भारत के निर्माण में डॉ. राजेंद्र प्रसाद का योगदान अहम

Bihar Sharif News - नव नालंदा महाविहार के संस्थापक प्रथम राष्ट्रपति देशर| डॉ. राजेंद्र प्रसाद की जयंती के अवसर पर नव नालंदा महाविहार...

Dec 04, 2019, 09:27 AM IST
नव नालंदा महाविहार के संस्थापक प्रथम राष्ट्रपति देशर| डॉ. राजेंद्र प्रसाद की जयंती के अवसर पर नव नालंदा महाविहार में दो दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी का आयोजन किया गया। संगोष्ठी का शुभारंभ डा. राजेंद्र प्रसाद की पौत्री डा. तारा सिन्हा द्वारा किया गया। इस मौके पर दीप प्रज्जवलन के बाद बौद्ध भिक्षुओं ने मंगल पाठ किया। तत्पश्चात आगत अतिथियों का स्वागत करते हुए डीन एकेडमिक डा. श्रीकांत सिंह ने कहा कि आज का दिन नव नालंदा महाविहार के लिए ऐतिहासिक है। संगोष्ठी में आईसीपीआर के अध्यक्ष एवं पटना विश्वविद्यालय के दर्शन विभाग के पूर्व अध्यक्ष डा. रमेश चंद सिन्हा ने कहा कि डा. राजेंद्र प्रसाद राष्ट्रीयता की भावना से ओतप्रोत थे। उन्होंने अपनी पुस्तक ‘’इंडिया डिवाइडेड’’ में भारत के विभाजन को अनुचित बताया है। धर्म के आधार पर देश विभाजन के खिलाफ एवं ईमानदार, कर्तव्यनिष्ठ, समर्पित कार्यकर्ता थे।

आधुनिक भारत के निर्माता थे राजेन्द्र प्रसाद

डॉ. राजेंद्र प्रसाद की पौत्री ने कहा कि यहां की धरती पर पहले भी आ चुकी हूं। इस बार इस संस्थान में आकर खुशी हो रही है। आज समाज में प्रत्येक कार्य को लाभ हानि की दृष्टि से देखा जाता है। इतिहास को तोड़ मरोड़ कर प्रस्तुत किया जा रहा है। डा. राजेंद्र प्रसाद को इतिहास में उचित सम्मान नहीं मिला। जबकि नए भारत के निर्माण में उनके योगदान को भुलाया नहीं जा सकता है। सरकार द्वारा उनकी उपेक्षा हुई है। नव नालंदा महाविहार उनको याद करके नेक काम कर रहा है। उन्होंने कहा कि राजेन्द्र बाबू आधुनिक भारत के निर्माता थे। सारा जीवन देश हित में लगा दिया। गांधीजी के सचिव एवं सहायक थे। उनको खादी और हिंदी से भी बहुत प्रेम था। उन्होंने 1934 में बिहार के भूकंप पीड़ितों की सहायता की।

नव नालंदा महाविहार में आयोजित सेमिनार में शामिल अतिथि।

सिटी रिपोर्टर|सिलाव

नव नालंदा महाविहार के संस्थापक प्रथम राष्ट्रपति देशर| डॉ. राजेंद्र प्रसाद की जयंती के अवसर पर नव नालंदा महाविहार में दो दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी का आयोजन किया गया। संगोष्ठी का शुभारंभ डा. राजेंद्र प्रसाद की पौत्री डा. तारा सिन्हा द्वारा किया गया। इस मौके पर दीप प्रज्जवलन के बाद बौद्ध भिक्षुओं ने मंगल पाठ किया। तत्पश्चात आगत अतिथियों का स्वागत करते हुए डीन एकेडमिक डा. श्रीकांत सिंह ने कहा कि आज का दिन नव नालंदा महाविहार के लिए ऐतिहासिक है। संगोष्ठी में आईसीपीआर के अध्यक्ष एवं पटना विश्वविद्यालय के दर्शन विभाग के पूर्व अध्यक्ष डा. रमेश चंद सिन्हा ने कहा कि डा. राजेंद्र प्रसाद राष्ट्रीयता की भावना से ओतप्रोत थे। उन्होंने अपनी पुस्तक ‘’इंडिया डिवाइडेड’’ में भारत के विभाजन को अनुचित बताया है। धर्म के आधार पर देश विभाजन के खिलाफ एवं ईमानदार, कर्तव्यनिष्ठ, समर्पित कार्यकर्ता थे।

आधुनिक भारत के निर्माता थे राजेन्द्र प्रसाद

डॉ. राजेंद्र प्रसाद की पौत्री ने कहा कि यहां की धरती पर पहले भी आ चुकी हूं। इस बार इस संस्थान में आकर खुशी हो रही है। आज समाज में प्रत्येक कार्य को लाभ हानि की दृष्टि से देखा जाता है। इतिहास को तोड़ मरोड़ कर प्रस्तुत किया जा रहा है। डा. राजेंद्र प्रसाद को इतिहास में उचित सम्मान नहीं मिला। जबकि नए भारत के निर्माण में उनके योगदान को भुलाया नहीं जा सकता है। सरकार द्वारा उनकी उपेक्षा हुई है। नव नालंदा महाविहार उनको याद करके नेक काम कर रहा है। उन्होंने कहा कि राजेन्द्र बाबू आधुनिक भारत के निर्माता थे। सारा जीवन देश हित में लगा दिया। गांधीजी के सचिव एवं सहायक थे। उनको खादी और हिंदी से भी बहुत प्रेम था। उन्होंने 1934 में बिहार के भूकंप पीड़ितों की सहायता की।

प्रतिमा का अनावरण

इस अवसर पर पुस्तकालय भवन के सामने राजेंद्र प्रसाद की प्रतिमा का अनावरण किया गया। डॉ. निहारिका लाभ, रजिस्ट्रार डॉ. एसपी सिन्हा ने धन्यवाद ज्ञापन दिया। संगोष्ठी में प्रो. उमाशंकर व्यास, प्रो. प्रद्युमन दुबे, डॉ. रूबी कुमारी, डा. विश्वजीत कुमार, प्रो. मृदुला प्रकाश, नेशनल क्रिएटिव स्कूल के निदेशक शांतिनिकेतन, तथा अन्य विश्वविद्यालयों के अध्यापक उपस्थित थे। महाविहार के कुलपति ने कहा कि राजेंद्र बाबू रोल मॉडल हैं। वे सनातनी हिंदू थे। इस अवसर पर उनके जीवन पर आधारित चित्र प्रदर्शनी का भी उद्घाटन किया गया। ‘’श्री नालंदा’’ जर्नल का लोकार्पण भी किया।

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