आलू बीज उत्पादन क्षेत्र में पहचान दिलाने की कवायद शुरू, प्रति हेक्टेयर ‌12, 250 रुपए का दिया जाएगा अनुदान

Bihar Sharif News - सूबे में नालंदा जिले को कभी आलू बीज उत्पादन के लिए जाना जाता था। अब जिले के किसान सब्जी उत्पादन के रूप में खेती करने...

Bhaskar News Network

Nov 11, 2019, 06:56 AM IST
Bihar Sharif News - efforts to identify potato seed production area started grant of rs 12250 per hectare will be given
सूबे में नालंदा जिले को कभी आलू बीज उत्पादन के लिए जाना जाता था। अब जिले के किसान सब्जी उत्पादन के रूप में खेती करने में जुटे हैं। इस कारण किसानों को अपेक्षित आमदनी नहीं मिल पा रही है। उद्यान विभाग द्वारा पुन: बीज उत्पादन के क्षेत्र में पहचान दिलाने के लिए तैयारी शुरू कर दी गई है। इसके लिए वित्तीय वर्ष में 300 हेक्टेयर में बीज उत्पादन का लक्ष्य रखा गया है। इसके लिए किसानों से बात कर उन्हें जागरूक करने का प्रयास किया जा रहा है। वर्तमान में जिले के किसान आलू की खेती सब्जी उत्पादन के रूप में कर रही है इस कारण लोग कुरफी और पोखराज को ज्यादा इस्तेमाल कर रहे हैं। क्योंकि पुखराज अन्य आलू के अपेक्षा अधिक उत्पादन देता है लेकिन ज्यादा समय तक सुरक्षित नहीं रह सकता है। किसानों को उचित जानकारी नहीं रहने के कारण प्रत्येक वर्ष हजारों क्विंटल आलू बर्बाद हो जाता है। किसानों को सब्जी के साथ-साथ बीज उत्पादन के लिए कुफरी ख्याति किश्म लगाने के लिए किसानों से संपर्क किया जा रहा है। उद्यान विभाग के सहायक निदेशक रामकुमार ने बताया कि आलू बीज उत्पादन के क्षेत्र में नालंदा को पूर्णजीवित करने का प्रयास किया जा रहा है। इसके लिए किसानों को कुफरी ख्याती लगाने के लिए जागरूक किया जाएगा। इसके लिए किसानों को अररिया केबीके से आधार बीज उपलब्ध कराया जाएगा। इसके लिए किसानों को 2 हजार प्रति क्विंटल बीज उपलब्ध कराया जाएगा। इसके अलावा किसानों को प्रति हेक्टेयर 12250 रुपए का अनुदान भी दिया जाएगा। उद्यान विभाग के समन्वयक धनंजय कुमार ने बताया कि आज से 10 साल पूर्व आलू बीज उत्पादन के क्षेत्र में नालंदा की पहचान थी। यहां से उत्पादित बीज बंगाल और पंजाब जैसे राज्यों में सप्लाई होता था। पहले कुरफी ख्याती एवं बंगाल ज्योति की खेती होती थी। इस कारण नालंदा में सब्जी से ज्यादा बीज का उत्पादन होता था। उस वक्त स्टोरेज की भी क्षमता पर्याप्त थी। लेकिन कुरफी पुखराज आने के बाद उसके उत्पादन को देख धीरे-धीरे किसानों ने आलू को सब्जी के रूप में उत्पादन करना शुरू कर दिया। नतीजतन उत्पादन के अनुसार कोल्ड स्टोरेज नहीं रहने के करण प्रत्येक साल सैंकड़ों क्विंटल आलू बर्बाद हो जाता है।

किसानों को किया जा रहा जागरूक | सहायक निदेशक उद्यान ने बताया कि इस योजना के तहत जिले में 300 हेक्टेयर में बीज उत्पादन करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। लेकिन शुरूआती दौर में किसानों को पहले की स्थिति में लाना कठिन चुनौती है। इसके लिए किसानाें को जागरूक किया जा रहा है। ताकि कम से कम 100 हेक्टेयर में भी बीज उत्पादन हो जाता है तो अगले साल लक्ष्य को पूरा करना मुश्किल नहीं होगा।

क्या है अंतर | उद्यान पदाधिकारी ने बताया कि कुरफी ख्याती और कुरफी पुखराज में अंतर देखा जाए तो उत्पादन छोड़ कर सभी मामले में कुरफी ख्याती बेहतर है। उत्पादन के दृष्टिकोण से देखा जाए तो कुरफी ख्याती 250-300 प्रति हेक्टेयर एवं पुखराज 350-400 प्रति हेक्टेयर उत्पादन है। इसके अलावे कुरफी ख्याती ज्यादा स्वादिष्ट होता है। स्टोरेज की क्षमता ज्यादा दिनों तक होती है। 10-15 दिन पहले उपज अवधि है। पत्ता कम फैलता है इसके अलावे किमत भी ज्यादा मिलता है। जबकि पुखराज को देखा जाए तो कम दिनों तक स्टोरेज क्षमता होने के कारण सड़ने की शिकायत ज्यादा होती है। उत्पादन ज्यादा होता है लेकिन किमत कम मिलती है।

27 हजार हेक्टेयर में होती है खेती

विभागीय जानकारी के मुताबिक जिले में करीब 27 हजार हेक्टेयर में आलू की खेती होती है। जिसमें करीब 5-7 प्रखंडों में व्यापक रूप से ही है। इसके अलावे सामान्य खेती की जाती है। बिहारशरीफ, कतरीसराय, नूरसराय, रहुई, चंडी एवं नगरनौसा में करीब 50-60 प्रतिशत एवं अन्य प्रखंडों में 30-40 प्रतिशत आलू की खेती की जाती है।

जिले में आलू और प्याज के पैदावार

आलू - पैदावार-27172 हेक्टेयर ,उत्पादन-565178 मीट्रिक टन

प्याज - पैदावार-5967 हेक्टेयर ,उत्पादन-144401 मीट्रिक टन

किसानों की बढ़ेगी आमदनी

सहायक निदेशक उद्यान ने बताया कि आलू उत्पादन के क्षेत्र में नालंदा के किसानों की एक पहचान है। लेकिन बीज उत्पादन के क्षेत्र में जिलों को पहचान दिलाने के लिए किसानों को कुरफी ख्याती आलू को लगाना होगा। सब्जी के साथ-साथ बीज उत्पादन कर किसान अपनी आमदनी को दुगनी कर सकते हैं। उन्होंने बताया कि इस योजना के लिए सबसे पहले बृहद स्तर पर आलू की खेती होने वाले गांव को चिन्हित कर किसानों को जागरूक किया जाएगा।

जिले में कार्यरत कोल्ड स्टोरेज

जिले में 17 कोल्ड स्टोरेज आलू और 5 कोल्ड स्टोरेज प्याज के लिए कार्यरत है। जिला में कुल 44 कोल्ड स्टोर था मगर बिजली के आभाव और आर्थिक तंगी के कारण 27 कोल्ड स्टोर बंद हो गया है। और वर्तमान में 17 कोल्ड स्टोर चालू है जिसमे लगभग 5 लाख टन आलू रखने की क्षमता है मगर इसके बावजूद लगातार पैदावार अधिक होने के कारण किसानो का आलू या तो खेत में या फिर किसानो के घरो में सड़ जाता है।

X
Bihar Sharif News - efforts to identify potato seed production area started grant of rs 12250 per hectare will be given
COMMENT

आज का राशिफल

पाएं अपना तीनों तरह का राशिफल, रोजाना