया है कि हाई ग्रेडिंग वाली सेविका को समीप के कम ग्रेडिंग वाली सेविका के साथ अटैच करें । साथ ही सभी डीपीओ को अति कुपोषित बच्चों को चिन्हित कर पोषण पुनर्वास केन्द्र में भेजने का निर्देश दिया गया है। डीएम ने कहा है कि यदि पारिवारिक कारण से अभिभावक बच्चों को एनआरसी में भेजने असमर्थ हैं तो संबंधित सेविका के माध्यम से उनके घर में ही उनके फूड हैबिट में बदलाव लायें। कंगारू मदर केयर के बारे में बताएं।
मिलेगा पुरस्कार
8 मॉडल आंगनबाड़ी केन्द्रों का काम पूरा: जिले में 60 मॉडल आंगनबाड़ी केन्द्र बनाने का लक्ष्य है। जहां सभी जरूरी सुविधाएं उपलब्ध रहेगी। आवश्यकतानुसार भवन की साधारण मरम्मति कर उसका आकर्षक ढंग से रंग रोगन कराया जाना है। इन मॉडल केन्द्रों में बच्चों के बैठने के लिए टेबुल, कुर्सी, टीवी, इनवर्टर आदि उपलब्ध कराये जायेंगे। जिले में अभी तक 8 मॉडल आंगनबाड़ी केन्द्रों का काम पूरा कर लिया गया है। डीएम ने जल्द से जल्द सभी चिन्हित मॉडल आंगनबाड़ी केन्द्रों का काम पूरा करने का निर्देश दिया है। उन्होंने कहा कि इसकी जांच प्रखंड के वरीय पदाधिकारियों के माध्यम से करायी जायेगी। सीडीपीओ को इस कार्य के लिए एजेंसी बनाया गया है। उन्होंने नवनिर्मित आंगनबाड़ी केन्द्र भवन को अविलंब हैंडओवर करने का निर्देश दिया है।
बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ अभियान के लिए मिले फंड का सही से नहीं हुआ उपयोग