मातृभाषा का मजाक नहीं उड़ायें अपनी संस्कृति को बचाएं

Bihar Sharif News - शहर के भैसासुर मोहल्ले में साहित्यिक मंडली शंखनाद नालंदा के तत्वावधान में अंतरराष्ट्रीय मातृभाषा दिवस मनायी...

Feb 22, 2020, 07:00 AM IST
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शहर के भैसासुर मोहल्ले में साहित्यिक मंडली शंखनाद नालंदा के तत्वावधान में अंतरराष्ट्रीय मातृभाषा दिवस मनायी गयी। कार्यक्रम की अध्यक्षता साहित्यकार डा. लक्ष्मीकांत सिंह ने की। इस मौके पर श्री सिंह ने कहा कि कोई भी भाषा जानना और उसमें महारत हासिल करना बुरा नहीं है, लेकिन किसी दूसरी भाषा में महारत हासिल करने के लिए अपनी मातृभाषा का अच्छा ज्ञान होना जरूरी है। कोई इंसान अपनी संस्कृति और सभ्यता से अलग होकर अच्छा लेखक या कलाकार नहीं बन सकता। संस्कृति के संस्कार मातृभाषा से मिलते हैं और मातृभाषा के संस्कार हमें अपनी संस्कृति जोड़ता है। मातृभाषा में अपनी बात अच्छी तरह कह और लिख सकते हैं, इसलिए इससे हमारे अंदर आत्मविश्वास विकसित होता है। रवींद्रनाथ टैगोर ने मातृभाषा को मां की तरह ही आदरणीय और भारतेंदु हरिश्चंद्र ने उन्नति के लिए मातृभाषा को जरूरी माना है। 17 नवंबर 1999 को यूनेस्को ने हर साल अंतरराष्ट्रीय मातृभाषा दिवस 21 फरवरी को मनाने की घोषणा की। सचिव साहित्यसेवी राकेश बिहारी शर्मा ने कहा कि विश्व में भाषाई व सांस्कृतिक विविधता व बहुभाषिता को बढ़ावा देने और विभिन्न मातृभाषाओं के प्रति जागरुकता लाने के उद्देश्य से हर साल 21 फरवरी को मातृभाषा दिवस मनाया जाता है। पहले विद्यालयों में अंग्रेजी शिक्षा इतना जोर-शोर से नहीं पढ़ाया जाता था, वहीं आज सिर्फ अंग्रेजी की मांग बढ़ने के कारण देश के बड़े-बड़े विद्यालयों के बच्चे हिंदी में पिछड़ते जा रहे हैं।

हिन्दी दुनिया में सबसे ज्यादा बोले जाने वाली भाषा : शायर वेनाम गिलानी ने कहा कि बचपन से ही घरों में मगही, हिंदी भाषा का ज्ञान दिया जाता है। हिंदी दुनिया में सबसे ज्यादा बोली जाने वाली भाषा में से एक है। 21 फरवरी 1952 को ढाका यूनिवर्सिटी के विद्यार्थियों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने तत्कालीन पाकिस्तान सरकार की भाषायी नीति का कड़ा विरोध जताते हुए अपनी मातृभाषा का अस्तित्व बनाए रखने के लिए विरोध प्रदर्शन किया। साहित्यकार डा. आनंद वर्द्धन ने इस दौरान कहा कि जहां-तहां मगध साम्राज्य रहा दुनियां में मगही भाषा और शब्दों का प्रसार हुआ और अभी भी बुद्ध अनुयायी देशों में इसका शब्द है जिसे भारतीय भाषा के अनुसूची में आना चाहिए। साहित्यकार उमेश प्रसाद उमेश ने कहा कि देश में अंग्रेजी बोलने वालों को अच्छी नजर से देखी जाती है। लोग आज अंग्रेजी के पीछे भाग रहे हैं। देश में अंग्रेजी का प्रचलन बढ़ता ही जा रहा है। कुछ लोग मगही बोलना शर्म और अंग्रेजी भाषा बोलना शान समझते हैं। समाजसेवी चन्द्र उदय कुमार मुन्ना ने कहा कि जब भारत में रहते हुए भी हिंदी-मगही का प्रयोग नहीं करेंगे तो क्या अमेरिका व अन्य देशों के नागरिक प्रयोग करने के लिए आयेंगे।

कार्यक्रम में ये थे शामिल

शिक्षक नेता सुरेंद्र प्रसाद, प्रो. सूर्य कुमार सरल, समाजसेवी धीरज कुमार, राम प्रह्लाद सिंह उर्फ बौआजी, अनिरुद्ध कुमार, कवि मिथिलेश प्रसाद, इतिहासकार तुफैल अहमद खां सूरी, प्रो. जितेंद्र कुमार सिंह, गजलकार नवनीत कृष्ण, मुस्कान चांदनी, कवि अमन कुमार, राजीव कुमार शर्मा, कवयित्री प्रियार|म, संजय शर्मा, केदार प्रसाद मेहता आदि उपस्थित थे।

कार्यक्रम में शामिल साहित्यकार।

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